उत्तिष्ठ कौन्तेय !


पुलवामामें मारे गए आतंकियोंके समर्थनमें परिवारसे मिलीं महबूबा मुफ्ती !!
दक्षिण कश्मीरके पुलवामा जनपदमें शनिवार, २९ दिसम्बरको सुरक्षाबलोंके साथ मुठभेडमें ‘जैश-ए-मोहम्मद’के चार आतंकवादी मारे गए थे । इस घटनाके पश्चात रविवार, ३० दिसम्बरको जम्मू-कश्मीरकी पूर्व मुख्यमन्त्री और पीडीपी नेता, महबूबा मुफ्ती, मारे गए आतंकवादियोंके परिजनोंसे मिलने पहुंचीं । महबूबा मुफ्तीके इस पगको आगामी मतदानसे जोडकर देखा जा रहा है ।
 महबूबा मुफ्तीने कहा, “यदि कोई आक्रमणकारी है तो उसकी बहनका क्या दोष है ?, उसके साथ बहुत अनुचित हुआ है, उसके वस्त्र उतारे गए हैं, मारपीट की गई है ! कोई त्रिकुटानगरका ‘एसएचओ’ है, कोई भटिंडीका एसएचओ है, उन्होंने बहुत अनुचित किया है । पहले तो आप महिलाको हाथ नहीं लगा सकते हैं, आपके पास महिला पुलिस होनी चाहिए । इसी प्रकार इसके पति और भाईकी अत्यधिक पिटाई की गई है । मैं राज्यपालसे कहना चाहती हूं कि यदि आपका आक्रमणकारियोंके साथ झगडा है तो उनके साथ झगडा कीजिए, परन्तु उनके परिजनों और उनकी बहनके साथ ऐसा नहीं चलेगा ।”
*महबूबाजी, आंतकियोंके परिजनोंको पुलिस या सेनाने ऐसे ही नहीं कुछ कहा या किया होगा, उन्होंने निश्चित ही ऐसा कुछ किया होगा, जिस कारण उनके साथ ऐसा व्यवहार किया गया होगा, या वे मिथ्या वचन भी कर सकते हैं, कृपया सभी तथ्योंकी पडताल करें ! और दुर्जनका साथ देनेवाला प्रत्येक व्यक्ति दुर्जन होता है, यह शास्त्र है, इस आधारपर आतंकियोंका साथ देनेवाले उनके परिजन, चाहे उनकी माता हों या बहन हो, वे राष्ट्रद्रोही ही हैं ! आतंकवादियोंके परिजनोंके साथ आपकी इस सहानुभूतिसे राष्ट्रद्रोहकी दुर्गन्ध आती है ! सत्ता पाने हेतु इस देशके साथ राष्ट्रद्रोह करनेवालेका साथ देना पाप है, यह सामान्य सी बात आप जैसे राजनेताको समझमें क्यों नहीं  आती है ? इतनी बुद्धिभ्रष्टता क्यों ?* – तनुजा ठाकुर



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