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उत्तिष्ठ कौन्तेय – इस्लामका खरा स्वरुप


अल्लाहका आदेश था, इसलिए धर्मान्धने तोडी बजरंगबलीकी प्रतिमा !
उत्तर प्रदेशके प्रतापगढमें एक धर्मान्ध युवकने अपने दो मित्रोंके साथ मिलकर हनुमान मन्दिरका ताला तोडकर मन्दिरमें रखी प्रतिमा खण्डित कर दी और बाहर निकलकर नमाज करने लगा, तत्पश्चात उठकर इस्लामिक उद्घोष भी लगाए ! जब स्थानीय लोगोंने उन लोगोंको पकडनेका प्रयास किया तो उनमेंसे दो भाग गए और एक युवक पकडा गया, जिसे पुलिसको सौंप दिया गया । पुलिसने युवकको बन्दी बनाकर कारावास भेज दिया और मन्दिरमें नूतन प्रतिमाकी प्राणप्रतिष्ठाकी तैयारी आरम्भ कर दी ।
बताया जा रहा है कि मंगलवार, १५ जनवरीकी प्रातः प्रतापगढके पट्टी कोतवाली अन्तर्गत उडईयाडीह बाजार स्थित हनुमान मंदिरमें एक धर्मान्ध युवकने ताला तोडकर उसमें रखी बजरंगबलीकी प्रतिमाको खण्डित करके बाहर फेंंक दिया और बाहर निकलकर उसने नमाज की ! आसपासके लोगोंने जब उसे ऐसा करते देखा तो पकड लिया और उसकी पिटाई कर दी । लोगोंने जब उससे पूछा कि उसने ऐसा क्यों किया ?, तो उसने कहा कि उसे स्वप्न आया था और ऐसा करनेके लिए उसे अल्लाहने कहा था । यद्यपि वहां भीड उसे समझाती रही कि अल्लाह और भगवान एक ही हैं; परन्तु वह अपनी ही बातपर अडा रहा । पुलिसने युवकको कारावास भेज दिया । एसपी एस.आनंदने प्रकरणको संज्ञानमें लेते हुए आरोपियोंके विरुद्ध कडी कार्यवाहीके निर्देश दिए हैं ।
हास्यास्पद ही है कि जिस धर्मान्धके भीतर बालपनसे ही हिन्दूद्रोहका विष भरा गया है, उसे धर्महीन मूढ हिन्दू समझा रहे हैं कि अल्लाह और भगवान एक हैं ! क्या ऐसे  धर्मान्ध उन हिन्दुओंको अल्लाहका आदेश बताकर उन्हें उनके घरसे भगा दें, तो ये कुछ कर पाएंगें ? भारत शासन कुम्भकर्ण निद्रासे जागे और इससे पूर्व कि भारत इस्लामकी ओर बढे, ऐसे प्रकरणपर कडीसे कडी कार्यवाही करे, अन्यथा कलको अल्लाह ऐसे धर्मान्धोंको अन्य स्थानोंपर अनेकों मन्दिर तोडनेका आदेश दे सकता है, जो उनके अनुयायी अनेक शतकोंसे सर्वत्र कर ही रहे हैं और वह स्थिति राष्ट्रके लिए अत्यन्त विकट होगी !; अतः समय रहते ऐसे लोगोंको कठोर दण्ड देना अति आवश्यक है !


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