तीर्थ पुरोहितों और साधु-सन्तोंकी मांग पूर्ण, मुख्यमन्त्री धामीने भंग किया चार धाम देवस्थानम समितिको, उत्तराखंड शासन नहीं लेगा मन्दिरोंका नियन्त्रण


३० नवम्बर, २०२१
       मुख्यमन्त्री पुष्कर सिंह धामीके शासनने उत्तराखंड चार धाम देवस्थानम समितिको भंग करनेका निर्णय लिया है । इसके समाधानके लिए एक उच्च स्तरीय समिति और एक मन्त्रिमण्डलीय उप-समितिके गठन किया गया है ।
      इस उप-समितिकी बैठक सोमवारको (२९ नवम्बर, २०२१) हुई थी, जिसमें विवरणके सभी बिन्दुओंपर चर्चा की गई । पहले तीर्थ पुरोहितों-पण्डितोंको आश्वासन दिया गया था कि इस सम्बन्धमें नवम्बर २०२१ के अन्तिम दिनतक निर्णय ले लिया जाएगा । माना जा रहा था कि साधु-सन्तोंकी शंकाओंका समाधान न कर पाने और उनकी अप्रसन्नताके कारण ही पूर्व मुख्यमन्त्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और तीरथ सिंह रावतका पद चला गया था । जनवरी २०२० में इसका गठन त्रिवेंद्र सिंह रावतने ही किया था ।
      जब प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदीने गुरु परबके दिन तीनों कृषि विधानोंको ‘वापस’ लिए जानेका निर्णय लिया, तब उत्तराखंडके मन्त्री हरक सिंह रावतने कहा था कि इसी प्रकार उनका शासनने भी बडा हृदय दिखाएगा । उन्होंने कहा था कि यदि ऐसा लगेगा कि ये जनमानसके हितमें नहीं है, तो इसे ‘वापस’ ले लिया जाएगा ।
     इसकी घोषणा करते हुए मुख्यमन्त्री पुष्कर सिंह धामीने कहा, “आप सभीकी भावनाओं, तीर्थ-पुरोहितोंके सम्मान एवं चारधामसे जुडे सभी लोगोंके हितोंको ध्यानमें रखते हुए श्री मनोहर कांत ध्यानी जीकी अध्यक्षतामें गठित उच्च स्तरीय समितिके विवरणके आधारपर शासनने चार धाम देवस्थानम समिति अधिनियम ‘वापस’ लेनेका निर्णय किया है ।” ‘सोशल मीडिया’पर भी जनमानसने इसका स्वागत किया है और हिन्दू हितमें इसे उचित बताया है ।
      इस निर्णयसे यह पुनः सिद्ध हुआ है कि अब हिन्दुओंके स्वरोंको दबाना सरल नहीं है; अतः सभी हिन्दू धर्महित हेतु मुखर रहें ! – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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