उत्तिष्ठ कौन्तेय


१.     रविवार, १ मार्चको ‘द प्रिंट’में कार्यरत वामपन्थी महिला पत्रकार नीरा मजूमदारने  ‘ट्वीटर’पर, देहली उपद्रवके प्रकरणमें निकाली गई शान्ति यात्रामें ‘भारत माताकी जय’ और ‘जय श्रीराम’का उद्घोष करनेवालोंको गुण्डा बताया !
        इससे ज्ञात होता है कि महिला पत्रकारके मनमें सनातन धर्मके प्रति कितना विष भरा हुआ है ! हिन्दुओ !, ऐसे राष्ट्रद्रोही व धर्मद्रोही पत्रकरोंका मुखर होकर विरोध करें !
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२. देहलीमें हिन्दू विरोधी उपद्रवोंमें ‘आप’के पार्षद ताहिर हुसैनका नाम सामने आया; परन्तु उसके रक्षण हेतु ‘आप’के ही विधायक अमानतुल्लाह खानने भीडको सम्बोधित करते हुए एक भी मुसलमानको बन्दी बनानेपर गृहमन्त्रीके घरको घेरनेके लिए कहा !
        केन्द्रमें भाजपा शासन होते हुए भी इस प्रकारके वक्तव्य देनेवालोंके विरुद्ध कार्यवाही नहीं होती और शासन मौन बैठा है तो यह शासन हिन्दुओंकी रक्षा किसप्रकार करेगा ?
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३. शनिवार, २९ फरवरीको अमेरिका और तालिबानके मध्य शान्ति सन्धिपर हस्ताक्षर हुए हैं । उल्लेखनीय है कि भारत आफगानिस्तानमें विकास परियोजनाएं चला रहा है, तो अमेरिकी सेनाके हटनेसे भारतद्वारा किए निवेश, वहां उपस्थित राजदूतों व अन्य लोगोंकी सुरक्षाकी चिन्ता बढ गई है; क्योंकि शान्ति सन्धिसे आफगानिस्तानमें ऐसे क्षेत्र बन जाएंगें, जो शासनके नियन्त्रणमें नहीं होंगें, जो पाकिस्तानद्वारा आतंक प्रसारित करनेके लिए दुरूपयोग किए जा सकते हैं !
          भारतको इस विषयमें सतर्क रहनेकी आवश्यकता है; क्योंकि आतंक वहांसे भारतकी ओर अपने पांव अवश्य पसारेगा और भारतमें रह रहे उनके समर्थक बडा संकट बनकर उभरेंगें; अतः भारत इसपर त्वरित कोई कडा पग उठाए !
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४. ‘सीएए’ और ‘एनआरसी’पर विवादके मध्य मुम्बईके एस्प्लेनेड न्यायालयने मतदाता पहचान पत्रको (वोटर आईडी कार्डको) नागरिकताका पर्याप्त साक्ष्य माना और इसी आधारपर अवैध बांग्लादेशियोंको मुक्त करनेका निर्णय दिया ! उल्लेखनीय है कि मुम्बई पुलिसने २०१७ में अब्बास शेख और राबिया खातूनको पकडा था और अवैध बांग्लानदेशी बताया था ।
        लगभग सभी रोहिंग्या घुसपैठिए  मतदाता पहचान पत्रको बनवाकर रह रहे हैं, तो क्या ऐसेमें शासनद्वारा लाया गया ‘एनआरसी’ केवल वोट बटोरनेका माध्यम है ?; क्योंकि ऐसेमें तो कोई घुसपैठिया देशके बाहर जा ही नहीं पाएगा !
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५. महाराष्ट्रके मालेगांवमें ‘एआइएमआइएम’के विधायक मो.इस्माइलने कहा कि यदि वे शांति बनाए रखना जानते हैं तो यह भी जानते हैं कि ये कैसे जाएगी ? हमने कोई चूडियां नहीं पहनी हैं, हमारा भोलापन है कि हम आज तक मौन हैं ।
       ऐसे जिहादी नेताओंका निर्भीक विष वमन ही देशकी शांतिके लिए संकट बन चुका है और यह हिन्दुओंकी अति उदारवादी मानसिकताका ही परिणाम है !
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६. केरलके ५२ वर्षीय ‘कैथोलिक पादरी’ रॉबिन वडक्कमचेरीको पोप फ्रांसिसने यौन शोषणके आरोपके सिद्ध होनेके पश्चात निकाल दिया है । बच्चोंके लिये कार्य करनेवाली एक ‘चाइल्ड लाइन एजेंसी’ने पादरीके विरुद्ध परिवाद प्रविष्ट करवाई थी । कन्नूरमें गिरिजाघरके अधीन चलनेवाले विद्यालयके प्रबन्धकके पदपर आसीन इस पादरीद्वारा यौन शोषणके पश्चात, ११वीं कक्षाकी छात्राने ७ फरवरी २०१७ में गिरिजाघरद्वारा संचालित चिकित्सालयमें बच्चेको जन्म दिया था । पादरीको दुष्कर्म और यौन उत्पीडनके तीन अभियोगोंमें पहलेही २० वर्षोंकी कारावासका दण्डित किया जा चुका है।
       धर्मांतरणके कार्योमें लगे ये गिरिजाघर सदैवसे ही अनैतिक कार्योंके केन्द्र रहे हैं  अब इनके पापका घडा भर जानेके कारण आये दिन इस प्रकारके समाचार उजागर हो रहे हैं; किन्तु हिन्दू विरोधी ‘मीडिया’द्वारा इनके अपराधोंको छुपानेका भरसक प्रयास किया जाता है !
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७. तमिलनाडुके मद्रास उच्च न्यायालयमें अधिवक्ता व ‘सूचनाका अधिकार’के कार्यकर्ता राजेन्द्रनने याचिका प्रविष्टकर तमिलनाडु ‘पुलिस’ व राज्यके हिन्दू धर्मनिधि विभागकी अवैध कृतियोंको उजागर किया है, जिसके अन्तर्गत तमिलनाडुके प्राचीन मन्दिरोंमें हुई प्रतिमाओं व कलाकृतियोंकी चोरीसे सम्बन्धित ४१ से अधिक अभियोगकी पुस्तिकाओंको लापता दिखाया गया है ! कार्यकर्ताने कहा कि ‘डीएमके’ और ‘एआइडीएमके’के नेता प्रतिमाओंकी चोरीके प्रकरणमें सम्मिलित हैं और पुलिस उनपर कार्यवाही नहीं करना चाहती है !
          निधर्मी ‘डीएमके’ आदि राजनीतिक दल तमिलनाडुमें हिन्दू धर्मके प्रति घृणा उत्पन्नकर ईसाईयतको बढावा दे रहे हैं और हिन्दू मन्दिरोंको क्षति पहुंचा रहे हैं, उन्हें केवल लूटका सामान समझते हैं ! अब केवल हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना ही वहां हिन्दू धर्म व मन्दिरोंकी स्थितिको ठीक कर सकता है ।
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८. कर्नाटकके कुलबर्गीमें रविवार १ मार्चको एक घरकी भीतपर ‘पाकिस्तान जिन्दाबाद’के उद्घोष और प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदीके विरुद्घ टिप्पणी लिखनेका प्रकरण सामने आया, जिससे क्षेत्रमें तनाव व्याप्त हो गया ! पुलिसने इन शब्दोंको मिटा दिया और जांचमें लगी है । उल्लेखनीय है कि कुछ दिवस पूर्व हुबलीमें एक नासकीय विद्यालयकी भीतपर भी पाकिस्तान जिन्दाबाद लिखा पाया गया था और हुबलीमें ही एक अभियान्त्रिकी (इंजीनियरिंग) महाविद्यालयमें पढनेवाले तीन छात्रोंको पाकिस्तान समर्थनके उद्घोष करनेपर राजद्रोहके आरोपमें बन्दी बनाया गया था !
          भारतमें आश्रय पा रहे ये पाकिस्तानी आतंकवादी हमारी कथित उदारता व  ‘कम्पयूटर’ देकर इन्हें शिक्षित करनेका ही प्रतिसाद है, जो आए दिन सामने आ रहा है, जिसे हम जितना शीघ्र समझेंगें तो यह भारतके लिए ही उचित होगा !
(०३/०३/२०२०)


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