बन्दीगृहमें (जेल) गौशाला खोलनेके लिए योगी शासनने २ कोटिकी निधि जारी की


जुलाई ५, २०१८

प्रदेशमें योगी शासन आनेके पश्चात अवैध वधशालाओंपर कार्रवाईके पश्चात गौवंश घूमने लगे थे, जिस कारण सडक दुर्घटनाके साथ-साथ किसानोंकी उपजकी हानि होनेकी परिवाद मिल रही थी । ऐसेमें शासनने गौवंशके संरक्षणके साथ उनको उपयोगी भी बनानेके लिए एक विशाल योजना बनाई है । योजना कारावासमें गौशाला खोलनेकी है ! उत्तरप्रदेशके बन्दीगृहोंमें गौशाला खोलनेकी योजनाके लिए शासनने बुधवारको २ कोटि रुपयेका निधि दी है ।

गौवंशकी हत्यापर रोक और अवैध वधशालाओंको बन्द करनेके बाद खुलेमें घुमने वाले गौवंशकी संख्या काफी बढ गई है । अनाथ घूम रहे ये गौवंश किसानों और लोगोंके लिए संकट बन चुके हैं । कहीं किसानोंकी उपजको चौपट कर रहे हैं तो कहीं लोगोंको चोटिल कर रहे हैं । ये अनाथ गौवंश शासन-प्रशासनके लिए भी चुनौती बने हैं । ऐसेमें शासन प्रत्येक वह पग उठा रही है, जिससे गौवंशके संरक्षणके साथ उनको उपयोगी भी बनाया जा सके; इसीलिए, अब योगी शासन प्रदेशकी एक दर्जन बन्दीगृहमें गौशाला खोलने जा रही है । ‘उत्तरप्रदेश गौसेवा आयोग’के सचिवका मानना है कि गायोंकी सेवा करनेसे बन्दी लोगोंमें परिवर्तन होगा । साथ ही उनको दूध और जैविक कृषिसे मिले अनाज और सब्जियां भी खानेको मिलेगी ।
इस प्रकरणको लेकर बन्दीगृह प्रशासनका कहना है कि उत्तरप्रदेश में चार बन्दीगृहमें प्रथम प्रायोगिक रूपसे यह योजना लागूकी गई थी । इन चार बन्दीगृहको सम्मिलित करते हुए १२ बन्दीगृहमें गौशाला खोलनेकी योजनाके लिए शासनने सम्बन्धित विभागको निधि दे दी है । आरम्भमें एक बन्दीगृहकी गौशालामें २८ गायोंको रखा जाएगा, उसके पश्चात इसकी संख्या बढाई भी जा सकती है ।

जेल मन्त्री भी मानते हैं कि गायोंकी सेवा करनेसे बन्दी लोगोंके विचारोंमें परिवर्तन आएगा अर्थात गौसेवासे बन्दी, समाजिक बनेंगे, साथ ही गायोंके दूधका भी उपयोग कर सकेंगे ।

स्रोत : जी न्यूज



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