उत्तिष्ठ कौन्तेय !


योगीका संविधानसे सम्बन्ध नहीं, उनका कार्य मन्दिरमें घण्टा बजाना : शरद यादवका धर्मद्रोही विषवमन

पूर्व राज्यसभा सांसद व ‘जनता दल यूनाइटेड’के (जदयू) पूर्व नेता और ‘लोकतान्त्रिक जनता दल’ (एलजेडी) नामसे नूतन दल बनानेवाले शरद यादवने कल बाराबंकी भाजपापर तीखे वक्तव्य दिए । कुछ पत्रकारोंसे वार्ता करनेके क्रममें उन्होंने उत्तर प्रदेशके मुख्यमन्त्री योगी आदित्यनाथको लेकर भी ऐसे वक्तव्य दिए जिससे उनका धर्मका ज्ञान कितना खोखला है, वह ज्ञात होता है । उन्होंने कहा कि मुख्यमन्त्री योगी आदित्यनाथपर बोलते हुए कहा कि योगी जैसे संन्यासियोंका कार्य मन्दिरमें घण्टा बजाना है, इन जैसे लोगोंका कार्य मन्दिरमें पूजा करना है, इनका देशके संविधानसे कोई सम्बन्ध नहीं है !
ऐसे दिशाभ्रमित राजनेताओंको हम बताना चाहेंगे कि राजा दशरथकी राजसभामें (दरबारमें) ॠषि वसिष्ठ, महर्षि गौतम, महर्षि वामदेव, जाबाल ॠषि, कश्यप ॠषि, दीर्घायु मार्कण्डेयजी, ॠषि सुयज्ञ, महर्षि कात्यायन आदि अनेक ॠषि-मुनि मन्त्री पदपर विराजमान थे । इन ब्रह्मर्षियोंके साथ पूर्व परम्परागत ॠत्विज भी मन्त्रीका कार्य करते थे तथा सम्पूर्ण राज्यकी व्यवस्था इनके परामर्शसे चलाई जाती थी । वाल्मीकि रामायणमें इसका उल्लेख है; परन्तु आजके कुछ अज्ञानी हिन्दू ही कहते हैं कि संन्यासियों एवं सन्तोंको राजनीतिमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए और धर्म और राजनीति दोनोंको पृथक रखना चाहिए । राजनीतिका प्राण ‘धर्म’ है, धर्मविहीन राजनीति, राज्यकर्ताओंको नीतिशून्य और आदर्शशून्य बनाकर, उन्हें असभ्य समान वर्तन करनेको प्रवृत्त करती है, जो आज इस देशमें हो रहा है !
शरद यादवने भगवान श्रीरामपर भी धर्म द्रोही वक्तव्य करते हुए कहा कि जो जीवित नहीं है, उन्हें हम नहीं मानते ! हिन्दुओ ! ऐसे धर्मद्रोही राजनेताओंको आगामी चुनावमें पाठ पढाएं ! – तनुजा ठाकुर



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