उत्तिष्ठ कौन्तेय


१. उत्तर पूर्वी देहलीमें हुए उपद्रवके पीछे ताहिर हुसैन मुख्य आरोपी है, यह समस्त साक्ष्योंकेद्वारा सिद्ध हो चुका है; किन्तु इस्लामिक एवं वामपन्थी विचारधारावाले प्रसार माध्यमोंने ताहिर हुसैनको निर्दोष बताया है ! इस हेतु उन्होंने एक ‘वीडियो’ जारी किया है, जिसमें वह हिंसाके समय अपने छतपर खडे होकर पुलिसको चलभाषकर शीघ्रतासे आनेकी कह रहे हैं । ‘विडियो’के सामाजिक जालस्थलोंपर आनेके पश्चात ही लोगोंने उसकी सत्यतापर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है ।
     आजके युगमें ऐसे विडियो बना लेना सामान्य सी बात है; किन्तु ताहिर हुसैनके विडियोके अतिरिक्त और भी कई साक्ष्य हैं जिससे उसका उपद्रवी होना स्पष्ट रूपसे सिद्ध होता है इसलिए यदि विडियोको साक्ष्य न भी बनाया जाए तो भी स्पष्ट है किउसने इस उपद्रवमें वह मुख्य आरोपी है शासन उन आधारपर उसे शीघ्र दण्डित करें |
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२. देहलीमें हुए उपद्रवोंसे ज्ञात हुआ है कि शिव विहारमें एक मुसलमान विद्यालयके छतको आधार बनाकर उपद्रव किए गए व हिन्दू विद्यालयको नष्ट करनेके साथ-साथ अनेक हिन्दू घरोंको क्षति पहुंचाई गई । इस विद्यालयकी स्थितिसे ज्ञात होता है कि अनेक दिवसोंसे ऐसे भयावह उपद्रवकी तैयारी हो रही थी और यहां भारी संख्यामें पत्थर व ‘पैट्रोल बमों’का प्रयोग किया गया, जिसे एक दिवसमें एकत्र करना कठिन है । हिन्दुओंने अपनी बहु-बेटियोंको बचानेके लिए उपद्रवियोंके पत्थर ,गोली व पैट्रोल बम सहे ।
    स्पष्ट है कि यदि जिहादियोंके हाथमें यदि विद्यालय भी सौंपा जाए तो वह आतंक हेतु ही प्रयोग किया जाएगा और हिन्दू यदि एकजुट होंगें, तभी वे सुरक्षित रह सकते है ।
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३. देहलीमें हुए उपद्रवोंमें ज्ञात हुआ है कि हिंसाके लिए बोरियोंमें पत्थर रखकर छतोंपर पहुंचानेके लिए वाहनोंकी सहायतासे भट्ठोंसे ईंटें मंगाकर उनके टुकडे किए गए थे ! हिंसाग्रस्त मुस्तफाबाद, करावल नगर, चमन पार्क, शिव विहार सहित अन्य क्षेत्रोंमें हिंसाके एक सप्ताह पूर्वसे ही ईंटोंसे लदे वाहनोंका आना-जाना बढ गया था ।
     इससे ज्ञात होता है कि यह हिंसा एक सोचा-समझा षड्यन्त्र था ! साक्ष्य मिलनेके पश्चात क्या प्रशासन इन जिहादियोंके विरुद्ध कोई कार्यवाही करेगा ?
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४. अखिल भारतीय स्वातन्त्र्यवीर सावरकरजी सम्मेलनमें केन्द्रीय मन्त्री नितिन गडकरीने कहा कि गत पांच सहस्त्र वर्षोंके इतिहासमें ऐसी कोई घटना नहीं हुई कि किसी हिन्दू राजाने कोई मस्जिदको तोडा हो या किसीको तलवार चलानेको विवश किया हो । सावरकरजीका उल्लेख करते हुए गडकरीने कहा, देशमें मुसलमान अल्पमत है, तभीतक लोकतन्त्र है, जैसे ही मुसलमान ५१ प्रतिशत हो जाएंगे तो न लोकतन्त्र, न समाजवाद और न ही धर्मनिरपेक्षता बचेगा ।
    गडकरीजीका कथन सत्य ही है, मुसलमान बहुसंख्यक होते ही उस देशको इस्लामिक देश बना देते हैं, तो क्या भाजपा अब इस देशको हिन्दू राष्ट्र घोषित करेगी मुसलमानोंके जनसंख्याको नियंत्रित करने हेतु कठोर विधान त्वरित पारित करेगी !
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५. देहलीके केजरीवाल शासनने न्यायालयके हस्तक्षेपके पश्चात ‘जेएनयू’से सम्बन्धित देशद्रोहके अभियोगमें कन्हैया कुमार, उमर खालिद सहित १० आरोपियोंके विरुद्ध   अभियोग आरम्भ करनेकी पुलिसके विशेष विभागको स्वीकृति दी है । न्यायालयने इस स्वीकृतिके लिए ‘आप’ शासनको ३ अप्रैल तक ‘स्थिति रिपोर्ट’ प्रविष्ट करनेको कहा था ।
   ‘जेएनयू’में हुई देशद्रोहकी घटनाके ४ वर्ष तक अभियोग आरम्भकी स्वीकृति न देकर तुष्टिकरणकी राजनीति करना एक अति निन्दनीय कृत्य है ! क्या ‘आप’ इसी परिवर्तन हेतु सत्तामें आई थी ?
(०१/०३/२०२०)


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