कश्मीरमें पृथकवादी तत्त्वोंपर अंकुश लगनेसे पत्थर फेंकेनेवालों हुए लुप्त !
सेना, पुलिस और राष्ट्रीय जांच अभिकरणके (एनआइए) अच्छे सामंजस्यने कश्मीरमें पृथकवादी तत्त्वों(अलगाववादियों) और आतंकवादकी कमर तोडकर रख दी है। इसका सबसे बडा लाभ कश्मीरमें शांति बनानेमें अवरोधक बन चुकी पत्थर फेंकनेवालोंपर अंकुश लगानेमें हुआ है । पृथकवादी तत्त्वोंपर अंकुश लगानेके साथ पत्थर फेंकनेवालोंकी धरपकड और उनका वित्तीय जाल नष्ट होनेसे अब कश्मीरमें पत्थर फेंकनेका व्यवासय मंद पड चुका है । प्राप्त समाचार अनुसार मस्जिदोंसे गूंजनेवाले जिहादी गीत और भडकाऊ भाषण भी पत्थर फेंकनेवालोंकी धार तेज करनेमें समर्थ दिखाई नहीं दे रहे हैं । घाटीमें अब कहीं भी पत्थरबाज यूं ही घूमते और जनजीवनको प्रभावित करते नहीं दिखते, अपितु सुरक्षाकर्मियोंसे दृष्टि बचानेका प्रयास कर रहे हैं ।
प्रत्यक्षं किम् प्रमाणंका यह सिद्धान्तको कश्मीरमें पुनः सिद्ध हो गया है | पृथकवादी तत्त्वों एवं पत्थर फेंकनेवालोंका सीधा सम्बन्ध है, यह भी उजागर हो गया है । कश्मीरमें पृथकवादी तत्त्वोंपर अंकुश लगानेवाले सभी सुरक्षा दल, अभिनन्दनके पात्र हैं । इससे यह सिद्ध होता है कि यदि वहांपर यह अंकुश पहले ही लगाया जाता तो हमारे सुरक्षाकर्मियोंको पत्थरफेंकनेवालोंके कारण हुए भिन्न प्रकारके कष्ट सहन नहीं करने पडते । अब इन पृथकवादी तत्त्वोंपर इस देशका केन्द्र एवं राज्य शासन कठोर कार्यवाही कर, उन्हें दण्ड दे यह उनसे अपेक्षा है, जिससे ये देशद्रोही पुनः अपना सिर न उठा सके और इनका पोषण करनेवाले पाकिस्तानको भी भारत सर्व प्रकारके राजनितिक, व्यापारिक एवं सांस्कृतिक सम्बन्ध तोडकर, उसे घुटने टेकनेपर विवश करें, यह इस देशके राज्यकर्ताओंसे अपेक्षा है । – तनुजा ठाकुर (३.१०.२०१७)
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