उत्तिष्ठ कौन्तेय !


एक ओर जहां कश्मीरमें बडी संख्यामें युवा देश विरोधी गतिविधियोंमें लिप्त होकर सुरक्षाबलोंपर आक्रमण करते हैं, वहीं पुंछके गांव सलानीमें स्थिति पूर्णत: विपरीत है ! सलानीको लोग सैनिकोंके गांव रूपमें जानते हैं ।  यहांसे बडी संख्यामें नौजवान सऊदी अरबमें चाकरी (नौकरी) करते हैं; परन्तु अब इस गांवके लोगोंने जम्मू कश्मीरके हुतात्मा सैनिक औरंगजेबके मित्रोंने आतंकवादियोंद्वारा उनकी हत्याका प्रतिशोध लेनेका संकल्प लिया है !
हुतात्मा औरंगजेबके ५० से अधिक मित्र सऊदी अरबसे अपनी मोटी वेतनवाली चाकरी छोडकर वापस लौटे हैं ! इन सबका एक उद्देश है सेना या पुलिसमें भर्ती होकर अपने मित्रकी हत्याका प्रतिशोध लेना ।
मित्रताके अति सुन्दर उदाहरणका हम अभिनन्दन करते हैं और उससे भी अधिक वैधानिक रीतिसे प्रतिशोध लेनेकी पद्धतिका ! ऐसे युवा, देशके गौरव हैं !
क्या अन्य युवा इनसे सीखेंगे, जिनके गांवके युवा आतंकवादियोंसे युद्ध करते हुए हुतात्मा हो जाते हैं । आज भी सेनामें बहुतसे महत्त्वपूर्ण पद रिक्त हैं, यदि अन्य युवा भी इनसे सीख ले लें तो भारतका भविष्य कुछ और होगा ! – तनुजा ठाकुर (६.८.२०१८)



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