उत्तिष्ठ कौन्तेय !


४ मई २०१७ को ट्वीटरपर लालू यादवने चारों पीठोंके शंकराचार्योंकी नियुक्तिमें आरक्षणकी मांग कर, हिन्दू धर्मविषयक अपनी घोर अज्ञानताका परिचय दिया है । वस्तुत: ऐसे राजनेता, अपने अभ्यासहीन वक्तव्योंसे अपनी मूर्खताको स्पष्ट रूपसे दर्शाते हैं ।सत्य है, हिन्दू धर्मके खरे बैरी, हिन्दू ही हैं !  शंकराचार्यका पद कोई चाकरी (नौकरी) नहीं है, इस हेतु व्यष्टि और समष्टि साधनाका ठोस आधार चाहिए । यह पद हिन्दू धर्मका प्रतीक स्थान है, यदि यहां भी जाति आधारित आरक्षण आ गया तो हिन्दू धर्मका अस्तित्व ही नष्ट हो जाएगा ! उस पद हेतु कमसे कम ६०% आध्यात्मिक स्तर होना ही चाहिए, तभी उस पदके साथ कोई व्यक्ति न्याय कर सकता है । यह पद, जाति आधारित नहीं, अपितु वर्ण आधारित है, जिसमें ब्राह्मण वर्णके गुणके साथ ही नेतृत्व कुशलता होती है, वही इस पदका अधिकारी हो सकता है ! (५.५.२०१७)



Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सम्बन्धित लेख


विडियो

© 2017. Vedic Upasna. All rights reserved. Origin IT Solution