धर्मनिरपेक्षताके सामाजिक सिद्धान्तका पोषण करनेवाले यूरोपमें बढने लगीं हैं इस्लामिक आतंकवादी घटनाएं
अन्य देशों समान यूरोपमें भी शरणार्थी बनकर बसनेवाले मुसलमान, आतंकवादी घटनाओंद्वारा अपना रंग दिखाने लगे हैं । अब आए दिन वहां आतंकवादी घटनाएं होने लगी हैं, सभीको ‘सर्वधर्म समभाव’की खोटी सीख देनेवाले पाश्चात्य देशोंकी नींद अब ‘अल्लाहके बन्दों’के कुकृत्योंसे उडने लगी है । अब देखना यह है कि वे इस धर्मनिरपेक्षताके चोलेको ओढकर कबतक रहते हैं ? धर्म और अधर्ममें भेद न करनेके कारण ही आज सम्पूर्ण विेश्व आंतकवादसे ग्रसित है । विवेकशून्य, शिक्षित पाश्चात्योंद्वारा प्रतिपादित ऐसे सामाजिक सिद्धान्तकी अन्तत: यही परिणति होनी थी; अतः सम्पूर्ण विेश्वको धर्मका खरा अर्थ बताना अब अति आवश्यक हो गया है । (५.६.२०१७)
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