उत्तराखण्ड शासनद्वारा गायको ‘राष्ट्रमाता’ घोषित किए जानेका प्रस्ताव पारित
गायको ‘राष्ट्रमाता’ घोषित किए जानेके प्रस्तावपर उत्तराखण्ड विधानसभामें हरी झण्डी दिखा दी गई है । अब इस प्रस्तावको केन्द्र शासनके पास भेजा जाएगा । प्रदेशकी पशुपालन मन्त्री रेखा आर्यने राज्य विधानसभामें यह प्रस्ताव रखते हुए कहा कि यह सदन भारत सरकारसे अनुरोध करता है कि गायको राष्ट्रमाता घोषित किया जाए ! इस प्रस्तावके पास होनेके साथ ही उत्तराखण्ड देशका ऐसा प्रथम राज्य बन गया है ।
पशुपालन मन्त्री रेखा आर्यने कहा –
– गायको मांका रूप माना गया है ।
– गायके दूधको वैज्ञानिक दृष्टि माताके दूधका सर्वश्रेष्ठ विकल्प माना गया है ।
– गाय हमारी आस्थाका प्रतीक है और उसमें ३३ कोटि देवी-देवताओंका वास माना गया है, इसके दर्शनसे ही सारे पाप दूर हो जाते हैं ।
– गायके गोबर और गौमूत्रमें औषधीय गुण भी हैं ।
– गाय एकमात्र ऐसा पशु है, जो न केवल आक्सीजन ग्रहण करता है, बल्कि आक्सीजन छोडता भी है ।
यदि गायको राष्ट्रमाताकी उपाधि दी जाती है तो उससे उत्तराखण्ड सहित देशके २० राज्योंमें लागू गोवंश सरंक्षण विधान (कानून) पूरे देशमें लागू होगा और उसके संरक्षणके प्रयासोंको और बल मिलेगा । रेखाकी इस बातका सत्ता पक्ष और विपक्षी कांग्रेसके कई सदस्योंने भी समर्थन किया । चर्चाके पश्चात, सत्ता पक्ष भाजपा और मुख्य विपक्ष कांग्रेस सहित पूरे सदनने इस प्रस्तावको सर्वसम्मति से पारित कर दिया ।
नेता प्रतिपक्ष इन्दिरा हृदयेशने कहा कि यह भी सुनिश्चित किया जाए कि राष्ट्रमाताकी उपाधि देनेके पश्चात भी गायको अपमानित न होना पडे और वह कहीं इधर-उधर भूखसे व्याकुल घूमती या प्राण त्यागती न दिखाई दे । यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई भी बछडा मारा न जाए, गायोंको उचित भोजन मिले, गोशालोंकी स्थिति ठीक हो और वृद्ध गायोंके लिए उचित व्यवस्था की जाए ।
“उत्तराखण्ड शासनके इस प्रखर हिन्दुत्वनिष्ठ निर्णयका हम हृदयसे अभिनन्दन और समर्थन करते हैं और केंद्र शासनसे आशा करते हैं कि वे गोरक्षा हेतु आगे आए व गोमाताको राष्ट्रमाताकी उपाधि देकर, इसके संरक्षण हेतु कार्य करे ।” – तनुजा ठाकुर
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