‘अन्ध श्रद्धा निर्मूलन’का दुष्कृत्य, शमशानमें दिया प्रीतिभोज व मांस खाया !
अपने जन्मदिवसके प्रीतिभोज आश्रयस्थलों, जलपानगृह आदिमें होती हुई देखी होगी, क्या आपने कभी सुना या देखा है कि किसी व्यक्तिने श्मशान घाटमें दी हो ! ऐसा प्रकरण महाराष्ट्रके औरंगाबादमें सामने आया है । महाराष्ट्र ‘अन्धश्रद्धा निर्मूलन समिति’की (एमएएनएस) संस्थाके पदाधिकारीने पुत्रका जन्मदिवस भोज श्मशानमें आयोजित किया ! परभणी जिलाध्यक्षद्वारा अपने पुत्रके जन्मदिवसके भोजका आयोजन जिन्तुरके श्मशानमें किया । जन्मदिवसकी इस विचित्र भोजमें लोगोंको मांस परोसा गया ! प्रकरण सामने आनेके पश्चात ‘अन्धश्रद्धा निर्मूलन समिति’ने इस घटनासे स्वयंको पृथक करते हुए विरोध किया है । ‘महाराष्ट्र अन्धश्रद्धा निर्मूलन समिति’के कार्यकारी अध्यक्ष अविनाश पाटिलने कहा कि, इस आयोजनसे समितिका कोई लेना-देना नहीं है । इस प्रकारका कार्य अति उत्साहमें किया गया है । संगठन अन्धविश्वासके विरुद्ध कार्य करती है । श्मशानमें किया गया इस प्रकारका आयोजन समितिके आदर्शोंके विरुद्ध है । प्रकरण १९ सितम्बरका बताया जा रहा है । परभणीके समिति जिलाध्यक्ष पन्धारीनाथ शिंदेने अपने पुत्रके प्रीतिभोजका आयोजन श्मशान घाटमें किया । इसमें कई लोग सम्मिलित हुए !
‘टीओआई’में छपे समाचारके अनुसार, प्रकरण उस समय सामने आया, जब कुछ पत्रकार इस कार्यक्रममें भाग लेने पहुंचे थे । आयोजनसे पहले लोगोंने पूरे श्मशानमें गो-मूत्रका छिडकाव किया गया । इसके पश्चात मन्त्रोच्चारण कर श्मशानको पवित्र किया गया । (जब आत्माएं होती ही नहीं है तो मन्त्र और गोमूत्रकी क्या आवश्यकता थी ?) यह श्मशानमें मनानेके पीछे उनका उद्देश्य मात्र इतना था कि लोगोंको यह बताया जा सके कि श्मशानमें कोई आत्माएं नहीं रहती हैं ।
श्माशानमें आत्माएं रहती है या नहीं इस हेतु साधना करनेकी आवश्यकता होती है, बिना साधना किए ऐसे तर्क देकर समाजको दिशाहीन करना पाप है ! धर्मशिक्षणके अभावके कारण ही हिन्दुओंसे ऐसे दुष्कृत्य होते हैं । तामसिक स्थानपर शुभ कर्म करनेसे उस कर्मसे कोई आध्यात्मिक लाभ नहीं मिलता है ! – तनुजा ठाकुर (२६.९.२०१८)
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