उत्तिष्ठ कौन्तेय
नहीं थम रहे हैं बंगालमें लोकतन्त्रको लज्जित करनेवाले घटनाक्रम
बंगालके पंचायत चुनावमें तृणमूल कांग्रेसका विरोध करनेपर एक महिलाको जूतोंकी माला पहनाकर पूरे गांवमें घुमाया गया है ! घटना प्रदेशके मिदनापुर जनपदकी है, जहां तृणमूल कांग्रेसके कार्यकर्ताओंने पीडित महिलाके साथ ऐसा घृणित कृत्य किया है । जहां जनपद स्तरके नेता दोषियोंके विरुद्ध कठोर कार्यवाही करनेकी बात कर रहे हैं, वहीं स्थानीय कार्यकर्ता, अपने दलके विरुद्ध बोलनेवालोंको धमका रहे हैं | पीडित महिलाके पति कांकाबाती ग्राम पंचायतके पूर्व तृणमूल कांग्रेसके सदस्य हैं । महिलाने बागडुबी गांवमें तृणमूल कार्यकर्ताओंद्वारा ‘बूथ कैप्चर’ करनेका विरोध किया था और उनसे कहा था कि वे लोकतान्त्रिक ढंगसे चुनाव लडें ! महिलाका कहना है, ‘इससे उन्हें लगा कि मैं निर्दलीय प्रत्याशीका समर्थन कर रही हूं ।’
इसके पश्चात तृणमूल कांग्रेसके कार्यकर्ताओंने महिलाको गांवमें अपने दलके कार्यालय बुलाया और उसके साथ असभ्य वर्तन कर, उसके गलेमें जूतोंकी माला डालकर पूरे गांवमें घुमाया और उससे कान पकडवाकर उठक-बैठक करवाई गई । भयके कारण, महिलाने पुलिसमें परिवाद प्रविष्ट नहीं कराई है । स्थानीय लोग भी भयके ‘टीएमसी’ कार्यकर्ताओंके इस कुकृत्यका विरोध नहीं कर पाए । यह घटना शुक्रवार, १८ मई दोपहरकी है ।
यह है स्वामी विवेकानन्द, सुभाष चन्द्र बोस और महर्षि अरविन्द जैसे महापुरुषोंकी पुण्य भूमि बंगालकी दुःस्थिति, वैसे इसके लिए हिन्दुओंकी स्वार्थ लोलुपता, सत्तान्धता, अकर्मण्यता और धर्मविमुखता भी उत्तरदायी है। आज लोकतन्त्रके नामपर बंगालमें जो हो रहा है उससे यदि भारतके सभी राज्य शीघ्र सीख नहीं लेते हैं तो यह रावणराज्य शीघ्र ही सम्पूर्ण भारतमें व्याप्त हो जाएगा ! – तनुजा ठाकुर (२३.४.२०१८ )
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