हमारी संस्कृतिको नहीं स्वीकारनेवाले विदेशी प्रतिष्ठानोंका करें पूर्ण बहिष्कार !
शनिवार १५ जुलाई २०१७ को दक्षिण कोलकाताके क्वेस्ट मॉलमें एक व्यक्तिको मात्र इस कारणसे नहीं घुसने दिया गया; क्योंकि उसने धोती पहन रखी थी । जबकि धोती पश्चिम बंगालके पारम्परिक परिधानका भाग है । उस समय, उस व्यक्तिके साथ उनकी महिला मित्र अभिनेत्री देबलीना सेन भी थीं, जिनके अनुसार वे शालीन और गरिमापूर्ण परिधान धारण किए हुए थे । अभिनेत्रीने घटनाके बारेमें फेसबुकपर लिखा, “एक और घटना, भोजनालयद्वारा (रेस्तरांद्वारा) मना करनेके पश्चात् अब मॉलने धोती कुर्ता पहने हुए मेरे मित्रको भीतर जानेसे रोका । वॉकी-टॉकीपर किसीसे बात करनेके पश्चात् मात्र इसलिए भीतर जाने दिया; क्योंकि वे उनसे अंग्रेजीमें बात कर रहे थे । जब हम लोगोंने मॉलकी प्रबन्धक समितिसे भेंटकी तो वहां उपस्थिति व्यक्तिने स्पष्ट कहा कि धोती या लुंगी पहने किसी भी व्यक्तिको मॉलमें आनेकी अनुमति नहीं है । यह जाति-विभेद (नस्ल भेदभाव) नहीं अपितु घिनौना है ।”
हिन्दुओ ! पहले ही ‘कान्वेंट’ विद्यार्थियोंको तिलक लगाकर और कलावा बांधकर जानेके कारण, उन्हें दिए गए शारीरिक और मानसिक प्रताडनाओंके वृत्त प्रकाशित होते रहते हैं और अब ये बहुराष्ट्रीय प्रतिष्ठान (mnc) हमें हमारे ही भारतमें हमारे पारम्परिक वस्त्रोंमें भीतर नहीं घुसने देनेका नियम बना रहे हैं, क्या हम परतन्त्र भारतमें रह रहे हैं ? ऐसे सभी विदेशी प्रतिष्ठानोंको आगामी हिन्दू राष्ट्रमें धक्के मारकर बाहर भगाया जाएगा ! (१७.७.२०१७)
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