उत्तिष्ठ कौन्तेय
‘नेटफ्लिक्स’पर भगवान कृष्ण व राधाके नामपर दिखाई गई अश्लीलता
‘नेटफ्लिक्स’ने एक बार पुनः हिन्दुओंकी आस्थापर प्रहार किया है । इस बार ‘नेटफ्लिक्स’के चलचित्र ‘कृष्णा एंड हिज लीला’को लेकर लोगोंमें भारी रोष है । आरोप है कि चलचित्रमें भगवान श्रीकृष्णका उपहास किया गया है । उनके नामवाले एक नटको व्यभिचारी दिखाया गया है ! इस शृङ्खलामें एक कृष्णा नामके युवकके अनेक युवतियोंसे शारीरिक सम्बन्ध होते हैं । इनमेंसे एक युवतीका नाम राधा एवं सत्यभामा भी होता है ।
उल्लेखनीय है कि हिन्दू मान्यताओंके अनुसार, राधा-कृष्णको हमारे समाजमें प्रेमका प्रतीक माना जाता है और भगवान कृष्णकी प्रत्येक लीला भी कोई न कोई जीवन सन्देश देती है ।
बता दें कि इससे पूर्व भी ‘नेटफ्लिक्स’ एवं ‘अमेजन प्राइम’पर हिन्दू घृणित सामग्री दिखानेका आरोप लगा है । ‘पाताल लोक’, ‘सैक्रेड गेम्स’ और ‘लैला’में भी हिन्दू धर्मका अपमान किया गया था ।
‘वेब सीरीज’को भी अब ‘सेंसर बोर्ड’ जैसे केन्द्रीय प्रमाणपत्र प्राधिकरणके क्षेत्राधिकारमें लाया जाना चाहिए, जिससे ऐसे चलचित्रोंपर प्रसार होनेसे पूर्व ही प्रतिबन्ध लग सके और हिन्दुओंको भी एक होना चाहिए, यदि हिन्दू एक होंगे तो हिन्दूद्रोही ऐसे ही भयभीत रहेंगे । साथ ही हिन्दुओंको स्वयं इन माध्यमोंका बहिष्कार भी करना होगा !
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रोहतकमें जिहादी आरिफने की हिन्दू युवती शिवानीकी हत्या
हरियाणाके रोहतकमें एक मुसलमानद्वारा हिन्दू युवती शिवानीकी हत्या कर दी गई ।
आरिफ उसका मित्र था और उससे मिलनेके लिए आया था, यह बात शिवानीने चलभाषपर अपनी बहनको भी बताई थी । पिछले १५ दिनोंमें दोनोंके मध्य, न मिलनेके कारणको लेकर झगडा चल रहा था । आरिफ उसकी हत्या करके, उसका चलभाष लेकर भाग गया । परिवार वालोंने जब घर नहीं पहुंचनेपर सन्देश लिखा तो आरिफने शिवानीके भ्रमणभाष यन्त्रसे लिखकर उत्तर दिया कि वह हरिद्वारसे मंगलवारको लौटेगी । शिवानीकी बहनका मित्र, जो कि वहींपर कार्य करता था, उसे दुर्गन्ध आनेपर और शव देखनेपर सूचित किया । परिजनके परिवादपर हत्याका प्रकरण प्रविष्ट किया गया । शव निरीक्षणके अनुसार उसका कण्ठ दबाकर हत्याकी गई है । भागा हुआ हत्यारा अभीतक बन्दी नहीं बनाया जा सका ।
जिहादीको मित्र बनानेसे यही घटित होता है, पहले वे हाथ बढाते हैं, तदुपरान्त गला दबा देते हैं और जिहादी किसी प्रकार इन हिन्दू नवयुवतियोंको फंसाकर अन्त कर देते हैं । बचपनसे ही धर्म शिक्षण न देनेका परिणाम आज हिन्दू माता-पिता इस प्रकार भोग रहे हैं; अतः हिन्दुओं, अब तो जागो और अपनी पुत्रियोंके रक्षण हेतु सज्ज हों । (३०.०६.२०२०)
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कांग्रेस नेता कपिल सिब्बलने उच्चतम न्यायालयको सबरीमलापर पुनर्विचार न करनेका दिया परामर्श
कांग्रेसके वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बलने न्यायपालिकाकी स्वतन्त्रतापर चिन्ता व्यक्त की । उन्होंने आरोप लगाया कि न्यायालय शासकीय अस्त्र बन गए हैं । उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय प्रसार माध्यम (मीडिया) तथा सामाजिक प्रसार माध्यमको (सोशल मीडिया) नियन्त्रित करे । सबरीमलापर पुनर्विचार करनेमें अपना समय नष्ट न करे ।
वे कह रहे थे कि ‘प्रेस’को अभिव्यक्तिकी स्वतन्त्रता नहीं होनी चाहिए ।
आपातकालमें ‘प्रेस’की स्वतन्त्रता छीननेवाले, आतङ्कियोंके समर्थनमें लडनेवाले, अपने समयमें समाचार वाहिनियोंको नियन्त्रिकर लूट करनेवाले आज हिन्दूद्रोह दिखाते हुए ‘प्रेस’की स्वतन्त्रता छीननेकी बात कर रहे हैं, इसीसे इन बहुरुपियोंका वास्तविक रूप उजागर होता है कि इनका वास्तविक उद्देश्य केवल हिन्दूद्रोह है ।
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कांग्रेस नेताने ‘कोरोना’के लिए भगवान श्रीकृष्णको बताया उत्तरदायी
कांग्रेस नेता सूर्यकान्त धस्मानाने कहा है कि ‘कोरोना’, भगवान श्रीकृष्णकी देन है । वे उत्तराखण्ड प्रदेश कांग्रेस समितिके उपाध्यक्ष हैं ।
धस्मानाने कहा कि कहा कि ‘क’से कृष्ण और ‘क’से ‘कोरोना’ होता है; इसीलिए ‘कोरोना’ भगवान श्रीकृष्णके कारण ही आया है ।
वो चार धाम यात्रा आरम्भ होनेके सम्बन्धमें पूछे गए प्रश्नका उतर दे रहे थे । उन्होंने कहा कि ‘कोरोना’ सङ्क्रमण तीव्रतासे बढ रहा है, इसीलिए इस यात्राको आरम्भ करनेका कोई अर्थ नहीं है । उन्होंने कहा कि चार धाम यात्रा आरम्भ होनेसे उत्तराखण्डमें श्रद्धालुओंकी सङ्ख्या बढ जाएगी और उनके भारी सङ्ख्यामें यहां आनेसे ‘कोरोना’की आपदा और अधिक बढ जाएगी ।
नेता कांग्रेसके हैं तो हिन्दूद्रोही तो होंगे ही; परन्तु सत्ताके जानेसे सम्भवतः विक्षिप्त भी होने लगे हैं, तभी ऐसे निराधार वक्तव्य दे रहे हैं । यदि इनकी मानसिक स्थिति ठीक होती तो इन्होंने चार धाम यात्रासे पूर्व ईदपर दी गई छूटका विरोध किया होता; परन्तु ऐसा नहीं हुआ । दुःख यह है कि आज राजनीतिका स्तर इतना गिर चुका है कि ये लोग राजनीतिक दलोंमें हैं और कहीं न कहीं शासन करनेकी इच्छा रखते हैं ! वैसे कुतर्कपूर्ण वक्तव्य देनेवाले इस नेताको यह स्मरण रखना चाहिए था कि ‘क’से कंस और कांग्रेस भी होता है ।
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राजस्थानके अलवरमें बलात्कार पीडिताके पिताका शव पेडसे लटकता मिला
राजस्थानके अलवरके बालोत नगरमें अपनी छोटी पुत्रीके बलात्कारका अभियोग लड रहे पिताका शव अपनी बडी पुत्रीके विवाहसे पांच दिवस पूर्व वृक्षसे लटकता मिला ! ‘मीडिया’के अनुसार छोटी पुत्रीसे बलात्कारके आरोपी निरन्तर पीडिताके पितापर अपने राजनीतिक संरक्षण और पुलिस प्रशासनके संरक्षणके कारण दबाव बना रहे थे । दबाव इतना अधिक था कि पितासे सहन नहीं हुआ और उन्होंने पेडसे लटककर आत्महत्या कर ली । पिताके इस कार्यसे पहले बलात्कार पीडिताने परिजनकी व्यथाको देखते हुए १८ जूनको कुएंमें कूदकर आत्महत्याका प्रयास किया; परन्तु ग्रामीणोंने उसे देख लिया, जिस कारण उसका जीवन बच पाया । इसके पश्चात आरोपी पक्षके लोगोंने पितापर बडी बेटीके विवाहमें रुकावटकी धमकी देकर दबाव बनाना आरम्भ किया ।
पीडिताने रामगढ थानेमें अनीश, तौफिक और अंजुमके विरोधमें परिवाद प्रविष्ट करवाया था; परन्तु पुलिसने आरोपियोंके विरोधमें परिवाद लिखनेसे मना किया । इसके पश्चात थाना प्रभारीका परिवाद पुलिस अधीक्षकतक पहुंचनेपर अनीशको ‘पोस्को’ अधिनियमके अनुसार बन्दी बनाया गया; किन्तु तौफीक और अंजुमको बन्दी नहीं बनाया गया ।
हिन्दुओ, जिहादियोंके पोषक तथा राष्ट्रद्रोही व हिन्द्रोही कांग्रेसको सत्ता देनेका यही परिणाम है, इसे ध्यानसे देखें और बेटियोंकी रक्षा हेतु बाहर आएं और राजस्थान शासनका मुखर होकर विरोध करें !
(३०.०६.२०२०)
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९० वर्षीय गिलानीका पृथकतावादी ‘फोरम’से त्यागपत्र
हुर्रियत कांफ्रेसके ९० वर्षीय नेता सैयद अली शाह गिलानीने पृथतावादी सङ्गठनोंके ‘फोरम’ हुर्रियत कांफ्रेससे त्यागपत्र दे दिया है । अगस्त, २०१९ में अनुच्छेद-३७० के निरस्त होनेके साथ ही गृहबन्दी किए गए गिलानीने हुर्रियत कांफ्रेससे त्यागपत्र दे दिया है । यद्यपि गिलानीने कहा है कि कुछ ऐसे प्रकरण थे, जिनके कारण उन्हें त्यागपत्र देनेके लिए बाध्य होना पडा ।
सैयद अली शाह गिलानी गत ३० वर्षोंसे जम्मू-कश्मीरमें पृथकतावादियोंमें प्रमुख बने हुए थे । उन्होंने एक सन्देशमें कहा है कि वर्तमान परिस्थितियोंके कारण उन्होंने त्यागपत्र दिया है ।
‘एनडीटीवी’के सूत्रोंका कहना है कि पाकिस्तानमें कई लोग गिलानीसे रुष्ट थे; क्योंकि वो मोदी शासनद्वारा अनुच्छेद-३७० के प्रावधानोंको निरस्त किए जाने और उसे केन्द्र शासित प्रदेशमें परिवर्तित करनेवाले निर्णयके विरुद्ध स्वर मुखर नहीं कर सके ।
जिहादी व आतङ्कवादियोंका पोषण व रक्षण करनेवाला पाकिस्तान वर्तमानमें भारत सरकार व भारतीय सुरक्षा बलोंद्वारा कडी कार्यवाहीसे उद्विग्न है और वह उन सभी पृथकतावादी सङ्गठन, जो उसके लिए निष्क्रिय (नाकारा) हो गए हैं, उनसे वो पीछा छुडा रहा है; परन्तु हमें यह स्मरण रखना चाहिए कि गिलानी सदृश लोग राष्ट्रद्रोही थे, हैं और रहेंगे और ये कठोर दण्डके ही पात्र हैं ! इनपर विश्वास नहीं किया जा सकता है, क्या पता इनका यह त्यागपत्र ही एक ढोङ्ग निकले !
(३०.०६.२०२०)
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राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोगने ‘सीएए’के विरोध प्रदर्शनकी जांचमें जामिया छात्रोंको दोषी पाकर भी दी आर्थिक सहायता
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोगने जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालयमें ‘सीएए’के विरोधमें कथित शान्तिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रोंपर अत्याचार करनेके आरोपमें देहली पुलिसके विरुद्ध समस्त आरोपोंको निरस्त कर दिया है । आयोगने अपने प्रतिवेदनमें छात्रोंको बिना आज्ञाके प्रदर्शन करने व सार्वजनिक सम्पत्तिको क्षतिग्रस्त करनेका आरोपी मानते हुए कहा कि ‘जामिया’के छात्रोंद्वारा किया गया विरोध प्रदर्शन शान्तिपूर्ण नहीं था । आयोगने कमिश्नर (आयुक्त) एसएन श्रीवास्तवको ‘जामिया मिलिया इस्लामिया’ पुस्तकालयके भीतर हुई पुलिस कार्यवाहीकी प्रशासनिक जांच करनेका निर्देश दिया व ‘सीसीटीवी कैमरे’को क्षतिग्रस्त करनेवाले तथा ‘आंसू गैस’के गोलेका प्रयोग करनेवालोंको शीघ्र पकडकर उनपर कार्यवाही करते गम्भीर रूपसे चोटिल हुए छात्रोंको आर्थिक सहायता प्रदान करने हेतु आदेश भी दिया । उल्लेखनीय है कि अधिवक्ता इन्दिरा जयसिंहने भी मानवाधिकारोंके हननका देहली पुलिसपर आरोप लगाते हुए न्यायालयमें इस प्रकरणकी स्वत: संज्ञान लेनेकी विनती की थी ।
सार्वजनिक सम्पत्तिको क्षतिग्रस्त करनेवाले आतङ्की छात्रोंको आर्थिक सहायता प्रदान करना अन्याय है । यदि मानवाधिकार आयोग सभी दोषियोंको आर्थिक सहायता देने लगा तो दोषी भयभीत क्यों होंगे ? और पुलिसका भय कहां रह जाएगा ? मानवाधिकार आयोगका यह निर्णय लज्जाजनक है ! (३०.०६.२०)
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‘जम्मू-कश्मीर डोमिसाइल नियम’को फारूक अब्दुल्लाने बताया अवैध
जम्मू-कश्मीरमें बाहरसे लोगोंको मूल निवासी प्रमाण पत्र (डोमिसाइल सर्टिफिकेट) मिलनेसे पूर्व मुख्यमन्त्री फारूक अब्दुल्ला भडक गए हैं । अब्दुल्लाने कहा कि नूतन नियम अवैध और असंवैधानिक है, इसीलिए जम्मू कश्मीरके लोगोंको ये स्वीकार्य नहीं है तथा उन्होंने इसे माननेसे मना किया ।
उन्होंने कहा कि जब वो बार-बार कहते आ रहे हैं कि वो लोग ऐसा कुछ भी स्वीकार करनेके लिए सज्ज नहीं हैं, जो अवैध और असंवैधानिक हो, ऐसेमें वो ऐसे किसी भी नियमको कैसे स्वीकार कैसे कर सकते हैं ?, जिसके वो विरुद्ध हों । कुछ दिवस पूर्व ही २६ वर्षोंसे सेवा दे रहे नवीन चौधरीको मूल निवासी प्रमाण पत्र दिया गया था, जिससे अब्दुल्ला पिता-पुत्र रुष्ट चल रहे हैं ।
उल्लेखनीय है कि शासनने ऐसा कोई नियम नहीं बनाया है कि कोई भी व्यक्ति नागरिकताके लिए आवेदन कर देगा और वो जम्मू-कश्मीरका नागरिक बन जाएगा । ऐसा इसीलिए; क्योंकि जिन्हें नागरिकता मिली है, वो पहलेसे ही राज्यमें रह रहे हैं । नियमानुसार, जिन्होंने जम्मू-कश्मीरमें १५ वर्ष व्यतीत किए हैं अथवा जो ७ वर्षोंसे अध्ययनरत हैं, उन्हें ही नागरिकता देनेका प्रावधान है ।
क्या अब्दुल्लाको नियम नहीं ज्ञात ? अवश्य ही ज्ञात होगा, तदुपरान्त वे इसका विरोधकर जिहादियोंको भडका रहे हैं । ऐसेमें प्रतीत होता है कि कारावाससे निकले अब्दुल्ला पिता-पुत्र पुनः वहां जानेकी इच्छा रखते हैं और शासनने वह पूर्ण अवश्य करनी चाहिए !
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