उत्तिष्ठ कौन्तेय !


विश्वकी सबसे ऊंची चोटी (शिखर) ‘माउण्ट एवरेस्ट’ बन रहा, विश्वका सबसे ऊंचा कूडेदान !
विश्वकी सबसे ऊंची चोटी (शिखर) ‘माउण्ट एवरेस्ट’पर अब कूडेके ढेर लगने लगे हैं ! यथार्थ यह है कि पर्वतारोहणसे माउण्ट एवरेस्टपर जानेवाले धनी पर्वतारोहियोंकी संख्यामें वृद्धि हो रही है और माना जा रहा है कि पर्वतारोही वहांके पर्यावरणके प्रति बिल्कुल ही संवेदनशून्य हैं । इसके कारण ‘माउण्ट एवरेस्ट’ कचरेके ढेरमें परिवर्तित होता जा रहा है ।
‘माउण्ट एवरेस्ट’के आठ हजार ८४८ मीटर लम्बे मार्गमें पर्वतारोही अपने टेण्ट, व्यर्थ हो चुके उपकरण, खाली गैस सिलिण्डर और यहां तक कि मानवीय अपशिष्ट भी छोड आते हैं !
साथ ही वैश्विक तापमानमें बढोतरीसे पिघल रहे हिमनदोंके साथ-साथ ये कचरे भी उभर कर आ रहे हैं । भले ही कचरा कम करनेके प्रयास किए गए हैं । सागरमाथा प्रदूषण नियन्त्रण समितिके अनुसार वर्ष २०१७  में नेपालके पर्वतारोही लगभग २५ टन कचरा और १५ टन मानवीय अपशिष्ट नीचे लेकर आए थे ! इस मौसममें इससे भी अधिक कचरा नीचे लाया गया है; किन्तु यह प्रत्येक वर्ष वहां जमा होनेवाले कचरेका मात्र अंशमात्र है !
अन्तरिक्ष, महासागर और अब सबसे ऊंचा पर्वत, सब स्थानपर धर्मविहीन भोगी मनुष्योंने ऐसा कचरा फैलाया है कि जिसे स्वच्छ करनेमें पता नहीं कितना समय लगेगा ?, किन्तु इससे यह समझमें आता है कि जो सब स्थान सृष्टिके सृजनके इतने समयसे स्वच्छ और पवित्र था, उसे आजके आधुनिक निधर्मी, स्वार्थी और भोगी व्यक्तियोंने मिलकर मात्र एक शतकमें कितना दूषित कर दिया है और शिवत्वहीन विज्ञान, इस कचरे हेतु सबसे अधिक उत्तरदायी है, जिसके निर्माताओं और शोधकर्ताओं वैज्ञानिकोंने ऐसी वस्तुओंका निर्माण किया जो प्रकृतिके विनाशका नहीं, मानवके विनाशका कारण बन सकती है ! मूढ व्यक्ति जिस वृक्षकी डालपर बैठता है, उसे ही काटता है, अपने लिए कठिनाई उत्पन्न करता है । आजका आधुनिक द्रष्टापनविहीन आधुनिक विज्ञानने ऐसे ही मूढोंको जन्म दिया; इसलिए हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना परम आवश्यक है; क्योंकि तब विज्ञान और वैज्ञानिक दोनों ही धर्मके आधारपर सब करेंगे ! –  तनुजा ठाकुर (१८.६.२०१८)



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