वैदिक उपासना पीठके वानप्रस्थ प्रकल्पकी विशेषताएं (भाग-६) / उपासनाका वानप्रस्थ प्रकल्प वृद्धाश्रमसे भिन्न कैसे होगा ? (भाग-१)
उपासनाका वानप्रस्थ प्रकल्प वृद्धाश्रम नहीं होगा; क्योंकि यहां लोग विवश होकर नहीं आएंगे; अपितु वे लोग यहां स्वेच्छासे आएंगे जिन्हें लगेगा कि अब हमें अपने सांसारिक उत्तरदायित्वमें न उलझकर अपने पारलौकिक कल्याण हेतु राष्ट्र व धर्मकी सेवा करनी है । इस उपक्रममें भाग लेनेवाले व्यक्तिकी आध्यात्मिक प्रगति हेतु विशेष ध्यान दिया जाएगा जो किसी भी वृद्धाश्रममें नहीं होता है । हमारा प्रयास तो यह रहेगा कि इस प्रकल्पको आरम्भ करनेपर समाजको कलंकित करनवाला वृद्धाश्रम पूर्ण रूपसे बन्द हो जाए । जो भी वानप्रस्थी जबतक स्वस्थ रहेंगे वे यदि राष्ट्र व धर्म हेतु यथाशक्ति सेवा देंगे तो स्वाभाविक है कि जब वे शारीरिक रूपसे असमर्थ हो जाएंगे इस उपासनाके गुरुकुलके विद्यार्थी उनकी प्रेम व भावसे सेवा कर अपना जीवन धन्य करेंगे । इससे विद्यार्थियोंमें वयोवृद्धकी सेवा कैसे करना चाहिए ?, यह संस्कार निर्माण होगा एवं अपने गृहस्थ जीवनमें अपने माता-पिताकी सेवा भावसे कर पाएंगे ।
इसलिए वानप्रस्थ प्रकल्पमें सहभागी होने हेतु इच्छुक व्यक्तिने जब शरीर स्वस्थ हो तब ही आनेका प्रयास करना चाहिए ।
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