उपासनाका गुरुकुल कैसा होगा ? (भाग – १५)
उपासनाके गुरुकुलमें सभी विद्यार्थियोंको आयुर्वेदका ज्ञान बाल्यकालसे ही दिया जाएगा । यह विषय भी अनिवार्य विषयोंमें रहेगा, जिसका प्राथमिक स्तरका अध्ययन सभीको करना अनिवार्य होगा । साथ ही जो विद्यार्थी सीखनेको इच्छुक होंगे, उन्हें अनेक प्रचलित अथवा लुप्तप्राय वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियोंमें उन्हें पारंगत किया जाएगा |
आयुर्वेदके प्रसार हेतु उपासनाके गुरुकुलमें विशेष रूपसे एक औषधि वाटिका लगानेका नियोजन किया है । वैसे भी अभीतक जितने भी वृक्ष हमने उपासनाके मानपुर आश्रममें लगाएं हैं, वे सब आयुर्वेदके अनुसार एवं कर्मकाण्डके अनुष्ठानको करने हेतु जिनकी उपयोगिता है, वही लगाएं हैं और ये सब तथ्य ध्यानमें रखकर ही हमने ग्रामीण क्षेत्रमें आश्रमका निर्माण किया है । इस आश्रमके आस-पास बहुत विशाल वनक्षेत्र भी है, जहां ले जाकर विद्यार्थियोंको जडी-बूटियोंका अभिज्ञान भी कराया जाएगा । निकट भविष्यमें एक बहुत विशाल औषधि वाटिका लगानेका नियोजन कर रही हूं ।
गुरुकुलके विद्यार्थियोंको बाल्यकालसे गुरुकृपायोग अनुसार साधना कराई जाएगी, उनका रहन-सहन, दिनचर्या आदि सब साधकोंके समान होगा; अतः उनकी सूक्ष्म इन्द्रियां भी शीघ्र ही जाग्रत होंगी; इसलिए उन्हें रोगके निवारणसे पूर्व उसका सूक्ष्मसे कारण जाननेका भी अभ्यास कराया जाएगा । उन्हें नाडी शास्त्र, प्राणशक्ति चिकित्सा प्रणाली जैसे सूक्ष्म चिकित्सा शास्त्रोंमें भी पारंगत किया जाएगा अर्थात उपासनाके गुरुकुलसे निकला विद्यार्थी, सामान्य रोगोंका उपचार करनेवाला, एक कुशल चिकित्सक भी होगा ।
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