वृत्त पत्रोंमें देशके सुप्रसिद्ध अधिवक्ता श्री हरीश साल्वेद्वारा मात्र एक रुपयामें, श्री कुलभूषण जाधवका अंतर्राष्ट्रीय न्यायालयमें पक्ष रखनेकी कृतिकी सभी स्तुति कर रहे है । वर्तमान समयमें बुदधिजीवी वर्गमें राष्ट्रहित हेतु अपने कौशल्यको नि:शुल्क अर्पण करनेके प्रमाणमें अत्यधिक न्यूनता आई है, तभी यह तथ्य, समाचार बना है । वस्तुतः देशहित हेतु अपने कौशल्यको अर्पण करना, राष्ट्रके प्रति, प्रत्येक नागरिकका कर्तव्य है किन्तु अर्थको प्रधानता देनेवाले निधर्मी मैकाले शिक्षण पद्धति अनुसार शिक्षित बुद्धिजीवी वर्गमें त्यागके गुणका अभाव देखा जाता है, इसीलिए यह विषय, समाचार बन गया ! (१६.५.२०१७) – तनुजा ठाकुर
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