उत्तिष्ठ कौन्तेय
मन्दिर शासकीयकरणका (सरकारीकरणका) दुष्परिणाम, तिरुपति बालाजी मन्दिरमें १०० कोटिका घोटाला, हटाए गए मुख्य पुजारी
पुजारी रमन्ना दीक्षितुलुने आरोप लगाया था कि तिरुपति मन्दिर प्रशासन मन्दिरमें चढावेका दुरुपयोग करता है। भारतके सबसे अमीर मन्दिरोंमेंसे एक विश्व प्रसिद्ध तिरुपति बालाजी मन्दिरमें घोटालेके आरोप लगे हैं। वर्तमान मन्दिर प्रशासनपर करोडों रुपएका घोटाला करनेके आरोप लगे हैं। इन्हीं आरोपोंके मध्य मन्दिरके मुख्य पुजारीको हटा दिया गया है। पुजारी रमन्ना दीक्षितुलुने आरोप लगाया था कि तिरुपति मन्दिर प्रशासन मन्दिरमें चढावेका दुरुपयोग करता है।
मुख्य पुजारी रमन्नाने आन्ध्र प्रदेशके मुख्यमन्त्री चन्द्रबाबू नायडूपर गम्भीर आरोप लगाए हैं। मन्दिरके मण्डल (बोर्ड) सदस्योंको मुख्यमन्त्री चुनते हैं। रमन्नाका आरोप है कि मन्दिरके रसोईघर जहां सहस्र वर्षसे प्रसाद बन रहा था, उसे तुडवाकर करोडोंके प्राचीन आभूषण और लुप्त कर दिए गए हैं।
पुजारी रहे रमन्नाने आरोप लगाया कि तिरुपति मन्दिरके सौ कोटिकी राशि चन्द्रबाबू नायडूने मन्दिरके नियम विरुद्ध अपने राजनीतिक निर्णयके लिए व्यय करवा दिए ! इसी आरोपके पश्चात पुजारी रमन्ना दीक्षितुलुको हटा दिया गया है।
पूर्वकालके राज्यकर्ता मन्दिरोंको दान देते थे, नूतन मन्दिर बनवाते थे एवं पुराने मन्दिरोंका संरक्षण करते थे ! आजके निधर्मी और अधर्मी राज्यकर्ता मन्दिरोंके धनसे अपना राजनीतिक रोटियां सेंकते हैं, नूतन मन्दिर तो नहीं बनवाते हैं, विकासके नामपर पुराने मन्दिरपर ‘बुलडोजर’ चलवाकर तुडवा देते हैं और मन्दिरके धनपर अपनी गिद्ध दृष्टि रखकर, उसका ‘सरकारीकरण’ कर, धन हडपते हैं ! ऐसे राज्यकर्ताओं और उनके साथ मन्दिरके वे सब भ्रष्ट कर्मचारियों और पुरोहितगणको नरकमें भी स्थान मिलेगा क्या ? ये तो मात्र गन्दी नालीके कीडे बनकर उनमें सहस्रों वर्ष सडनेकी पात्रता रखते हैं !- तनुजा ठाकुर (२२.५.२०१८)
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