उत्तिष्ठ कौन्तेय
१. पुलिसने बेंगलुरुसे एक १७ वर्षीय बांग्लादेशी युवतीसे दूष्कर्म करनेवाले ५ जिहादियोंको बन्दी बनाया है । उल्लेखनीय है कि युवतीको अत्यंत दयनीय अवस्थामें एक ‘एनजीओ’द्वारा बचाया गया । युवतीने बताया कि वह बांग्लादेशसे है और उसे नौकरी देनेके बहाने कुछ लोगोंद्वारा भारत लाया गया था । उसे कथित रूपसे प्रताडित किया गया और वैश्यावृत्तिके लिए विवश किया गया, तदोपरान्त सिद्धपुरा पुलिसने बेंगलुरुमें रहनेवाले ५ बांग्लादेशी जिहादियोंको बन्दी बनाया ।
इससे ज्ञात होता है कि सीमापर हमारी सुरक्षा कैसी है ? और राष्ट्रद्रोही ममता बैनर्जी सदृश राज्य शासनके आश्रयसे बंग्लादेशी कितनी सरलतासे न केवल स्वयं सीमामें प्रवेश कर रहे हैं, वरन अन्योंको भी ला रहे हैं । भारत शासन त्वरित इस विषयमें विचार करे !
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२. भारत शासनने बताया है कि, भारतका ३८००० ‘स्क्वॉयर किलोमीटर’ लद्दाखका भूभाग चीनद्वारा अधिकृत है । शासनने साथ ही संसदमें स्पष्ट किया कि अरुणाचल प्रदेश और केन्द्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारतका अभिन्न अंग है ।
हमारे शासकगण जबतक बातें और ‘नारेबाजी’ करनेके स्थानपर शस्त्रोंमें आत्मनिर्भर नहीं बनेंगें और चीनसे किए जानेवाले व्यापार रोक नहीं लगाएंगें, तबतक इस समस्याका समाधान नहीं हो सकता है; अतः नेतागण समाधानकी ओर बढे !
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३. जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालयने केन्द्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाखमें पैलेट गनके उपयोगपर प्रतिबन्ध लगानेसे मना कर दिया है । उल्लेखनीय है कि जम्मू-कश्मीरमें प्रदर्शनकारियोंपर ‘पैलेट गन’का उपयोग करनेके विरुद्ध वर्ष २०१६ में जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालयमें एक जनहित याचिका प्रविष्ट की गई थी ।
वस्तुतः जो आतंकी बन्दूकसे मारे जाने योग्य हैं, उनपर ‘पैलेट गन’का प्रयोग तो सुरक्षाबलोंपर अन्याय ही है, ऐसेमें न्यायालयका यह निर्णय अभिनन्दन योग्य है; अन्यथा इस कथित मानवाधिकारने इस देशकी अत्यन्त दुर्गति की है ।
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४. लखनऊके गोमतीनगर थानेकी अम्बेडकर उद्यान चौकी प्रभारी संजय कुमार गुप्तको ‘आइपीएस’ नवीन अरोडाद्वारा ‘लाईन हाजिर’ होनेका आदेश दिया गया; क्योंकि वो जनताके साथ होली खेल रहे थे और उनकी चौकीकी ‘मेज’पर मिठाई रखी थी ! उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व ही योगी शासनद्वारा नमस्ते लखनऊ का अभियान चलाया गया था, जिसमें पुलिस और जनताके आपसी सम्पर्क बढानेपर बल दिया गया था ।
पुलिस जनताके लिए होती है और यदि नवीन अरोडा सदृश उच्च अधिकारी पुलिस और जनतामें ऐसे ही अन्तर बनाते रहे तो क्यों पहले ही भ्रष्टाचारसे त्रस्त जनता पुलिसपर विश्वास करेगी और फिर ‘नमस्ते लखनऊ’ अभियानकी क्या आवश्यकता थी ? योगी शासन इसमें हस्तक्षेप करे !
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५. देहली पुलिसके विशेष विभागने कट्टरपन्थी संगठन ‘पीएफआई’के मुखिया परवेज और सचिव इलियासको शाहीन बाग प्रदर्शनके लिए धन उपलब्ध कराने और उपद्रव भडकानेके आरोपमें बन्दी बनाया है । उपद्रवके समय ‘आप’ और कांग्रेसके कई नेता भ्रमणभाष, सन्देश और ‘व्हाट्सऐप्प’द्वारा इनके सम्पर्कमें थे !
पूर्वमें भी अनेक आतंकी गतिविधियोंमें सम्मिलित संगठन ‘पीएफआई’को केन्द्र शासन प्रतिबन्धित क्यों नहीं करता ? और क्या देशभक्तिकी बातें करनेवाले अरविन्द केजरीवाल अपने दलके इन आतंकी नेताओंपर कार्यवाही करनेका साहस करेंगे ?
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६. गत माह उत्तरी-पूर्वी देहलीमें हुई हिंसामें समाचार माध्यम ‘सीएनएन न्यूज१८’के प्रतिवेदनके अनुसार, इस उपद्रवमें इण्डोनेशियाके एक ‘एनजीओ’ने उपद्रव हेतु धन उपलब्ध कराया और अंतर्जालपर इस उपद्रवका प्रचार भी किया था !
विश्व भरके जिहादी अपने समुदायके संरक्षण हेतु सदैव तत्पर रहते हैं, तो हिन्दुओ, अब तो कमसे कम संगठनकी शक्तिको पहचानें, जिससे कोई भी बुरी दृष्टिसे देख भी न पाए !
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७. सीएएके विरोधको लेकर अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालयका सत्य हुआ उजागर !
‘सीएए’के विरोधको लेकर गत २३ फरवरीको ऊपरकोटमें बढे तनावकी जांचमें ‘सीसीटीवी’से ज्ञात हुआ है कि प्रदर्शन हटनेके पश्चात शेष खाद्य सामग्री व पानीकी बोतलें अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालयके भीतर गई थी । प्रदर्शनमें छात्राओंके सम्मिलित होनेकी बात भी सामने आई है, जो कि प्रदर्शनमें महिलाओंको भडकानेके पश्चात स्वयं भाग गई थीं ।
ऐसे आतंकी विश्वविद्यालयोंको आश्रय देकर हम अपने ही विनाशकी ओर बढ रहे हैं । विडम्बना है कि हमारे शासकगणोंको यह समझ नहीं आता और वे ऐसे शिक्षण संस्थानोंको प्रतिबंधित न कर वस्तुत: आतंकियोंका पोषण करनेमें लगे हैं !
(१३/०३/२०२०)
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