विदेशी गिरिजाघर और एनजीओद्वारा भेजा धन छत्तीसगढमें धर्म परिवर्तनका कारण


भाजपाको हरानेसे लेकर छत्तीसगढको ईसाई राज्य बनानेके प्रयत्नका कारण एक मात्र विदेशी गिरिजाघर और विदेशी  एनजीओद्वारा भेजा गया अथाह धन ही है ! ज्ञात हो कि इस समय यदि देशके किसी भी राज्यमें क्रिश्चियन मिशनरियोंकी गतिविधि बढी है तो वह प्रदेश कोई और नहीं अपितु छत्तीसगढ ही है । छत्तीसगढके भिन्न-भिन्न स्थानोंपर ‘एमपी हाउस ऑफ मैरी इमैकुलेट’से लेकर ‘एमपी होली क्रॉस सिस्टर एसोसिएशन’ जैसे मिशनरियोंको लाखों रुपये भेजे गए हैं । इससे स्पष्ट है कि ये पैसे छत्तीसगढमें होनेवाले विधानसभा चुनावमें भाजपाको हरानेके लिए व्यय हुए हैं ।
तभी तो छत्तीसगढ अभी विदेशी क्रिश्चियन मिशनरियोंके लिए सबसे उभरता हुआ गंतव्य बन रहा है । इसका एक मात्र कारण यहांपर आ रहा अपार धन है । ‘एफसीआरए’के  जालस्थलपर (वेबसाइटपर) उपलब्ध आंकडोंपर दृष्टि डालने भरसे आपको यह स्पष्ट हो जाएगा कि किस प्रकार विदेशी एनजीओसे छत्तीसगढमें पैसोंंका प्रवाह बढा है । इससे यह भी स्पष्ट हो जाता है कि भाजपा सरकार क्रिश्चियन मिशनरियोंकी गतिविधियोंको फैलने देनेके लिए एक कांटा बनी हुई थी; इसलिए भाजपाको यहांसे हरानेके लिए विदेशी धनका सहारा लिया गया है ।

केन्द्र शासन ऐसी ईसाई मिशनरियोंके कार्यकी समीक्षा करें एवं यदि प्राप्त धनका दुरूपयोग मतदान हेतु किया गया हो तो ऐसी संस्थाओंको त्वरित प्रतिबन्धित करें ! इसमें दो मत नहीं कि भाजपाने अपने चार वर्षोंंके कार्यकालमें इस दिशामें थोडा कुछ कार्य किया है; किन्तु भाजपा शासित राज्यमें यह कैसे हुआ ?, इसपर वहां शासित भाजपा नेताओंका ध्यान कैसे नहीं गया ?, विदेशसे आनेवाले धनपर समय रहते प्रतिबन्ध क्यों नहीं लगाया गया ?, ये सभी प्रश्न किसीके भी मनमें निर्माण हो सकते हैंं ! वस्तुत: विदेशी धन ईसाई मिशनरियोंके लिए पूर्णत: प्रतिबन्धित करना चाहिए; क्योंकि इसीके बलपर वे धर्मान्तरण भी करते हैं ! हिन्दू बहुल देशमें ईसाई मिशनरियोंकी क्या आवश्यकता है ? राष्ट्रहित और हिन्दू हितमें उन्हें इस देशसे निष्काषित करना चाहिए , यह कालकी मांग है एवं धर्मान्तरण रोकने हेतु यह अति आवश्यक है ! – तनुजा ठाकुर



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