उत्तिष्ठ कौन्तेय


१. ‘सीएए’के प्रकरणमें उत्तरप्रदेशमें हिंसा करनेवाले ५७ उपद्रवियोंको, जिन्होंने सार्वजनिक सम्पत्तिको कोट्यावधि रुपयोंकी हानि पहुंचाई है, योगी शासनने उनपर कडी कार्यवाही करते हुए, उनके चित्र चौराहोंपर फलक (पोस्टर) लगाकर सार्वजनिक कर दिए हैं ! उपद्रवियोंपर आर्थिक दण्ड (जुर्माना) पूर्वमें ही लगाया जा चुका है, जिसकी अन्तिम तिथि ८ अप्रैल है । आर्थिक दण्ड न देनेपर इनकी सम्पत्ति अधिकृत (जब्त) की जाएगी और हानिकी भरपाई उपद्रवियोंसे ही की जाएगी ।
        जिस देशमें रहते हैं उस देशके सम्पतियोंको नष्ट करनेवाले ऐसे उपद्रवियोंके विरुद्ध ऐसे ही कडे पग उठाने चाहिए, जिससे पुन: देशकी सम्पत्तिको हानि पहुंचाते समय दो बार अवश्य सोचें । योगी शासन इस हेतु अभिनन्दनका पात्र है एवं देहली शासन भी ऐसा ही करें यह हम हिन्दुओंकी मांग है !
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२. भूतपूर्व सांसदोंकी सेवानिवृत्ति वेतनपर (पेंशनपर) भारतीय महासंघ व्यापार संगठनद्वारा  सूचना मांगे जानेपर ‘आरटीआई’ने बताया कि दोनों सदनोंके कुल ४७९६ सांसदोंको सेवानिवृत्ति वेतन प्रशासनद्वारा दिया जा रहा है । इनमें बडे उद्योगपति, चित्रपटके अभिनेता व भ्रष्टाचारका दण्ड भोग रहे नेता भी सम्मिलित हैं ! भारतीय कोषपर इस धनका बोझ २१% बढाकर गत वर्ष साढे ७० कोटि रुपए किया गया !
      जब देशकी अर्थव्यवस्थाकी स्थति अत्यंत विकट हो, किसान आत्महत्या कर रहे हों, सैनिकोंके पास पर्याप्त साधन न हों, ऐसेमें सेवानिवृत्त सांसदोंकी पेंशनपर २१% की वृद्धि करना और भ्रष्ट नेताओं तथा अभिनेताओंको देशका धन देना लज्जाजनक है और विचित्र है कि आजके कथित महान नेताओंको इसका भान भी नहीं होता !
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३. अमेरिकाकी प्रथम हिन्दू सांसद तुलसी गबार्डने ने डॉ. शीनी अम्ब्राडरका (वही, जिन्होंने हिन्दू महिलाके साथ उबर चालकके दुर्व्यवहारका प्रकरण साझा किया था) लेख साझा करते हुए  ‘ट्विटर’पर बताया कि “दुर्भाग्यसे हिन्दूफोबिया एक सत्य है । मैंने कांग्रेस और राष्ट्रपति मतदानके प्रचार अभियानके समय प्रत्येक बार इसे प्रत्यक्ष अनुभव किया है । ये तो एक उदाहरण है कि हमारे देशमें हिन्दुओंको क्या झेलना पडता है । दुःखद तो यह है कि इसके पश्चात भी हमारे नेता और मीडिया इसे और भडकाते हैं !
       इससे स्पष्ट होता है कि हिन्दुओंके विरुद्ध अन्तर्राष्ट्रीय स्तरपर षडयन्त्र चल रहा है, जिसके लिए हिन्दुओंको अपने स्वरको मुखर करना होगा !
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४. केरलमें वामपन्थी विजयन शासनने अब एक और भ्रष्टाचार करते हुए बाढ आपदा कोषके ३२५ फर्जी लाभार्थियोंके नामके १० लक्ष (लाख) रूपए सीपीएम नेता अनवरके खातेमें स्थानान्तरित कर दिया । इसमें शामिल लिपिकको भी बन्दी बनाया गया है तथा अनवर सहित एक अन्य आरोपी भाग गए हैं । उल्लेखनीय है कि गत वर्ष वामपन्थी शासनने विश्व बैंकद्वारा बाढ आपदा कोषमें पुनर्निर्माणके लिए दिया गया धन वेतन और सेवानिवृत्ति वेतन देनेके लिये व्यय कर दिया था ।
          आज इस देशकी स्थितिका कारण ऐसे ही भ्रष्टाचारी हैं, जो हिन्दूद्रोह तो करते ही हैं, साथमें देशको लूटते हैं ! हिन्दू राष्ट्रमें ऐसे नेताओंका कोई स्थान नही होगा !
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५. ईरानके प्रमुख धार्मिक गुरु अयातुल्ला खामनेईने देहली उपद्रवको लेकर भारत शासनकी आलोचना करते हुए कहा कि भारतमें मुसलमानोंकी स्थिति उचित नहीं है । मुसलमान वहां संकटमें हैं ! भारतमें मुसलमानोंके नरसंहारसे विश्वभरके मुसलमानोंका हृदय दुःखी है । भारत शासनको कट्टर हिन्दुओं और उनके दलोंको रोकना चाहिए ।
      उपद्रवी आतंकियोंके प्रति सहृदयता दिखानेवाले ये इस्लामिक देश इन्हें अपने देशमें आमन्त्रित क्यों नहीं करते हैं ? और वे यह भी समूचे विश्वको बताए कि उनके अपने देशमें कितने हिन्दू हैं, जो सुखसे रह रहे हैं ? सम्भवतः नहीं ! इसीसे इनकी विषैली मानसिकताका बोध होता है ।


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