उतिष्ठ कौन्तेय
उतिष्ठ कौन्तेय (०९/०४/२०२०)
१. देहलीके द्वारका क्षेत्रमें बने कोरोनासे रूग्ण व्यक्तियों हेतु ‘कोरंटीन’ भवनमें जिहादियोंने महामारी फैलाने हेतु मल- मूत्रको एकत्रितकर परिसरमें छोड दिया । जब कर्मचारियोंको इस विषयका ज्ञान हुआ तो उन्होंने पुलिसको सूचना दी व कार्यवाही हेतु अज्ञात व्यक्तियोंके विरुद्ध प्राथमिकी लिखवा दी ।
जिहादियोंके इस प्रकारके कृत्य सिद्ध करते हैं कि वे चिकित्साल्यके नहीं, वरन कारावासके अधिकारी हैं ।
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२. उत्तरप्रदेशके बहराईचके एक गांव लखैयामें जिहादियोंने एक मन्दिरके शिवलिंगको ध्वस्त करके कुएंमें फेंक दिया और एक दूसरे राधाकृष्ण मन्दिरमें मांसके टुकडे फेंककर अपवित्र कर दिया ! यह सूचना मिलते ही सैकडों लोग एकत्रित हो गए । अत्यधिक रोष प्रकट करनेपर पुलिस प्रभारीद्वारा जघन्य अपराध प्रकरण प्रविष्ट करनेके साथ-साथ वहांपर भारी सुरक्षा बलोंको नियुक्त कर दिया गया, जो कि अभीतक किसी भी अपराधीको नहीं ढूंढ पाए हैं ।
हिन्दुत्वनिष्ठ योगीजीके इस राज्यके मुखिया होते हुए भी जिहादी इतना दुस्साहस करते हैं तो सोचें यदि आज कोई अहिंदुओंके तुष्टिकरण करनेवालेका शासन होता अतो क्या होता ? और दुःखकी बात यह है कि विदेशी धनसे पोषित ‘मीडिया’ इन्हें भयभीत बताती है ! हिन्दुओंके देवस्थान सुरक्षित रहे एवं ऐसे अत्याचार रुकें; इसलिए अब हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना आवश्यक है !
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३. छत्तीसगढ भिलाईके फरीद नगर सुपेला क्षेत्रमें ‘होम क्वारंटाइन’के लोगोंका सर्वेक्षण करने पहुंची दो महिला स्वास्थ्यकर्मी विनीता साहू और रश्मि रायने नदीमसे दो ‘होम क्वारंटाइन्ड’ व्यक्तियोंकी जानकारी मांगी तो घरकी महिला निगारा खातून दोनों स्वास्थ्य कर्मियोंपर भडक उठी और उन्हें ‘एनआरसी’का सर्वेक्षण करनेवाले बताते हुए ३० महिलाएं और कुछ पुरुष लोगोंकी भीड एकत्र कर ली तथा सभीने मिलकर दोनोंसे मारपीट की । पुलिस सूचना मिलनेपर वहां पहुंची तो आरोपियोंने पुलिसकर्मियोंसे भी हाथापाई की । सुपेला पुलिसने आरोपी निगारा खातून व अन्यके विरूद्ध शासकीय सेवकोंसे मारपीट और प्रतिबन्धके उल्लंघनकी धाराओंके अन्तर्गत अभियोग प्रविष्ट किया है ।
जिहादी ऐसा दुस्साहस कर पाते हैं; क्योंकि उन्हें ज्ञात है कि यह जर्जर हुआ कथित लोकतन्त्र व शासकगण उनकी रक्षा करेंगें । अब यह लोकतन्त्र ऐसे आतंकियोंका संरक्षणकर देशपर ही भार बन रहा है; अतः अब परिवर्तन अपरिहार्य है !
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४. दैनिक भास्कर द्वाराकी गई एक जांचके अनुसार कोरोना प्रभावित इन्दौरमें अप्रैल माहके सात दिनोंमें मुसलमानोंके चार कब्रिस्तान, जो कि ‘क्वारंटाइन’ क्षेत्रमें स्थित है, वहां आनेवाले शवोंमें एकाएक वृद्धि हुई है ! इन सात दिनोंमें १४५ लोगोंको दफनाया गया है, जबकि गत माहमें केवल १३० शव ही आए थे । वहीं श्मशान घाटोंमें हिन्दुओंके दाह संस्कार करनेकी संख्या पहले जैसी है । चिंताजनक तथ्य है कि इन ७ दिनोंमें कोरोनाके कारण हुई मृत्युमें १३ केवल इन्दौरसे हैं ! ब्यौरेके अनुसार मृतकोंकी यात्राके इतिहास और कोरोना लक्षण दिखनेके पश्चात भी उनकी जांच नहीं की गई, जिसकी अब गुप्तचर विभागने जांच आरम्भ कर दी है ।
यह अत्यन्त चिन्ताजनक विषय है कि विषाणुग्रस्त शवको जिहादी दबा रहे हैं और न ही शासनको कोई सूचना दे रहे हैं । भयावह स्तरपर फैलते इस संक्रमणको रोकने हेतु गुप्तचर विभाग व मध्यप्रदेश शासन इसपर त्वरित रोक लगाए !
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५. मध्य प्रदेशमें नागरिकोंके लिए सेवारत पुलिस प्रशासनपर जिहादियोंद्वारा प्रहार करनेके प्रकरण थम नहीं रहे हैं । अब इन्दौर जनपदके चन्दन नगर क्षेत्रमें पुलिसकर्मियोंने जब नागरिकोंसे भीतर जाने हेतु कहा तो जिहादी कुपित हो गए और पुलिसकर्मियोंपर पत्थर बरसाने लगे व अभद्रताकर उनपर थूक भी दिया । घटनाके आरोपियोंमेंसे ५ को अभी बन्दी बनाया गया है ।
यदि शासकगण आज तुष्टिकरण छोड दे तो कल ऐसा प्रकरण पुनः नहीं होगा !; परन्तु दुःखद है कि यह हो नहीं रहा है ।
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