उपासनाका गुरुकुल कैसा होगा ? (भाग-५)


उपासनाके गुरुकुलमें बाल्यकालसे ही विद्यार्थियोंको साधना सिखाई जाएगी फलस्वरूप उनके बहुमुखी व्यक्तित्वका विकास होगा ! साधनामें दो भाग होंगे, एक व्यष्टि साधना और दूसरा समष्टि साधना ! पिछले दो सहस्र वर्षोंसे आसुरी पंथोंके प्रसार एवं कुकृत्योंसे सर्वाधिक हानि हिन्दू धर्मको ही पहुंची है | अतः उपासनाके गुरुकुलमें विद्यार्थियोंको धर्मशिक्षण सूत्रबद्ध रीतिसे दी जाएगी जिससे भविष्यमें यदि वे धर्मप्रसारक बनना चाहें तो भी बन सकते हैं या सामान्य गृहस्थ रहें तो भी स्वयं धर्मपालन करे एवं अन्योंको उसका कारण बताकर धर्मपालन कराए !
     २०२३ के पश्चात अर्थात हिन्दू राष्ट्रकी स्थापनाके पश्चात भारतकी स्थितिमें चहुमुखी विकासको देखकर सम्पूर्ण विश्व भारतका अनुकरण करने हेतु प्रेरित होगा ऐसेमें हमें बहुत अधिक संख्यामें धर्मप्रसारकोंकी आवश्यकता होगी जो समाजको धर्मशिक्षण देकर उसे धर्मपथपर अग्रसर करे एवं वहां जाकर हिन्दू राष्ट्रकी स्थापनामें सहायता करे  !
     मैंने देखा है कि सामान्यत: भारतमें तीन प्रकारके गुरुकुल हैं एक जो गौ मात्र आधारित या आर्थिक स्वावलंबन हेतु ही शिक्षा देते हैं, दूसरी जो कर्मकांडकी शिक्षा देते हैं और तीसरी जो प्राचीन शिक्षण पद्धति एवं आधुनिक शिक्षण पद्धतिसे समन्वय रखनेके क्रममें गुरुकुलके मूल प्रारूपसे विमुख हो जाते हैं ! अर्थात एक आदर्श गुरुकुलकी आज भी देशमें अभाव है; इसलिए उपासनाके माध्यमसे एक आदर्श गुरुकुलकी स्थापना करनेका हमारा विचार है !  जैसे कुछ दिवस पूर्व एक विडियो मैंने देखा जिसमें गुरुकुलके विद्यार्थियोंको अंग्रेजी ठीकसे नहीं आती थी; किन्तु वे तब भी किसी पत्रकारसे कुछ प्रश्न पूछनेपर टूटी-फूटी अंग्रेजीमें उत्तर दे रहे थे ! अर्थात वह गुरुकुल आधुनिक शिक्षण पद्धतिके साथ समन्वय रखनेके क्रममें अपने विद्यार्थियोंको  स्वभाषाभिमान भी न सिखा पाए !
    अंग्रेजी एक तमोगुणी एवं अवैज्ञानिक भाषा है, २०३०के पश्चात वह एक लुप्तप्राय भाषा होगी ! जो गुरुकुल अपने बच्चोंको यह बात भी न सिखा सके एवं उन्हें अंग्रेजी सीखने या बोलने हेतु बाध्य करे वह गुरुकुल कैसे हो सकता है  ? उपासनाके गुरुकुलमें आठवीं कक्षाके पश्चात ही कोई विदेशी भाषा यदि बहुत आवश्यक तो सिखाई जाएगी ! बच्चोंको प्रथम  दस वर्ष जितना हम तमोगुणसे दूर रखते हैं उतना ही अधिक वे तेजस्वी बनते हैं ! उपासनाके गुरुकुलएं सत्त्व गुण आधारित जीवन प्रणालीका महत्त्व विद्यार्थियोंको सिखाई जाएगी; इसलिए यदि उन्हें कोई तामसिक भाषा आती भी होगी तो भी वे उसका मिथ्या प्रदर्शन नहीं करेंगे और वे तेजस्वी होंगे !


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