मदरसोंमें NCERT पाठ्यक्रम लागू करनेपर भडके आजम खान, बताया हठधर्मी निर्णय
उत्तर प्रदेशके मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथकी अध्यक्षतामें २२ मईको केन्द्रीय मन्त्रियोंकी बैठकमें मदरसोंमें शिक्षाके स्तरमें सुधार लानेके लिए महत्त्वपूर्ण निर्णय लिया गया। अब इस राज्यके मदरसोंमें धार्मिक शिक्षाके अतिरिक्त पाठ्यक्रममें एनसीईआरटीकी पुस्तकें सम्मिलित होंगी। मदरसोंमें हिन्दी, अंग्रेजी, विज्ञान, गणित, कम्प्यूटर और सामाजिक विज्ञानके पाठ्यक्रमके लिए ये आवश्यक था कि हिन्दी और अंग्रेजी भाषामें इनकी पुस्तकें उपलब्ध कराई जाएं ! जानकारीके अनुसार, ये संशोधन प्रस्ताव राज्य मदरसा ‘बोर्ड’ने दिया था ।
उत्तर प्रदेशके पूर्व केंद्रीय मंत्री आजम खान योगी शासनके इस निर्णयपर भडक गए हैं, शुक्रवार, २५ मईको रामपुर में उन्होंने कहा कि यह एक हठधर्मिताका निर्णय है। आजम खानने कहा कि ऐसा करना सभी मदरसोंंकी व्यवस्थामें हस्तक्षेप करने जैसा और एक प्रकारका दण्ड है । उन्होंने कहा कि शासन कुछ मौलवियोंको वेतन देता है। कुछ मदरसोंको शासनकी ओरसे सहायता भी मिलती है। उन्होंकने इसे ही अपराधका दण्ड बताते हुए कहा वो लोग सहायता देते हैं तो यह उसी सहायताका दण्ड है। शासन सहायतापर विचार करें कि यह सहायता देना उचित है या अनुचित; किन्तु मदरसोंकी स्वाययत्त्ता, स्वतंत्रतापर किसी प्रकारका कोई कुठाराघात नहीं करना चाहिए !
‘मुसलमान इस देशमें पिछडे हुए है’ यह रोना सभी मुसलमानी नेता रोते रहते हैं और अब जब शासन उन्हें आगे लाने हेतु योग्य प्रयास कर रहा है तो उसे वे हस्तक्षेप मानते हैं; इससे ही यह सिद्ध होता है ये राजनेता ही मुसलामानोंके पिछडे रहनेके मूल कारण हैंं, ये ही नहीं चाहते हैं कि उनके पन्थके लोग सभी लोगोंके साथ मिलकर आगे बढें; क्योंकि यदि ऐसा हुआ तो उनका क्या होगा ?
दूसरी बात यह है कि जिस अधिकारसे अल्पसंख्यक शासकीय सुविधा हाथ फैलाकर लेते हैं, उसी कर्तव्यबोधसे उन्हें शासनके निर्णयका स्वागत करना चाहिए। मदरसेसे इस्लामी शिक्षा कहां हटाई जा रही है?, वहांसे आतंकवादी निर्माण न हों इसके लिए यह पग उठाना अति आवश्यक है ! हम योगी शासनके इस निर्णयका हार्दिक स्वागत करते हैं, इसे केन्द्र शासन त्वरित अध्यादेश लाकर सम्पूर्ण भारतमें लागू करें यह उनसे अपेक्षा है ! – तनुजा ठाकुर (२६.५.२०१८)
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