वैदिक उपासना पीठके मानपुर आश्रममें इस वर्ष बसंत पंचमीमें स्थानान्तरित होना एक ईश्वरीय नियोजन !


     पिछले वर्ष सितम्बर माहमें हमने सोचा कि अप्रैल माहमें हम इंदौर नगरसे मानपुरके निर्माणाधीन आश्रममें स्थानान्त्तरित होंगे ! क्योंकि स्वास्थ्यकी स्थिति तो अपंगों जैसी ही हैं ! इसलिए सोचा कि लेखन इत्यादि भी रहता है; अतः सब धीरे-धीरे व्यवस्थित होने देते हैं ! किन्तु तभी दिसंबरके प्रथम सप्ताहमें ऐसे विचार आने लगे कि जितना शीघ्र हो स्थानांतरित होना है ! मैंने पंचांगकी शुभ तिथि देखी तो वास्तु प्रवेश हेतु बसंत पंचमी सबसे निकटकी शुभ तिथि थी ! तो इसे ईश्वर इच्छा मानकर उस तिथिमें आश्रमके उद्घाटनकी तिथिकी घोषण कर दी; किन्तु निर्माण कार्यको इतने अल्प समयमें पूर्ण करने हेतु हमें अत्यधिक परिश्रम करना पडा ! क्योंकि मिस्त्री वर्गकी विशेषता तो आप सबको ज्ञात ही होगी वे कभी भी समय सीमामें कुछ भी पूर्ण नहीं करते हैं ! अर्थात स्थूल अडचनोंके साथ ही दुर्बल स्वास्थ्य, अर्थकी कमी एवं सूक्ष्मकी अडचनें यह सब सहते हुए किसी प्रकार हम बंसत पंचमीतक उद्घाटन हेतु आश्रमकी तैयारी कर पाए ! अब जब इन्दौर महानगरकी स्थिति देखती हूं तो ज्ञात होता है कि क्यों ईश्वरने मुझे यथाशीघ्र इन्दौर महानगरसे स्थानांतरित होनेका विचार दिया था ! आज जहां सभी इंदौरवासी कोरोनाके प्रकोपके कारण शासकीय आदेश अनुसार अपने घरोंमें दृष्टिबंद (नजरबन्द) हैं वहीं हम आश्रम परिसरके खुले वातावरणमें एवं ग्रामीण परिसरसे यहां कोरोनाका भी अंश मात्र भी प्रकोप नहीं और हम अच्छेसे रह रहे हैं ! ग्रामीण परिवेश होनेके कारण यहां हरी व ताजी तरकारी भी सहज ही उपलब्ध हो जाती हैं ! और बंदीसे दो दिवस पूर्व मैं आश्रमके निर्माणसे सम्बन्धित कुछ वस्तुओंके शोध हेतु मानपुरसे इंदौर नगर गयी थी तो हम मार्ग भटक गए और ऐसे मार्गपर आ गए जहां अन्नकी थोक मंडी थी ! हमें जो वस्तु क्रय करने थे उसे हम क्रय करते समय यूं ही दूकानदारसे पूछा कि क्या ये थोक मंडी है और यदि है तो यहां अन्न इत्यादि लेनेके लिए कौनसि दूकान अच्छी होगी ! मैंने सोचा आये ही हैं तो थोक मंडीसे कुछ राशन ले लौटते हैं, क्योंकि मानपुर एक छोटासा गांव होनेके कारण यहां सब कुछ मनोनुकूल मिलता भी नहीं है और पैसे भी अधिक लगते हैं ! तो उन्होंने हमें एक दूकान बतायी वहां जानेपर हमने अपने आश्रमके लिए दैनिक उपयोगके सामग्री एवं अन्न तो ले ही लिए, साथ ही अपने बाबा गुरुके आश्रममें अर्पण करने हेतु भी कुछ अन्न ले लिए ! आते समय हमें रात हो गयी थी तो हमें सोचा कि दो-तीन दिवस पश्चात तो आना ही हैं तब दे देंगे; किन्तु दो दिवस पश्चात ही सर्वत्र बंदीकी घोषणा हो गयी ! इसप्रकार ईश्वरने आश्रम हेतु अगले कुछ माहके लिए सब कुछका नियोजन बहुत ही अच्छेसे कर दिया; इस हेतु उनके चरणोंमें कोटिश: कृतज्ञता ! उस दिवस इंदौरसे आनेके पश्चात मुझे विचार आने लगे कि इस महामारीका दुष्प्रभाव अगले तीन माहतक रहेगा ही इसलिए ईश्वरने यह सब पूर्वसिद्धता करवा कर ले ली ! – (पू.) तनुजा ठाकुर, संस्थापिका वैदिक उपासना पीठ


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