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उत्तिष्ठ कौन्तेय – सिख भाइयों व खालसाको अपमानित करनेका षडयन्त्र !


‘रेफ्रेंडम २०२०’के सम्पर्कमें है दल खालसा, गणतन्त्र दिवसपर राष्ट्रध्वजके स्थानपर खालसायी ध्वज फहरानेकी घोषणा !!
देशमें चल रही राष्ट्रविरोधी गतिविधियोंके मध्य अब एक और विरोधी सुर मुखरित होता दिख रहा है ! अमृतसरमें दल खालसाकी ओरसे घोषणा की गई कि गणतन्त्र दिवसपर संगठनकी ओरसे तिरंगेके स्थानपर ‘खालसायी ध्वज’ फहराया जाएगा ! यद्यपि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यह कहां फहराया जाना है ?
दूसरी ओर यह घोषणा करनेवाले दल खालसाके प्रवक्ताके वक्तव्योंसे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि यह संगठन विदेशी पृथकवादी शक्तियोंसे जोडकर देखे जा रहे ‘रेफ्रेंडम २०२०’के साथ है ।
समाचार माध्यमोंसे मिले दल खालसाके प्रवक्ता कंवलपाल सिंह बिट्‌टूने कहा कि दलकी ओरसे लुधियाना, अमृतसर और होशियारपुरमें यात्राएं निकली जाएंगी और हम देशके ध्वजके स्थानपर खालसायी ध्वज लहराएंगें ! इस मध्य बिट्‌टूने ‘जनमतसंग्रह २०२०’के बारेमें टिप्पणी की कि यह एक ‘एनजीओ’की ओरसे कराया जा रहा सर्वेक्षण है और हो सकता है कि यह उचित भी हो !
यदि संयुक्त राष्ट्र ऐसा जनमतसंग्रह करवाती है तो उसे उचित माना जा सकता है । वैसे भी प्रत्येक प्रश्नका उत्तर ‘हां या ना’में नहीं होता । हम २०२० के प्रबन्धकोंको भी लिखकर भेज चुके हैं कि इसका अभी तक क्या परिणाम निकला और इसका आनेवाले समयमें क्या लाभ होगा ?
“गुरु गोविन्द सिंहजीने हिन्दू धर्म रक्षणार्थ, प्रत्येक हिन्दू घरसे एक पुत्रको (सिंह) लेकर, जिनमें पण्डित बन्दा सिंह बहादुर सदृश वीर भी थे, सिख पन्थ व खालसाकी स्थापना की थी, जिससे किसी हिन्दूपर अत्याचार न हो और वे अत्याचारी मुगलोंके विरुद्ध लड पाए; परन्तु आज राष्ट्रप्रेम व धर्मके मार्गदर्शनके अभावमें सभी दिशाहीन होकर राष्ट्र और हिन्दू धर्मको खोखला कर रहे हैंं । दिशाहीन होने हेतु सर्वप्रथम अंग्रेजोंद्वारा सिखोंको हिन्दुओंसे पृथक किया गया, उसे एक पृथक धर्म बताया गया और पृथकवादी सोचवाले राष्ट्रद्रोहियोंकेद्वारा अब एक भिन्न राष्ट्र और भिन्न ध्वज बनानेका प्रयास किया जा रहा है, इससे ही ज्ञात होता है कि समाजमें राष्ट्रप्रेम, धर्म व सात्विकताका कितना ह्रास हुआ है और विवेकहीन समाजको योग्य मार्गदर्शककी कितनी आवश्यकता है ! सिरपर पवित्र पगडी बांधकर, सभी सिख भाइयोंके मनमें विष भरनेवाले राष्ट्रद्रोही अपनी समीक्षा करें कि क्या खालसा पंथकी स्थापना ऐसे ही उद्देश्योंके लिए की गई थी ?” – तनुजा ठाकुर



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