उत्तिष्ठ कौन्तेय !


युवावर्गको आतंकवादी बननेकी ओर प्रवृत्त करनेवाले धर्मांध जाकिर नाइकका पारपत्र (पासपोर्ट) हुआ निरस्त
विदेश मन्त्रालयने धर्मान्ध जाकिर नाइकका ‘पासपोर्ट’ निरस्त कर दिया है । नाइक आतंकके कथित वित्तपोषण और धनशोधनके प्रकरणोंमें देशमें वांछित है । एनआईएके एक प्रवक्ताने आज बताया कि मुम्बई क्षेत्रीय ‘पार पत्र’ कार्यालयने जाकिर नाइकके ‘पार पत्र’को वापस लेनेके उनके विभागके अनुरोधको स्वीकृति दे दी है । ऐसे धर्मान्धोंके मात्र ‘पार पत्र’ निरस्त कर उनके अपराधको क्षमा नहीं किया जा सकता, वह भगोडा विश्वके जिस कोनेसे अपने घृणित कार्यमें निरन्तरता बनाए हुए है, वहांसे उसे शीघ्र अति शीघ्र भारतमें लाकर कठोरतम दण्ड दिया जाना चाहिए जिससे अन्य कोई धर्मान्ध भारतमें पुनः इसप्रकारके कुकर्म करनेकी धृष्टता न कर सके ! अन्यथा खाडी देशोंमें विलासिताका जीवन बितानेवाले इस धर्मान्धका मात्र ‘पार पत्र’ निरस्त होनेसे उसे कोई अन्तर नहीं पडनेवाला है |
एन.आई.ए.के अनुसार तीन बार नाइकको सीआरपीसीकी धारा १६० के अन्तर्गत जांचमें सहभागी होनेके लिए निर्देश दिए गए थे; किन्तु वह राष्ट्रद्रोही उसके समक्ष उपस्थित नहीं हुआ । उपस्थित भी कैसे होगा उसे ज्ञात है कि उसके सारे कुकर्मोंका कच्चा चिट्ठा अब खुल चुका है ! – (१९.७.२०१७)



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