उत्तिष्ठ कौन्तेय !


गौ माताको राष्ट्रीय पशु घोषित करनेकी अनुशंसा करनेवाले न्यायाधीश है अभिनन्दनके पात्र
राजस्थान उच्च न्यायालयके एक न्यायाधीशने मात्र यह सुझाव क्या दे दिया कि गायको राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाए और गौ हत्यारोंको आजीवन कारावासके दण्डका प्रावधान हो, हिन्दूद्वेष्टाओंके सीनेपर सांप लोटने लगे हैं । चारों ओर अनेक धर्मद्रोही एवं गोमांसप्रेमी, इस सुझावका विरोध करने लगे हैं । जिस देशमें अनादि कालसे गौको पूजनीय माना गया है, जिसकी संस्कृति एवं अर्थव्यवस्थाका आधार गौ माता रही है, जिस देशमें ९० कोटिसे अधिक हिन्दू रहते हैं जिनकी आस्था गोमातासे जुडी है, उस देशमें ऐसे वक्तव्यपर गौ माताके विरुद्ध, विरोधके स्वर यह दर्शाता है कि इस देशमें धर्मद्रोहियोंकी संख्या कितनी अधिक हो गई है ! वस्तुतः तमोगुणी बाघके स्थानपर दैवी गुणयुक्त सात्त्विक गौ माताको ही राष्ट्रीय पशु घोषित करना चाहिए और यदि यह हिन्दुत्ववादी कही जानेवाली केन्द्र शासित भाजपाके कालमें यह नहीं हुआ तो गोप्रेमियों एवं हिन्दुत्वनिष्ठोंके लिए इससे अधिक क्षोभका विषय और क्या हो सकता है ? हम, राजस्थान उच्च न्यायालयकी इस अनुशंसाका समर्थन करते हैं एवं हिन्दुत्वनिष्ठ न्यायाधीश महोदय, श्री महेशचन्द्र शर्माके इस सुझावको देने हेतु, उनका अभिनन्दन करते हैं ! (१.६.२०१७)



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