उत्तिष्ठ कौन्तेय !


प्रशासनिक अधिकारी शाह फैसलने पुनः किया भारत विरोधी विषवमन, ‘अनुच्छेद ३५-ए’को हटानेसे जम्मू-कश्मीरका देशसे सम्बन्ध समाप्त हो जाएगा !

प्रशासनिक अधिकारी शाह फैसलने राष्ट्रद्रोही वक्तव्य देते हुए अपने ‘ट्विटर हैण्डल’से कहा कि ‘अनुच्छेद ३५-ए’को हटानेसे जम्मू-कश्मीरका इस देशसे सम्बन्ध समाप्त हो जाएगा ! उन्होंने ‘ट्वीट’ कर कहा कि वे ‘अनुच्छेद ३५-ए’की तुलना विवाहके कागदी प्रपत्र (दस्तावेज) व निकाहनामासे करते हैं । यदि इसे निरस्त किया गया तो सम्बन्ध समाप्त ! इसके पश्चात कुछ भी चर्चाके लिए शेष नहीं बचता है ।

उन्होंने ‘ट्वीट’ किया कि भारतमें जम्मू-कश्मीरका विलय संविधानके लागू होनेसे पहले हुआ है । जो यह कहते हैं कि विलय अब भी अस्तित्वमें है, वे यह भूल गए हैं कि यह ‘रोका’के जैसा है । क्या रोका दो लोगोंको आपसमें बांधे रख सकता है, जब विवाहके कागदी प्रपत्र निरस्त हो गया हो ? कहा कि ‘३५-ए’को जारी रखनेसे देश की एकता व अखण्डताको किसी प्रकारका संकट नहीं है । देशकी एकता-अखण्डताको किसी भी मूल्यपर चुनौती नहीं दी जा सकती है ।
ज्ञात हो कि २०१० वर्षमें चयनित फैसल इन दिनों अमेरिकामें ‘मिड करियर मास्टर्स प्रोग्राम’ कर रहे हैं । देशमें बलात्कारकी बढती घटनाओंपर किए गए ‘ट्वीट’पर उनके विरुद्ध शासनने अनुशासनात्मक कार्यवाही आरम्भ की है ।
ऐसे राष्ट्रद्रोही वृत्तिके लोग प्रशासनिक अधिकारी कैसे बन जाते हैं ?  प्रशासनिक अधिकारीके चयन हेतु परीक्षाओंमें राष्ट्रप्रेमसे सम्बन्धित तत्त्वोंकी परीक्षा होनी ही चाहिए । अमरीकामें बैठकर राष्ट्रद्रोही विष वमन करनेवाले इस अधिकारीको इस सेवासे आजीवन निलम्बित करना चाहिए, वे इस राष्ट्रकी सेवाकी पात्रता नहीं रखते हैं ! प्रान्तवादका समर्थन और भारतसे कश्मीरको पृथक करनेकी धमकी देनेवाला व्यक्ति राष्ट्रीय स्तरके सेवक कैसे हो सकता है ? इस देशकी शिक्षा पद्धति एवं पुलिस और प्रशासनमें लोगोंके चयनमें अत्यधिक सुधारकी आवश्यकता है, जो अब हिन्दू राष्ट्रमें ही सम्भव हो सकता है ! – तनुजा ठाकुर (७.८.२०१८)



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