केरलके नि:धर्मी मन्त्रीका दुस्साहस, सबरीमालाके विद्वान तन्त्रीको ब्रह्मराक्षस कहा !
केरलके एक वरिष्ठ मन्त्रीने सबरीमालाके तन्त्रीपर (मुख्य पुजारीपर) लक्ष्य साधते हुए उन्हें ब्रह्मराक्षस कहा !
बुधवारको दोनों महिलाओंके प्रवेशके पश्चात तन्त्री कंदारू राजीवरूने ‘शुद्धिकरण’ पूजा करनेके लिए मंदिरका गर्भगृह बन्द कर दिया । केरल लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) मन्त्री और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट दलके (सीपीएम) वरिष्ठ नेता जी सुधाकरनने पूछा, “क्या एक बहनके साथ अपवित्रकी भांति व्यवहार करनेवालेको मनुष्य समझा जा सकता है ?”
प्रसार माध्यमोंसे (मीडियासे) वार्तामें उन्होंने कहा, “तन्त्री जाति दानवका एक प्रतीक है । वह एक ब्राह्मण नहीं है, वह ब्रह्मराक्षस है । यदि कोई ब्राह्मण राक्षस बन जाए तो वह भयानक बन जाएगा । वह कोई शुद्ध ब्राह्मण नहीं है । भगवान अयप्पाके प्रति उन्हें कोई प्रेम, सम्मान और निष्ठा नहीं है ।” उल्लेखनीय है कि कनकदुर्गा और बिंदुने पुलिसके घेरेमें मंदिरमें प्रवेश किया था ।
*केरलके तन्त्री हिन्दू धर्मरक्षक हैं और उन्हें ब्रह्मराक्षस बोलनेवाले धर्मके भक्षक हैं । आज ऐसे ही पुजारियों एवं ब्राह्मणोंके कारण हिन्दू मन्दिरोंमें सात्त्विकता बनी हुई है ! ऐसे धर्म रक्षकोंको ब्रह्मराक्षसकी उपमा देकर उनका अपमान करनेवालोंको कठोर दण्ड देना चाहिए ! ऐसे मन्त्री पुनः कभी भी सत्तामें न आएं, इसपर विशेष ध्यान देना चाहिए, जिस प्रजाने उसे चुनकर इतना अधिकार दिया, आज पदके मदमें अन्धे ये लोग, धर्मकी अवहेलना करते हैं !
हिन्दू धर्ममें सात्त्विक पुरुष सदैव ही नारीका सम्मान करते आए हैं और धर्म अधिष्ठित नियमका पालन करना और कारवाना, यह ब्राह्मणोंको वेद प्रदत्त अधिकार है । ऐसे धर्मद्रोही निर्लज्ज मत्रियोंके बोलनेसे कोई सात्त्विक धर्माधिकारी व्यक्ति ब्रह्मराक्षस नहीं हो सकता, हां, मृत्यु उपरान्त यदि ऐसे मन्त्रियोंको यह योनि प्राप्त हो तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए ! किन्तु इस योनि हेतु भी कुछ योग्यता होनी चाहिए, ये तो नालीके कीट बनकर सडने योग्य हैं, शेष कुछ नहीं और हमारे धर्मशास्त्रोंमें ऐसे निर्लज्ज, अहंकारी, धर्मद्रोहियोंकी यही गति बतायी गई है !* – *तनुजा ठाकुर*
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