उत्तिष्ठ कौन्तेय
सोपोरमें हुए आतङ्की आक्रमणपर बालकका चित्र उजागर करनेपर ‘एमनेस्टी’ने कश्मीर पुलिस लगाया विधानके उल्लङ्घनका आरोप
‘एमनेस्टी इंडिया’ नामक ‘एनजीओ’ने जम्मू-कश्मीर पुलिसको सोपोरमें हुए आतङ्की आक्रमणके पश्चात तीन वर्षीय बालकका चित्र ‘सोशल मीडिया’पर दिखाए जानेको लेकर एक ‘ट्वीट’ किया और दर्शाया कि बच्चेकी ‘पहचान’ उजागर करके कश्मीर पुलिसने ‘अनुच्छेद ७४ जुवेनाइल जस्टिस (केयर एंड प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन) एक्ट २०१५’का उल्लङ्घन किया है; किन्तु लोगोंने ‘एमनेस्टी इंडिया’द्वारा समय-समयपर ‘प्रोपगेंडा’ चलानेके लिए इन्हीं विधानका उल्लङ्घन कर चुके छायाचित्रोंके पटलचित्र (स्क्रीन शॉट) डालकर ‘एमनेस्टी’का वास्तविक रूप उजागर किया, जिसके अन्तर्गत एक ओर तो ये ‘एनजीओ’ पुलिसको विधानकी बातें पढा रही है, वहीं दूसरी ओर एक १९ माहकी बच्चीकी ‘पहचान’ उसके नामके साथ दिखा रही है ।
‘एमनेस्टी इंडिया’ जैसे संस्थान, जो किसी भी झूठको भयानक रूपमें दिखाता है और जो कश्मीरके सम्बन्धमें अपना ‘प्रोपगेंडा’ फैलाकर कश्मीरके प्रकरणको वैश्विक पटलपर ले जानेकी चेष्टाकर देशद्रोही गतिविधियोंमें लिप्त हो, उसे केन्द्र शासन कार्यवाहीकर बन्द करे, जिससे ये अपना प्रपञ्च और अधिक न फैला सके ! (२.०७.२०)
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देहली उपद्रवके लिए सऊदी अरबसे आया था धन, विशेष विभागकी जांचमें हुआ उजागर
देहली पुलिसने न्यायालयमें प्रस्तुत जांच ब्यौरेमें कहा है कि पूर्वोत्तर देहलीमें हुए उपद्रवके लिए सउदी अरब और देशके भिन्न-भिन्न भागोंसे भी धन आया था ! पुलिसका कहना है कि देहलीमें उपद्रव सुनियोजित षड्यन्त्र और योजनाके परिणामस्वरूप भडके थे और यह एकाएक नहीं था । देहली पुलिसने एक स्थानीय न्यायालयको बताया था कि साक्ष्योंसे पूछताछसे यह ज्ञात हुआ कि देहली उपद्रवमें आरोपी शिफा उर रहमानको मध्य पूर्वके देशोंमें स्थित ‘जामिया मिलिया इस्लामिया’के पूर्व छात्र संघके सदस्योंसे धन मिला था ! रहमानका नाम इशरत जहां, गुल्फीशा खातून, सफूरा जरगरके साथ-साथ खालिद सैफी, मीरान हैदर और ताहिर हुसैनसे पूछताछके समय सामने आया ।
जिस प्रकार देहलीमें व देशके विभिन्न भागोंमें उपद्रव हुए, उससे वह प्रथम दिवससे ही विदित था कि यह राजनीतिक दलोंकी संलिप्तता और विदेशी धनके बिना सम्भव नहीं था । आशा है कि पुलिस अभियोग पत्रको परिपक्व साक्ष्योंके साथ प्रस्तुत करेगी एवं कोई भी जिहादी, मध्यस्थ ‘एनजीओ’ और सम्मिलित राजनीतिक दल बचने न पाए, शासन यह भी सुनिश्चित करे !
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‘सीएए’ उपद्रवमें हिंसाके ५७ आरोपियोंसे योगी शासन करेगा हानिकी आपूर्ति
गत वर्ष दिसम्बर माहमें ‘सीएए-एनआरसी’के विरोधमें हिंसा करनेवाले धर्मान्धोंसे योगी शासनने दण्डराशि लेनेका आदेश दिया है । ५७ मेंसे ५ लोगोंसे १ कोटि ५४ लाखकी आपूर्ति की गई । नफीस अहमद नामक धर्मान्धपर शासकीय सम्पत्तिको हुई हानिका ६४ लाख ३५ सहस्र रुपए दण्डस्वरूप लेने थे । प्रशासनद्वारा दी अधिसूचनाके (नोटिसके) पश्चित भी धनराशि न देनेपर प्रशासनने उसकी ‘दुकान’ बन्द कर दी । ‘तहसीलदार’ शंभू शरण सिंहने बताया कि ‘सीएए’ विरोधी प्रदर्शनोंके विषयमे ५७ लोगोंके विरुद्ध दण्डराशि भरने सूचना जारी की गई थी । मार्चमें प्रशासनने इन सबके छायाचित्र नगरके चौराहोंपर लगवाए थे; परन्तु ‘कोरोना’ महामारीके कारण इलाहाबाद उच्च न्यायालयके सुझावपर लखनऊ प्रशासनने २० मार्चको इस प्रक्रियापर अस्थाई रूपसे स्थगित किया था ।
योगी शासन इस हेतु प्रशंसाका पात्र है । अन्य जिहादी पोषक शासगशकगण भी इससे बोध ले और दोषी जिहादियोंको दण्डित करे ! (०३.०७.२०२०)
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भारतमें अशान्ति फैलाने हेतु चीन ले रहा है आतङ्कियोंका आश्रय, म्यांमारकी ‘अराकान सेना’को दे रहा धन और शस्त्र
भारतमें अशान्ति प्रसारित करनेके लिए चीन अब आतङ्कवादियोंका आश्रय ले रहा है । स्थानीय लाइसस (licas) समाचारके अनुसार, चीन म्यांमारके आतङ्की सङ्गठनोंको धन और अत्याधुनिक शस्त्र दे रहा है । इसके अतिरिक्त जम्मू-कश्मीरमें हिंसा फैलानेके लिए पाकके आतङ्की सङ्गठन अल बद्रको सक्रिय करना भी उसका लक्ष्य है । चीनके द्वारा आतङ्कवादी समूह ‘अराकान सेना’की सहायता की जा रही है । स्वयं दक्षिण-पूर्व एशियाकी जानकारी रखनेवाले एक सैन्य सूत्रने इसकी पुष्टि की है । उन्होंने बताया कहा कि चीन अराकान सेनाके व्ययका लगभग ९५ प्रतिशत तक दे रहा है । उन्होंने कहा कि अराकान सेनाके पास लगभग ५० ‘MANPADS’ (मैन-पोर्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम) अर्थात ‘सतहसे हवा’में मार करनेवाली ‘मिसाइलें’ हैं
चीन चाहता है कि म्यांमार और भारतके मध्य उसी प्रकार वैर-विरोध और शत्रुता उत्पन्न हो, जिस प्रकार भारत और पाकिस्तानके मध्य है । ऑस्ट्रेलियाके बुद्धिजीवियोंके अनुसार चीन विस्तारवादकी संरचना कर रहा है ।
चीनकी इस प्रकारकी दुष्टताको नष्ट करनेके लिए सभी देशोंको एक साथ आगे आना होगा और भारतको अपने व्यापारको पूर्णतः समाप्त करना होगा, चाहे वह कितनी गीदड भभकी दे ! प्रखर कूटनीतिसे लडना ही अब इस समस्याका समाधान है । (०३.०७.२०२०)
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इस्लामाबादमें प्रथम मन्दिरके निर्माणपर उग्र कट्टरपन्थी, इमरान शासनने लगाई रोक
पाकिस्तानमें इमरान शासनद्वारा इस्लामाबादमें शासकीय अनुदानसे कृष्ण मन्दिर बनवाया जाना था, जो कट्टरपन्थियोंको रास नहीं आया । इसमें इमरान खानकके शासनने भी दस कोटि रुपएका योगदान दे रहा था; किन्तु जामिया अशर्फियाकी लाहौर ईकाईके मुखिया मुफ्ती जियाउद्दीनने मन्दिर निर्माणके विरुद्ध यह कहते हुए फतवा निकाल दिया कि शासनको केवल अल्पसङ्ख्यक समुदायके धार्मिक स्थलोंके जीर्णोद्धारके लिए शासकीय कोषसे धन व्यय करनेका अधिकार है, न कि हिन्दुओंके नूतन धार्मिक स्थलोंके निर्माणके लिए । शासकीय कोषमें लोगोंके करका (टैक्सका) धन आता है और उन रुपयोंको एक मन्दिरके निर्माणमें व्यय करना सहन नहीं किया जाएगा । पंजाब विधानसभाके स्पीकर और ‘पाकिस्तान मुस्लिम लीग’के वरिष्ठ नेता परवेज इलाहीने फतवेका समर्थन करते हुए कहा कि मक्कापर विजय पानेके पश्चात पैगम्बर मोहम्मदने काबा ३०० की मूर्तियोंको नष्ट कर दिया था । पाकिस्तानके हिन्दू सांसद लाल चंद मल्हीने स्पष्ट कर दिया है कि विरोध होना है तो होता रहे, मन्दिर निर्माणको नहीं रोका जाएगा; परन्तु अब इमरान खान शासनने शुक्रवार, ३ जुलाईको कट्टरपन्थियोंके ‘फतवे’के आगे घुटने टेकते हुए इस्लामाबादमें बनने जा रहे मन्दिरके निर्माणपर रोक लगा दी है । पाकिस्तानके ‘कैपिटल डिवेलपमेंट अथॉरिटी’ने मन्दिर बनानेका कार्य रोक दिया है ।
धार्मिक प्रकरणके मन्त्रालयके प्रवक्ताने कहा कि धार्मिक दृष्टिकोण देखनेके पश्चात ही मन्दिरपर फैसला लिया जाएगा ।
भारत देशके अधिकांश राज्य शासन मन्दिरोंके धनको मुसलमानोंकी ‘इफ्तार पार्टी’में, ‘हज’में अथवा इमामों अथवा पादरियोंकी आयमें अपव्यय करते हैं और पाकिस्तानमें जिहादी हिन्दुओंके विरुद्ध विष उगल रहे हैं और पाकिस्तानकी जनता भी उनका मूक समर्थन कर रही है तो हिन्दुओ, विचार करो कि पाकिस्तान-हिन्दुस्तान भाई-भाई कैसे हो सकते हैं ? अब जिहादी कितना भी विरोध करें, समस्त विश्वमें धर्मराज्यकी स्थापना होकर ही रहेगी और अहिन्दू देशोंमें ये बनते मन्दिर व उसके लिए मुखर होते स्वर उसीकी आधारशिला रख रहे हैं । २.०७.२०)
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‘हिंदुस्तान टाईम्स’की पत्रकार सृष्टि जसवालने किया भगवानका अपमान, श्रीकृष्णको बताया व्याभिचारी, विरोधके पश्चात किया गया निलम्बित
‘हिंदुस्तान टाईम्स’की पत्रकार सृष्टि जसवालने भगवान श्रीकृष्णके लिए अपमानजनक व घृणास्पद शब्द लिखे । उन्होंने भगवान श्रीकृष्णको व्यभिचारी, ‘फकबॉय’ व विक्षिप्त लिखा तथा कहा कि उन्होंने हिन्दू ग्रन्थोंके अध्ययनमें यह देखा है ।
भगवानका अपमान करनेके कारण भाजपा नेता गौतम अग्रवालने उनके विरुद्ध प्राथमिकी प्रविष्ट करवाई है । उन्होंने कहा कि सृष्टिने भगवानका अपमानकर हिन्दुओंकी भावनाको व्यथित किया है । उन्होंने सृष्टिके ‘ट्वीटर’पर लिखे आक्षेपका छायाचित्र-भी प्रसारित किया, जिसमें वे ‘हिंदुस्तान टाईम्स’का ‘लिंक’ दे रही हैं । उन्होंने जनमानससे कहा कि इस ‘ट्वीट’को अधिकसे अधिक प्रसारित करें ! उन्होंने कहा कि सृष्टिपर कठोर कार्यवाही होनी चाहिए, इससे साम्प्रदायिक द्वेषमें वृद्धि होगी ।
अब समाचार आया है कि सृष्टिको ‘हिंदुस्तान टाइम्स समूह’ने निष्काषित कर दिया है । इसके साथ ही सृष्टि जसवालने अपने ‘ट्विटर’ और ‘इंस्टाग्राम’ खाते भी हटा दिए हैं ।
‘हिंदुस्तान टाइम्स’ने लिखा है कि हम सृष्टि जसवालकी टिप्पणियोंका समर्थन नहीं करते हैं, जो उनके निजी ‘ट्विटर हैंडल’ और उनकेद्वारा व्यक्तिगत रूपसे की गई थीं । उसे तत्काल प्रभावसे निलम्बित कर दिया गया है । उल्लेखनीय है कि हिन्दुओंने सृष्टिका ‘ट्विटर’पर प्रखर विरोध किया था, जिसके पश्चात यह पग उठाया गया है ।
एक तथाकथित व संस्कारहीन वामपन्थी युवती पत्रकारका यह विषवमन उनके संस्कारोंको दिखा रहा है । सभी हिन्दुओंको ऐसे हिन्दूद्रोहियोंका विरोध करके निलम्बित करवानेके लिए अभिनन्दन ! अब हिन्दुओंको यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इन्हें कहीं चाकरी न मिले, यही ऐसी संस्कारहीन युवतियोंका दण्ड होगा !
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प्रियंका वाड्राको एक माहमें शासकीय आवास खाली करनेका आदेश
देहलीमें एक विशिष्ट आवासीय क्षेत्र, जिसे ‘लुटियन’ कहा जाता है और इस क्षेत्रमें सांसदसे लेकर राष्ट्रपति भवन, प्रधानमन्त्री, मन्त्रियों, सांसदोंके आवास हैं, प्रियंका वाड्राको यहां आवंटित आवास रिक्त करनेका आदेश भारत शासनने दिया है । यह उनके पास ३ दशकसे था । ३५ लोधी एस्टेट, ये ‘बंगला’ कई एकडमें फैला हुआ है । प्रियंका वाड्रा न सांसद है और न ही किसी पदपर है; परन्तु इस आवासका अनधिकारसे उपयोग कर रही थीं ।
वस्तुतः कांग्रेस शासनने नियम बनाया था कि ‘SPG’ सुरक्षाप्राप्त व्यक्ति आजीवन देहलीमें ऐसे आवासमें रह सकता था । शासनने प्रियंका वाड्रासे ‘SPG’ सुरक्षा पहले ही ले ली है । यह भारतमें नेताओं की लूटतन्त्रका एक उदाहरण है कि कैसे नेता देश की सम्पत्तिका दुरुपयोग करते हैं । इनके पिता राजीव गांधी प्रधानमन्त्री रहते नौसेनाके जहाजपर अवकाश हेतु जाया करते थे । भारत शासनका यह निर्णय स्वागतयोग्य है और सभी नेताओंसे यह सुविधा लेनेके सम्बन्धमें शासनको विचार करना चाहिए !
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भारतमें अशान्तिके लिए वित्त पोषण (फंडिंग) करनेवाले जॉर्ज सोरोसके लिए कार्य कर रही मनमोहन सिंहकी बेटी
ज्ञातव्य है कि जॉर्ज सोरोस ओसामा बिन लादेन, बगदादी जैसोंसे भी अधिक घातक उन्मादी है और ये सोरोस मूल रूपसे अमेरिकी वामपन्थी है और खरबपति है ।
ये अपने एक अलाभकारी सङ्गठन अर्थात ‘NGO’के माध्यमसे वामपन्थियों और इस्लामिक आतङ्कवादियोंको वित्त पोषणका कार्य करता है, साथ ही नक्सलवादियोंको पैसा देता है और इसने भारतमें भी धार्मिक उन्माद फैलानेका कार्य आरम्भ किया है । सोरोस, जो ‘NGO’ चलाता है, उसका नाम है ‘ओपन सोसाइटी’ है । ये भारतके विरुद्ध विषवमन करनेवाले बिकाऊ ‘मीडिया’, पत्रकारों, बुद्धिजीवियोंको धन देता है और इसने भारतमें अशान्ति फैलानेके लिए १ बिलियन डॉलर अर्थात ७५ अरब रुपए देनेकी घोषणा की थी ।
समाचार है कि कांग्रेस नेता और पूर्व प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंहकी बेटी इसी जॉर्ज सोरोसकी संस्था ‘ओपन सोसाइटी’के लिए कार्य कर रही है । यह जानकारी ओपन सोसाइटीके जालस्थलसे ही प्राप्त हुई है । अमृत सिंह नामकी इस महिलाको ‘ओपन सोसाइटी’ ‘एनजीओ’ने अपना कर्मचारी बताया है । ये अमृत सिंह अन्य कोई और नहीं; अपितु मनमोहन सिंहकी ही बेटी है ।
ये चरित्र है, देशमें शासन करनेवाले पूर्व प्रधानमन्त्रीकी बेटीका ! क्या ऐसे लोगोंके हाथ शासनका कोई महत्त्वपूर्ण पद होना राष्ट्रहितमें हो सकता है ? जो सत्तामें नहीं हैं तो देशविरोधी गतिविधियोंमें सम्मिलित हैं, सत्तामें रहते इन्होंने देशका कितना अहित किया होगा ! इनसे सावधान रहनेकी आवश्यकता है ।
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