उत्तिष्ठ कौन्तेय


१. हिन्दू महासभा और हिन्दू समाज दलके राष्ट्रीय नेता कमलेश तिवारीकी हत्याके मुख्य आरोपी अशफाकने सर्वोच्च न्यायलयमें याचिका प्रविष्ट कर कहा कि उत्तरप्रदेशमें उसके प्राणोंपर संकट है; अत: हत्याके अभियोगको देहली या किसी अन्य राज्यमें स्थानान्तरित किया जाए । वास्तवमें, उत्तरप्रदेश पुलिसने जांचके पश्चात दो व्यक्तियोंपर हत्या करने और ११ व्यक्तियोंपर हत्याका षड्यन्त्र रचनेका आरोप लगाते हुए न्यायलयमें ‘चार्जशीट’ प्रविष्ट की है ।
          ऐसे जिहादी, जिनके लिए दूसरेके जीवनका कोई मूल्य नहीं है वे जब अपने प्राणोंपर बन आई है तो न्यायलयका आश्रय मांगने लगे हैं ! चाहे कोई भी हो ऐसे जिहादियोंको कडेसे कडा दण्ड मिलना ही चाहिए, यही हिन्दू समाजकी मांग है ।
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२. उत्तर प्रदेशमें बढती जनसंख्या व बेरोजगारीकी समस्यासे निपटनेके लिए  योगी शासन २ बच्चोंसे अधिक होनेपर दम्पत्तिको प्रशासनिक समाज कल्याण योजनाओंसे बाहर करने व उन्हें पंचायत चुनाव लडनेसे भी रोकनेका नियम बनानेपर विचार कर रहा है । उल्लेखनीय है कि उत्तरप्रदेशमें कुल प्रजनन दर ३ प्रतिशत है, जो कि भारतकी औसत कुल प्रजनन दर २.३ की तुलनामें अधिक है ।
          उत्तरप्रदेशमें गत वर्षोंमें अनेक जनपद ‘लघु पाकिस्तान’ बन चुके हैं, जो आए दिन लवजिहाद, रेपजिहाद, आतंकवाद और उपद्रवके समाचारोंसे हम देख ही रहे हैं; अतः योगी शासनद्वारा ऐसे ही और भी प्रयास गम्भीरतासे किए जाने आवश्यक है !
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३. उत्तर-पूर्वी देहलीके हिन्दू विरोधी उपद्रवके सुनियोजित होने साक्ष्य बार-बार देखनेको मिल रहे हैं । समाचार प्रसारणी ‘एएनआई’के एक प्रतिवेदनके अनुसार उपद्रवी देहली व पश्चिमी उत्तर प्रदेशके गाजियाबाद और मेरठ जैसे क्षेत्रोंसे भी आए थे एवं कट्टरपन्थी संगठन ‘पीएफआई’की भूमिका भी इनमें पहलेसे ही मानी जा रही है ।
          एक ओर जहां देशके हिन्दू ही हिन्दुओंके विरोधमें खडे हैं, वही प्रत्येक जिहादी अपनी कथित ‘कौमी एकता’ हेतु प्राण लेनेको भी तत्पर रहते हैं; अब यह हिन्दुओंको समझना ही होगा और एक होना होगा, जिससे देहली उपद्रव सदृश त्रासदी हिन्दूओंके साथ पुनः न हो ।
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४. जेएनयूमें होली पर्वपर कुछ फलक (पोस्टर) लगाए गए हैं, जिनमें होलीको स्त्री विरोधी त्यौहारकी भांति बताया गया है । एक फलकमें  लिखा गया है, “Why does Brahmanical Patriarchal India celebrate burning of Holika, an Asura Bahujan woman ? What is holy about Holi ? Holi will not only remain anti-bahujan, anti-dalit and anti-adivasi women in character, but is against womanhood itself. SAY NO TO HOLI !”
          ‘जेएनयू’के आतंकी व देशद्रोही मानसिकताके छात्र, जिनमें वामपन्थी व जिहादी दोनों ही हैं, वे कभी पशुओंकी हत्याके क्रूर त्यौहार ईदपर भी कभी नहीं बोलते और होली आते ही स्त्रीविरोधी मानसिकता स्मरण होती है, इससे ही इनकी हिन्दूद्रोही मानसिकताका बोध होता है !
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५. राजस्थानमें बाबा खाटू श्यामके लक्खी मेलेमें आनेवाले श्रद्धालुओंके सेवार्थ भण्डारों लगानेवालोंकी सुविधाएं बढानेके स्थानपर प्रशासनने भण्डारा लगानेवालोंसे ११ से २१ सहस्र रुपए स्वच्छता शुल्क लेनेका निर्णय लिया है । छोटे भण्डारा संचालकोंको ११ सहस्र व बडे संचालकोंको २१ सहस्र रुपए देने होंगे । उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व संस्थाओंको २१०९ रुपए देने होते थे ।
          राजस्थानके हिन्दुओंको ज्ञात हो रहा होगा कि हिन्दूद्रोही कांग्रसको सत्ता देनेका यही परिणाम होता है ! हिन्दुओ ! इससे सीख लें और हिन्दूद्रोहियोंको सत्तासे बाहर करें !


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