उत्तिष्ठ कौन्तेय


 मृत पशुओंके चर्मके भीतर छुपाकर की जा रही बछडेकी तस्करी, सीमा सुरक्षा बलने बचाया
         बंगालमें भारत-बांग्लादेश सीमापर ‘बीएसएफ’की कडी दृष्टिके चलते जब पशु तस्करी नहीं हो रही तो अब तस्कर घृणित ढङ्गसे सीमाको लांघ रहे हैं ।
    ‘बीएसएफ’के दक्षिण बंगालके सैनिकोंने अब मालदा जनपदसे तस्करोंका एक ऐसा ही घृणित कृत्य उजागर किया है, जिसमें मृत पशुओंके शवके भीतर एक बछडेको छुपाकर नदीके मार्गसे बांग्लादेशमें तस्करीकर ले जाया जा रहा था । सैनिक नावको उस ओर ले गए और निकट जाकर देखा कि एक मृत पशुके शवके भीतर कुछ बंधा हुआ था । इसके साथ जलकुम्भी भी बंधी हुई थी । इसके अतिरिक्त केलेके पेडका तना भी बंधा हुआ था ।
    सैनिकोंने पाया कि शवके एक छेदसे किसी पशुकी नाक बाहर दिखाई दे रही थी । जब इसे खोला गया तो उसके भीतरसे एक जीवित बछडा निकाला गया, जिसकी टांगे और आंख रस्सी तथा वस्त्रसे बांध रखी थी । सीमा प्रहरियोंने तुरन्त बछडेको बाहर निकालकर उसका बचाव किया । बन्दी बनाए गए तस्करोंका अभिज्ञान मेहर सैफुल हक, रफीकुल इस्लाम, रफीकुल इस्लाम, सफीदुर इस्लाम, मोहम्मद आफ्टर अली और नूरुद्दीनके रूपमें हुआ ।
             रोहिङ्गया जिहादी गोमाताको पकडकर अमानवीय ढङ्गसे देश व विदेशके पशु वधगृहमें मारनेके लिए भेज रहे हैं और वह भी हिन्दुओंके देश भारतसे, यह हम सभीके लिए लज्जाका विषय है ।   हिन्दुओ, शासनसे मांग करें कि रोहिङ्ग्याओंको बाहर फेंके और गोहत्यारोंको मृत्युदण्ड दें ! स्मरण रखे, जब तक आप मौन रहेंगे, शासकगण कुछ नहीं करेंगे ! (०१.०७.२०२०)
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इस्लामाबादमें बन रहे मन्दिरपर जिहादियोंने उगला विष
    पाकिस्तानके इस्लामाबादमें हिन्दुओंके लिए मन्दिर बनाए जानेको लेकर मौलवी हिन्दुओंके विरुद्ध व उनके धार्मिक स्थलोंके विरुद्ध विष उगल रहे हैं । ‘सोशल मीडिया’पर एक ‘वीडियो’में मौलवी कह रहा है कि इस्लाममें ‘काफिरों’के लिए उनका इबादतखाना (मन्दिर) नहीं बनाया जा सकता तो कैसे इस्लामाबादमें मन्दिर बनानेकी घोषणा की गई ? हम इस निर्णयको जूतीके तलवेके ऊपर रखते हैं । वो इस्लामाबाद, जिसे इस्लामके नामपर बनाया गया, उसके भीतर ये लोग मन्दिर बनाना चाहते हैं । पहले पाकिस्तानके भीतर गुरुद्वारे बनाए गए, आज मन्दिर बनाना चाहते हैं ।
        मौलवी अपने भाषणमें मस्जिदमें राजा रणजीत सिंहकी मूर्ति लगानेको लेकर भी प्रश्न करता है और उनका उल्लेख करते हुए कहता है कि ऐसा करके इस्लामका ‘जनाजा’ निकाला गया । ‘काफिरों’के लिए कोई भी मन्दिर बनवानेकी आज्ञा इस्लाम नहीं देता ।
       मौलवी नामक प्रजाति पाकिस्तान ही नहीं, सभी देशोंमें ही विष घोलने और लोगोंको लडानेका काम करती हैं । मन्दिरोंपर तो इनकी अनेक शताब्दियोंसे ही बुरी दृष्टि है । विश्वकी शान्तिके लिए इस प्रजातिका अन्त होना आवश्यक है । पाकिस्तान इन्हें कुछ कहेगा नहीं; अतः पाकिस्तानका ही अन्त आवश्यक है ।
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मन्दिरमें दण्डवत करते दिखे ‘सीजेआई’ बोबडे तो भडके इस्लामिक कट्टरपन्थी
      भारतके मुख्य न्यायाधीश ‘एसए’ बोबडेका एक चित्र सोमवार, २८ जूनको पूरे दिवस ‘ट्विटर’पर प्रसारित होता रहा, जिसमें वो एक ‘हार्ले डेविडसन’ मोटरसाइकिलपर बैठे दिख रहे हैं । चित्रमें मोटरसाइकिलका ‘स्टैंड’ लगा हुआ है, जिससे ज्ञात होता है कि वो केवल चित्र खींच रहे थे । प्रशान्त भूषणने कहा कि ‘सीजेआई’ ५० लाखकी मोटरसाइकिल चला रहे हैं, जो एक भाजपा नेताकी है, जबकि ‘द न्यू इंडियन एक्सप्रेस’के अनुसार, लोगोंका कहना है कि ‘सीजेआई’को तो उस मोटरसाइकिलके स्वामी तकके बारेमें भी कुछ ज्ञात था ।
      वहीं उनका एक मन्दिरमें भी चित्र प्रसारित हुआ, जिसमें वे दण्डवत प्रणाम कर रहे थे, जिसके पश्चात वामपन्थी व कट्टरपन्थी कह रहे हैं कि क्या एक लोकतान्त्रिक देशके मुख्य न्यायाधीशका इस प्रकारसे अपनी आस्था प्रकट करना उचित है ? सैयद उस्मान नामक जिहादीने उनका ‘वीडियो’ साझा करके पूछा कि ‘पहचानिए कौन’ ? एक दक्षिण भारतीय ‘ट्विटर हैंडल’ने लिखा कि यदि किसी मुसलमान न्यायाधीशने मस्जिदमें ‘नमाज’ पढी होती और उस चित्रको प्रसारितकर हिन्दू प्रश्न करने लगते तो इस देशका ‘सेकुलरिज्म’ सङ्कटमें आ जाता ।
     धर्मनिरपेक्षता व हिन्दूद्रोहका पागलपन बुद्धिपर इस प्रकार आवेषित हो गया है कि प्रशान्त भूषण सदृश अधिवक्ता भी झूठ प्रसारित कर रहे हैं और वामपन्थी उनके मन्दिरमें सिर झुकानेपर विषवमन कर रहे हैं, जिनके अनुसार न्यायाधीशको मन्दिरमें सिर नहीं झुकाना चाहिए; क्योंकि उससे भारतकी धर्मनिरपेक्षता सङ्कटमें आ जाती है और वहीं ‘मौलाना’ मस्जिदोंसे ‘फतवे’ जारी कर सकते हैं, इस्लामके अनुसार किसीको भी दोषी व निर्दोष सिद्ध कर सकते हैं ! हिन्दुओ आज आवश्यकता है कि कोई भी इन तथाकथित आलोचनासे भयभीत न हो और सार्वजनिक ढङ्गसे अपनी आस्थाको व्यक्त करें ! गर्वसे कहें कि हम हिन्दू हैं !
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करिश्मा भोंसलेको मस्जिदके ध्वनिप्रसारक यन्त्रोंके स्वरको न्यून करनेके लिए कहनेपर मुम्बई पुलिसका ‘नोटिस’
      मुम्बईमें मानखुर्दमें रहनेवाली करिश्मा एवं उसकी मां वर्षा गणेश भोंसलेको ‘नूरी इलाही सुन्नी वेलफेयर एसोसिएशन’की मस्जिदमें जाकर वहांके अधिकारियोंसे ध्वनिप्रसारक यन्त्रोंका स्वर अल्प करनेके लिए कहना भारी पड गया, महाराष्ट्रके महाविकास अघाडी शासनके अन्तर्गत आनेवाली मुम्बई पुलिसने उन्हें ‘नोटिस’ दे दिया है, जिसमें कहा गया है कि इस प्रकारके कृत्य क्षेत्रमें वैधानिक व्यवस्थाकी स्थितिके लिए सङ्कट उत्पन्न करती हैं । उन्हें मस्जिद न जाकर पुलिसके पास परिवाद करना चाहिए था । उल्लेखनीय है कि करिश्मा भोंसलेके घरके पास ही मस्जिदके ध्वनिप्रसारक यन्त्र लगे हैं; इसलिए वे ध्वनि कम करनेका अनुरोध लेकर मस्जिद गईं; परन्तु मस्जिदके पासके जिहादियोंने करिश्मा और उनकी मांको धमकाया तथा हाथापाई भी की । स्थानीय विधायकसे  सहायता मांगनेपर उसने घर परिवर्तित करनेका परामर्श दिया गया । करिश्मा और उनकी मांके विरुद्ध धारा १८८ व १४९ लगाकर परिवाद प्रविष्ट करनेको कहा गया है ।
      कांग्रेसके कन्धोंपर चढकर तुष्टीकरणका राग आलापनेवाले ठाकरे शासनसे हिन्दुओंको कोई आशा नहीं रखनी चाहिए, वरन ऐसी स्थितिमें सभी हिन्दुओंको एक होकर करिश्मा सदृश हिन्दू महिलाओंका साथ देना चाहिए । (२०.०६.२०)
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 उत्तर प्रदेश कांग्रेस अल्पसङ्ख्यक प्रकोष्ठके अध्यक्ष शाहनवाज आलमको ‘सीएए’ उपद्रवमें दोषी पाए जानेपर बनाया गया बन्दी
       उत्तर प्रदेश कांग्रेस अल्पसङ्ख्यक प्रकोष्ठके अध्यक्ष शाहनवाज आलमको २९ जूनकी रात्रिमें बन्दी बनाए जानेके पश्चात कांग्रेस कार्यकर्ता भडक गए तथा हजरतगंज थानेका घेरावकर अशान्ति उत्पन्न करने लगे; पुलिसने उनको समझानेका अत्यधिक प्रयास किया; परन्तु वे नहीं माने तो पुलिसको लाठियोंका प्रयोग करना पडा । दिसम्बर २०१९ में नागरिकता संशोधन विधेयकके विरोधमें हुए उपद्रवमें दोषी पाए जानेपर उत्तर प्रदेश पुलिसकी दृष्टि शहनवाजपर तभीसे थी; परन्तु साक्ष्योंका अभाव होनेके कारण वह सदैव बचा हुआ था । शाहनवाजको प्रियंका गांधीका निकटतम माना जाता है; अतः इस कार्यवाहीपर प्रियंका गांधीने सामाजिक जालस्थल ‘ट्विटर’पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश शासन जनताकी समस्याओंको दबाने हेतु प्रयासरत है; परन्तु कांग्रेस ऐसे प्रकरणोंको सभीके समक्ष लाने हेतु प्रतिबद्ध है ।
      उपद्रवियोंको भी बचाने हेतु कांग्रेस राजनेता किस प्रकार तत्पर रहते हैं ?, यह समाचार यही स्पष्ट करता है । प्रियंका गांधी जब जिहादीका बचाव कर रही हैं तो यह क्यों न कहा जाए कि इन उपद्रवमें कांग्रेसका सीधा योगदान था । सभी देशवासी कांग्रेससे इसका उत्तर मांगे !  (०१.०७.२०)
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मुसलमान न बननेपर, अग्निमें मूत्र न करनेपर कर दी गई हिन्दूकी हत्या
     हरियाणाके मेवातमें मुसलमानोंने एक बडी आयुके हिन्दूकी हत्या कर दी । मुसलमान बहुल जनसङ्ख्यावाले इस क्षेत्रमें जिहादियोंने हत्याके पश्चात उस हिन्दूका अधजला शव खेतोंमें फेंक दिया । प्रातःकाल चाय लेकर खेतमें जानेपर उसके पुत्र मुकेशने पिताको मृत पाया । पुलिसमें परिवाद करनेपर भी उसीकी प्रताडना की गई । पुलिसने रामजीलालकी मृत्यु आकाशसे बिजली गिरनेसे बताई और मुकेशको झूठा कहकर भगा दिया । किसी भी अपराधीको आजतक बन्दी नहीं बनाया गया है । हताश होकर उसे परिवार सहित गांव त्यागना पडा, जबकि वहांपर उनकी तीन एकड खेतीकी भूमि भी है । बिछोर गांवके निवासी मुकेशके अनुसार खेतीमें उपजी फसलको मुसलमान बलपूर्वक काटकर ले जाते हैं । यह विवरण वहांके पूर्व न्यायाधीश पवन कुमारके चार सदस्योंवाले प्रतिनिधि मण्डलने भी दिया है कि मेवातके ५०० गांवोंमेंसे १०३ गांव पूर्णतः मुस्लिम हो चुके हैं और शेष ८४ गांवोंमें चार या पांच हिन्दुओंके परिवार रह गए हैं ।
    मुस्लिम जिहादी अधिक बच्चे उत्पन्नकर तथा धर्मान्तरणके माध्यमसे अपनी जनसङ्ख्या बढाकर बहुसङ्ख्यक होते जा रहे हैं और हिन्दुओंकी सम्पतियोंपर अधिकार करते जा रहे हैं । शासन भी आंखे मूंदकर अथवा भयसे उनके विरुद्ध कुछ नहीं कर रहा । अब हिन्दुओंको सङ्गठित होकर ही ऐसे प्रकरणका सतर्क होकर विरोध करना होना चाहिए और हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना करने हेतु कृतिशील होना चाहिए; अन्यथा भारतमें भी पाकिस्तान जैसी दशा हो सकती है ।  (३०.०६ २०२०)
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‘द वायर’ नामक संस्थानकी आरफा मनोज वाजपेयीके मुखसे अपने शब्द न बुलवा सकी
              पत्रकार आरफा शेरवानी ‘द वायर’ नामक संस्थानमें कार्यरत है । वह मनोज वाजपेयीका साक्षात्कार लेने गई । उसकी इच्छा थी कि वह मनोज वाजपेयीसे ‘सङ्कटमें लोकतन्त्र’, ‘भारतमें लोकतन्त्र रहेगा अथवा नहीं’, जैसे वाक्य उनके मुखसे सुने; परन्तु मनोज उसकी बातोंमें नहीं आए । उन्होंने कहा कि भारतमें लोकतन्त्र सुरक्षित है । अधिक बोलनेपर मनोजने कहा कि प्रत्येक ५ वर्षमें चुनाव होते हैं । उन्हें समस्या हो तो वे अगली बार चुनावमें प्रत्याशी बनें !
     आरफाने पुनः प्रयास करते हुए कहा कि कलाकार राजनीतिपर नहीं बोलते; क्योंकि ऐसा करनेसे उन्हें चलचित्रमें कार्य नहीं मिलेगा; परन्तु मनोजने कहा, “उन्हें ऐसा नहीं लगता ।” तब आरफाने उन्हें ‘पद्मावत’को लेकर प्रश्न किया । इसपर मनोजने पूछा कि क्या ‘मुगलेआजम’ सत्यके निकट थी ? अन्तमें उन्होंने उसे प्रश्न पूछे बिना ही ‘उरी’के विषयमें बताया । आरफाके जैसे दुखती रगपर लवण लगा दिया हो; क्योंकि ‘द वायर’ने ‘उरी’को विषभरी अतिदेशभक्तिपूर्ण बताया था ।
      आज देशके कुछ पत्रकार देशद्रोही मानसिकतायुक्त हैं । ऐसे ही समूहसे है, आरफा । इनपर भी अभिव्यक्तिकी स्वतन्त्रताकी एक सीमा निश्चित होनी चाहिए ।


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