उतिष्ठ कौन्तेय


उतिष्ठ कौन्तेय (०६/०४/२०२०)

१. केन्द्र शासनद्वारा अपने ही दलके नेताको ‘ओएनजीसी’का संचालक बनाए जानेके निर्णयपर विवाद हो गया है । केन्द्र शासनने भाजपाके राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्राको ओएनजीसीका संचालक बनाया हुआ था, जिसको लेकर उच्चतम न्यायालयमें याचिका प्रविष्ट की गई है ।
    अब सर्वोच्च न्यायालयने केन्द्रको अधिसूचना जारीकर उत्तर मांगा है । न्यायालयने कहा कि उनके पास न इसकी योग्यता है तो २७ लाख रूपएका वार्षिक वेतन क्यों और किस आधारपर दिया जा रहा है ?
    क्या ‘ओएनजीसी’के संचालक सदृश बडे पदके लिए कोई योग्यता आवश्यक नहीं है और यदि है तो  पात्राजीको किस आधारपर इतनी बडे प्रतिष्ठानके मुख्य पदपर नियुक्त किया गया ? राजनीतिक दलोंकी इसी स्वार्थी वृत्तिके कारण आज बडे-बडे प्रतिष्टानोंकी आर्थिक स्तिथि अति दयनीय होती जा रही है !
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२. ५ अप्रैल २०२० को प्रयागराजके करोली थाना क्षेत्रके बक्शी मोडामें प्रातःकाल चायकी दुकानपर लोटन निशाषके जमातियोंपर टिप्पणी करनेपर गांवके ही मोहम्मद सोनाने गोली चला कर हत्याकर दी । वहां उपस्थित लोगोंने पकडकर उसे पुलिसको सौंप दिया । मुख्यमन्त्री योगीजीने घटनाका संज्ञान लेते हुए आरोपीपर ‘रासुका’ लगाने और मृतकके परिवारको ५ लाख देनेकी घोषणा की है ।
   इस प्रकरणसे ज्ञात होता है कि इन जमातियोंके प्रति मुसलमानोंकी कैसी सोच है ? और यह सोच ही देशके लिए हानिकारक है !
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३. मध्य प्रदेशके बैतूल विपणिमें (बाजारमें) एक नूतन प्रकरण समक्ष आया है, जिसमें आरोपी अब्दुल रफीक, सादी अहमद, रितेश मधाना तिपहिया वाहनसे, चाकूपर थूक लगाकर तरबूज काटकर विक्रय कर रहे थे ! यह कृत्य पुरुषोत्तम यादवने देखा तो इसकी सूचना तत्काल बजरंग दलके विभाग संयोजक कृष्णकांत गावंडेको दी । उन्होंने कुछ युवाओं एवं प्रत्यक्षदर्शीके साथ थाने पहुंचकर इस प्रकरणकी सूचना दी । पुलिसने ३ व्यक्तियोंके विरुद्ध प्राथमिकी प्रविष्ट कर ली है व तरबूजसे भरा वाहन भी नियन्त्रणमें ले लिया है ।
    विचित्र है कि एक धर्मान्ध तरबूज विक्रेता भी योजनाबद्ध ढंगसे जिहादमें लगा है और अधिकांश हिन्दू अभी भी कथित भाईचारेके फेरमें पडे हैं !
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४. आफगानिस्तानसे सोवियत संघको उखाडनेके लिए बनी हरकत उल मुजाहिदीनके छह सहस्र जिहादियोंको पाकिस्तानमें प्रशिक्षित किया गया, जिन्होंने कश्मीरमें सेंकडों हत्याएं की और गोधरा कांडमें हिन्दू रेलयात्रियोंको  जीवित जलानेपर भी इन्हीं तबलीगी समूहपर संदेह किया जाता है । सुरक्षा विशेषज्ञ बी. रमनने बताया कि ये पाकिस्तानमें विभिन्न आंतकी संगठनोंमें प्रशिक्षण लेते रहे हैं । अमेरिकन शासनने भी वहां इनकी उपस्थितिकी शंका प्रकट की । इनमेंसे कुछ वर्ष पूर्व निजामुद्दीनकी तबलीगी परिसरमें भी रुके थे, ऐसा पाया गया ।
    आंतकी संगठनोंसे जुडे तबलीगी समूह आंतक और जिहाद ही फैलानेका कार्य करनेमें विदेशी प्रचारकोंका प्रयोग करते हैं, भारत शासनद्वारा अब शीघ्रातिशीघ्र इसपर प्रतिबन्ध लगाना आवश्यक है एवं ऐसे समूहके क्रियाशील लोगोंको बंदी बनाया जाए यह राष्ट्रप्रेमियोंकी मांग है !
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५. इन्दौरके टाटपट्टी बाखल क्षेत्रमें, जहां कोरोना संक्रमणकी जांच हेतु गए चिकित्सकोंके दलपर जिहादियोंद्वारा पथराव किया गया था । अब उसी क्षेत्रके १२ व्यक्तियोंके कोरोना विषाणुओंसे संक्रमित होनेकी पुष्टि प्रशासन कर चुका है ।
   जहां शासन व प्रशासन जिहादियोंके स्वास्थ्यको लेकर सजगतासे क्षेत्रमें महामारी रोकने हेतु प्रयास कर रहा है, वही ये जिहादी अपने इस कुकृत्यपर लेशमात्र भी लज्जित भी नहीं हैं; अतः ये चिकित्साके नहीं वरन दण्डके योग्य हैं ।
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६. चीनद्वारा लाभ कमाने हेतु स्पेनको ४६७ मिलियन ‘यूरो’की निकृष्ट चिकित्सा उपकरण सामग्री भेजनेका प्रकरण उजागर हुआ है ।  साथ ही वुहान राज्यमें आपात स्थितिमें इटलीद्वारा दानमें दिए गए ‘मास्क’, ‘सैनिटाइजर’ और ‘टैस्टिंग किट’ पुनः उसीको विक्रय कर दिए !
   अब समय आ चुका है कि संयुक्त राष्ट्र संघ चीनपर कठोर प्रतिबन्ध लगाए तथा उसकी सुरक्षा परिषद्की स्थायी सदस्यता निरस्त करे ! विश्वके अन्य देश एकजुट हो उसका आर्थिक और राजनीतिक बहिष्कार करे !


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