उत्तिष्ठ कौन्तेय !


उत्तर प्रदेशमें मुख्यमन्त्री योगी आदित्यनाथके नेतृत्ववाली भाजपा शासन योगको पाठयक्रममें सम्मिलित करने जा रही है ! उत्तर प्रदेशके उप मुख्यमन्त्री डॉ. दिनेश शर्माने शुक्रवार, १३ जुलाईको पत्रकारोंको बताया कि शासनका मानना है कि योगको शिक्षाका अनिवार्य भाग बनाकर पाठ्यक्रममें सम्मिलित करना चाहिए । डॉ. शर्माने कहा, ‘लोग संशय उत्पन्न करनेका प्रयास करते हैं; परन्तु योग न तो हिन्दुओंका है, न मुसलमानों, सिखों या ईसाइयोंका है, यदि विद्यालयके बच्चे योग करते हैं तो इसमें अनुचित क्या है ? योगके स्वास्थ्य लाभको देखते हुए सभीको इसे करना चाहिए ! यह सम्पूर्ण विश्वमें प्रचलित है और जन कल्याणके लिए हमारे सन्तोंद्वारा प्रदत्त परम्परा है । स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मनके लिए यह सन्तोंसे मिला है !’
माननीय शर्माजी, जब यह हिन्दू सन्तोंद्वारा पदत्त परम्परा है तो यह हिन्दू संस्कृतिका ही अविभाज्य अंग होगा न और इसे तो अब सऊदी अरब जैसे कट्टर मुसलमानी राष्ट्रने स्वीकर कर लिया है; अतः ‘यह न तो हिन्दुओंका है, न मुसलमानों, सिखों या ईसाइयोंका है’, यह कहकर भारतीयकी सनातन योगिक परम्पराका अपमान न करे ! योग, सनातन हिन्दू संस्कृतिकी एक श्रेष्ठतम उपलब्धि है, जिसकी आवश्यकता आज सभीको है, यह कहें ! हिन्दू हैं, आप तो अपने सनातन परम्पराको धर्मनिरपेक्ष नहीं, धर्मसापेक्ष बताएं और इसपर गर्व करें ! योगके प्रवर्तक एवं प्रसारक सभी वैदिक हिन्दू थे और हम उन्हें ऋषि तुल्य मानते हैं, उनकेद्वारा प्रतिपादित शास्त्रको निधर्मी कहकर उनका अपमान न करें, यह नम्र विनती है ! हम हिन्दुओंको ज्ञात है आपको भाजपाके कुछ धर्मनिरपेक्ष नेताओंने योगीजीके तेजस्वी हिन्दुत्ववादी छविके साथ समतोल बनाए रखने हेतु ही आपको सत्ता दी है; किन्तु इसका अर्थ यह नहीं कि आप योगको सनातन धर्मका अंग कहनेसे झिझकें ! जो सत्य है, उसे कहनेमें लज्जा कैसी ? – तनुजा ठाकुर (१७.७.२०१८)



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