उत्तिष्ठ कौन्तेय ! 


कृतघ्न शासनके (सरकारके) पास नहीं हुतात्माओंका ब्योरा, बिना सूची गए ‘शहीदोंके शब्दकोष’ के ५  संस्करण
भारतकी स्वतन्त्रता संग्राममें किन वीरोंने अपने प्राणोंकी आहुति दी, ऐसे हुतात्माओंकी कोई सूची केन्द्रीय गृह मन्त्रालयके पास नहीं है !  आरटीआईके अन्तर्गत  मांगी गई जानकारीके उत्तरमें मन्त्रालयका कहना है कि गृह मन्त्रालय देशमें  न तो किसी व्यक्तिको (जीवित या मृत) हुतात्मा घोषित करता है और न ही हुतात्माओंकी कोई अधिकारिक सूची ही तैयार करता है ।
वहीं, भारतीय ऐतिहासिक अनुसन्धान परिषद (आईसीएचआर) द्वारा ‘डिक्शनरी ऑफ मारटियर्स: इंडियन फ्रीडम स्ट्रगल (1857-1947)’ के अबतक पांच संस्करण  प्रकाशित कर दिए गए हैं, जबकि उनके पास भी हुतात्माओंकी कोई सूची नहीं है ।
विशेष बात यह भी है कि आरटीआईके अन्तर्गत सूचना पानेको इच्छुक आवेदकको बीते तीन वर्षसे केन्द्र शासनके किसी विभागसे हुतातामाओंकी सूची नहीं मिल सकी है । पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालयके अधिवक्ता एच सी अरोडाने वर्ष २०१५ में भारत  शासनद्वारा बनाई गई हुतात्माओंकी सूचीकी मांग करते हुए केन्द्रीय गृह मन्त्रालयको आरटीआईके अन्तर्गत आवेदन किया गया ।
इस पर गृह मन्त्रालयने (स्वतन्त्रता सेनानी डिवीजन)  स्पष्ट कर दिया कि मन्त्रालय ऐसी कोई सूची बनाने या किसीको हुतात्मा घोषित किए जानेकी प्रक्रियासे जुडा हुआ नहीं है और इस बारेमें जानकारी देनेके लिए आवेदनको भारतके राष्ट्रीय अभिलेखागारमें स्थानान्तरित किया जा रहा है ।
इससे बडी क्षोभकी बात और क्या हो सकती है कि जिन हुतात्माओंके कारण आज हम स्वतन्त्र भारतमें सांस ले रहे हैं उनकी सूची भी हमारे शासनके पास नहीं है ! जिन वीरोंने अपना सर्वस्व भारत माताके लिए बलिदान कर दिया, क्या स्वतन्त्रता पश्चात कांग्रेस शासनने उनके नाम और उनकी जीवनीकी जानकारी सभी राज्यों, जनपदों और मण्डलोंसे नहीं लेनी चाहिए थी ? किन्तु जिस देशमें क्रान्तिकारियोंको आंतकवादी कहा जाता हो उस देशके निकृष्ट राजनेताओंसे राष्ट्र प्रेमियों और बलिदानी वीरोंकी सूचीका कार्य कैसे हो सकता है ? उन्हें तो स्वतन्त्रता पूर्वसे अपनी रोटी सेंकनेकी महामारी लग चुकी थी और यह संक्रमण अब सर्वत्र व्याप्त हो चुका है, ऐसे सभी कृतघ्न राज्यकर्ता धिक्कारके पात्र हैं, मोदी शासन शीघ्र इस भयंकर भूलकी सुधार करे और सभी हुतात्माओंकी सूची भारतके प्रत्येक खण्डसे प्राप्त कर उसे पाठ्यक्रमोंमें स्थान दे, यह सभी राष्ट्रप्रेमियोंकी अपेक्षा है ! – तनुजा ठाकुर (१४.५.२०१८)


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