उत्तिष्ठ कौन्तेय


१. बंगालकी मुख्यमन्त्री ममता बनर्जीने बंगालमें रह रहे बांग्लादेशियोंको आश्वासन दिया है कि वो सभी भारतीय नागरिक हैं ! उन्होंने मंगलवार, ३ फरवरीको कहा कि जो भी बांग्लादेशी बंगालमें रह रहे हैं और जिन्होंने भी चुनावोंमें मतदान किया है, वो सभी भारतीय नागरिक हैं और नागरिकता पानेके लिए उन्हें कागद (कागज) दिखानेकी कोई आवश्यकता नहीं है !
        भारत देशके किसी भी राज्यके मुख्यमन्त्रीद्वारा ऐसा वक्तव्य देना ही राष्ट्रद्रोह है और यह राष्ट्रीय सुरक्षापर बडा संकट आनेवाला है, यह दर्शाता है । उच्चतम न्यायालय व केंद्र शासन इसमें हस्तक्षेप करके बंगाल शासनको निरस्त करे, यह न्यायालय व शासन दोनोंका ही कर्त्तव्य है !
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२. अन्तर्राष्ट्रीय ‘मीडिया पोर्टल’ ‘अलजजीरा’ और ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’पर देहली उपद्रवमें हिन्दुओंके विरुद्ध घृणित व झूठे समाचार चलानेके प्रकरणमें तथा देशके मानचित्रके साथ भी छेडछाड करनेके प्रकरणमें ‘कलिंगा राइट्स फोरम’के राष्ट्रीय संयोजक जेपी नबजीबनने देहलीकी अपराध शाखामें परिवाद प्रविष्ट कराई है । उन्होंने कहा कि इसकेद्वारा चलाए घृणा प्रसारित करनेके झूठे समाचारोंसे अरब क्षेत्रमें रह रहे हिन्दुओंको संकट है !
        केन्द्र शासनने इन पोर्टलके देशोंके शासनसे सम्पर्ककर इनके विरुद्ध कठोर कार्यवाही करनी चाहिए, जिससे वहां रह रहे हिन्दू भाई-बहन सुरक्षित रहें !
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३. कोलकाताके नेताजी सुभाषचन्द्र बोस अन्तर्राष्ट्रीय विमानतलपर (हवाईअड्डेपर), कुछ माह पूर्व बांग्लादेशसे भारत आईं, दो मुसलमान महिलाओं, रुखसाना अख्तर और तस्लीमाको, रीना और तान्या नामसे बने फर्जी पारपत्रके (पासपोर्टके) साथ बन्दी बनाया गया है ! ये दोनों विदेश भागनेवाली थीं ! पारपत्रमें इनका निवास स्थल सीमासे लगा उत्तर २४ परगना जनपद बताया गया है, साथ ही इनके साथ और भी रोहिंग्या हैं !
      इनका फर्जी नामसे पारपत्र किसने बनवाया ? यह अवश्य ही चिन्ताजनक है । एक ओर मुम्बईका न्यायालय मतदाता-पत्रको ही नागरिकता हेतु पर्याप्त बता रहा है तो वहीं ममता बनर्जी बंगालमें रहनेवाले रोहिंग्याओंको भारतीय मान रही हैं ! देश बडे संकटकी ओर बढे, इससे पूर्व केन्द्र कडे पग उठाए !
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४. कर्नाटकमें बेंगलुरु जनपदके ग्रामीण क्षेत्रमें एक पहाडीसे ईसा मसीहकी बारह फीट ऊंची विवादित प्रतिमाको स्थानीय अधिकारियोंने पुलिस सुरक्षामें हटाया है ! उल्लेखनीय है कि यह निर्णय बजरंग दल व हिन्दू रक्षा दलके पहाडीपर अतिक्रमणकर प्रतिमा स्थापित करने व बलपूर्वक धर्मान्तरण करनेका विरोधके प्रकरणमें लिया गया !
       इसमें कोई आश्चर्य नहीं है कि ईसाई अपने प्रसार हेतु सदैव षडयन्त्र करने हेतु तत्पर रहते हैं और ईसाई तुष्टिकरणमें सिद्ध शासनसे संरक्षण पाकर मिशनरियां इसकेद्वारा बृहद स्तरपर धर्मपरिवर्तन करनेका षडयन्त्र ही कर रही थीं; परन्तु येदियुरप्पा शासनका यह प्रखर निर्णय प्रशंसनीय व अभिनन्दनके योग्य है !
(०५/०३/२०२०)


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