उत्तिष्ठ कौन्तेय !


कांग्रेस शासित राजस्थानकी महिला एवं बाल विकास मन्त्री ममता भूपेश अपने एक वक्तव्यके चलते विवादोंमें घिर गईं हैं । अलवरके रैणी क्षेत्रमें सोमवार, ३१ दिसम्बरको आयोजित एक कार्यक्रममें लोगोंको सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि हमारा पहला कार्य हमारी जातिके लिए होगा । उन्होंने कहा, “प्रथम कार्य हमारा, हमारी जातिके लिए, उसके पश्चात हमारे समाजके लिए, उसके पश्चात सर्व समाजके लिए, सबके लिए ।” उन्होंने आगे कहा कि हमारा उद्देश्य यह रहेगा कि हम सबके लिए कार्य कर पाएं ।
*निर्लज्ज नेतागण पहलेसे जात-पातसे त्रस्त हिन्दू समाजमें जातिवादके बीजको सिंचित करते रहते हैं, इससे अधिक लज्जास्पद और दुर्भाग्यपूर्ण बात और क्या हो सकती है ? नेता वह होता है जो समाजको योग्य दिशा दे । जो समाजको दिशाहीन करे, उसे भिन्न वर्गों व जातियोंमें बांटे और सत्ता प्राप्त होनेपर भेदभावकी राजनीति करे, वो सत्तामें रहने योग्य नहीं होता !
   एक राजनेताके लिए प्रत्येक व्यक्ति उसकी संतान समान होता है और जैसे एक पिता अपने सभी पुत्रोंसे पुत्रवत बिना भेदभावके लालन-पालन एवं प्रेम करता है, वैसे ही राजाको करना चाहिए, यही राजधर्म कहलाता है ! किन्तु आजके इस लोकतान्त्रिक प्रक्रियासे चुने गए राजनेताओंको राजधर्मका कोई सिद्धान्त ज्ञात ही नहीं होता है ! इसलिए हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना आवश्यक है, क्योंकि तब प्रजासे बिना भेदभावके पुत्रवत प्रेम करनेवाले राजनेता सत्तासीन होंगेंं !* – *तनुजा ठाकुर*



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