उत्तिष्ठ कौन्तेय !


कोलकाताके एक देवालयमें (मन्दिरमें) हिन्दी चित्रपट जगतके अभिनेता, अमिताभ बच्चनकी प्रतिमाकी स्थापना, उनके कुछ प्रशंसकोंने की है । यह प्रतिमा सुब्रतो बोसने बनाई है । मंदिरका शुद्ध संस्कृत शब्द है, देवालय अर्थात् देवताका घर, धर्मकी घोर अज्ञानताके कारण आज अनेक हिन्दू अपने धर्मके प्रतीक स्थानोंकी विडम्बना करते हैं । जबतक यह सृष्टि है, देवताका आस्तित्व, तबतक रहनेवाला है; सृष्टिको चलायमान रखने हेतु देवता, ईश्वर प्रदत्त भिन्न उत्तरदायित्वोंका निर्वाह करते है, वे मनुष्योंके तीनों प्रकारके दु:खोंको (आधिभौतिक, आधिदैविक एवं आध्यात्मिक) हरण करनेका सामर्थ्य रखते हैं, ऐसे अनेक दिव्य गुणोंके कारण, देवता पूजनीय होते हैं । क्या ऐसा कोई, गुण चित्रपट जगतके किसी अभिनेतामें होना सम्भव है, तब भी आजका मूढ़ हिन्दू, देवालय (मंदिर) बनाकर कभी किसी अभिनेता तो कभी किसी नेताकी प्रतिमाकी स्थापना कर, उसकी आरती उतारते हैं ! यह सब धर्मशिक्षणके आभावका परिणाम है और ऐसा करनेवाले सभी हिन्दू धिक्कारके पात्र हैं ! (१३.५.२०१७)



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