त्रिवेन्द्र रावत मन्त्रिमण्डलने, बुधवार ९ अगस्तको ‘धर्म स्वतन्त्रता अधिनियम’को अपनी स्वीकृति दे दी है । राज्यमें बलात (जबरन) धर्म परिवर्तन करानेके प्रकरणमें कोई भी संस्था, व्यक्ति अथवा पुजारी लिप्त पाए गए तो उन्हें दण्डित किया जाएगा ! संस्थाका पंजीकरण निरस्त किया जाएगा ! अहम बात यह भी है कि धर्म परिवर्तनके प्रकरणमें आरोपित व्यक्तिको दोषमुक्त सिद्ध करनेके लिए स्वयं प्रमाण देने होंगे । विवाहके पश्चात धर्म परिवर्तनके प्रकरणमें भी जिलाधिकारीके स्तरपर जांच कर न्यायालयको जानकारी देनेका प्रावधान नियमावलीमें किया गया है । अब धर्म परिवर्तनके इच्छुक व्यक्तिको पहले अपने स्थायी निवास स्थल क्षेत्रके जिला न्यायाधीशको (मजिस्ट्रेटको) पूर्व सूचना देनी होगी । जिलादण्डाधिकारी ऐसी सूचनाओंकी १५ दिनके भीतर जांच कराएगा ।
जितनी द्रुत गतिसे ईसाई मिशनरी और मुसलमान सम्पूर्ण भारतमें धर्मान्तरणका कुचक्र चला रहे हैं, ऐसेमें सम्पूर्ण भारतमें यह विधान (कानून) लागू होना चाहिए । उत्तराखण्ड शासनका यह निर्णय स्वागतयोग्य है । – तनुजा ठाकुर (१०.८.२०१८)
Leave a Reply