उत्तिष्ठ कौन्तेय !


हमारे गुणसूत्रोंमें धर्मनिरपेक्षता नहीं धर्मतेज है !
उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने चंडीगढके इंडियन स्कूल ऑफ बिजनसकी लीडरशिप समिटमें कहा है कि भारत के गुणसूत्रोंमें (DNA में) धर्मनिरपेक्षता है, इसलिए यहां सभी धर्म, समाज और संप्रदायके लोग एक दूसरेका सम्मान करते हैं | क्षमा करें, उपराष्ट्रपति महोदय, धर्मनिरपेक्षता यह शब्द ही सौसे दो सौ वर्ष पुराना है | हमारे गुणसूत्रोंमें तो धर्मतेज था तभी आज जहां अफगानिस्तानसे लेकर पाकिस्तान तक सभी हिन्दू, मुसलमान बन गए, हमारे धर्म तेजके हम आज तक हिन्दू बने रहे और अनेक विदेशी अहिंदू आक्रान्ताओंका सामना कर अपने धर्मको बचाते रहे |
यह तो मैकालेकी निधर्मी शिक्षण पद्धतिने हिन्दुओंपर धर्मनिरपेक्षताका काला आवरण डाल दिया है जिसने आजके हिन्दुओंको निस्तेज कर रखा है | हम हिन्दुओंने सदैव ही दूसरे पंथोंका सम्मान किया है; किन्तु अहिंदुओंके हमारी इसी भावनाका लाभ उठाकर हमपर सदैव ही अत्याचार किये हैं और हमपर राज भी किया है | अब हिन्दुओंको और भारतको धर्मनिरपेक्षता नहीं ज्वलंत हिन्दू धर्मतेज पुनर्जीवन दे सकता है | – तनुजा ठाकुर (२४.९.२०१७)



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