उतिष्ठ कौन्तेय
उतिष्ठ कौन्तेय (१३/०४/२०२०)
१. भारतमें अवैध रूपसे छुपकर रह रहे म्यांमारके रोहिंग्या मुसलमानोंकी झारखण्डके कई क्षेत्रोंमें उपस्थिति और सक्रियताके प्रमाण मिले हैं ! समाचारके अनुसार गत सप्ताह जब तबलीगी जिहादियोंकी खोज चल रही थी, उसी मध्य छापेमारीके क्रममें धनबाद जनपदमें तीन रोहिंग्या मुसलमानोंको भी पकडा गया तथा गुप्तचर विभागके अनुसार अन्य क्षेत्रोंमें भी इनके छिपकर रहनेकी सूचना प्राप्त हुई है, वहीं लोहरदगामें भी कई मुसलमान बहुल क्षेत्रोंमें रोहिंग्याके छिपकर रहनेकी सूचना मिली है, जहां वहांके जिहादियोंने रोहिंग्याओंको छुपाया हुआ था । उल्लेखनीय है कि लोहरदगामें हुए उपद्रवमें भी इनके सम्मिलित होनेकी आशंका है ।
स्थानीय धर्मान्ध और यह जिहादियोंके हितकर झारखंड शासनके कारण ही यह स्थिति है । यह समाचार स्पष्ट कर रहा है कि जिहादी केवल इस्लामको मानते हैं, देशको नहीं और मोदी शासन ऐसे राज्यकर्ताओंपर कडी कार्यवाहीकर उनका शासन निरस्त करे !
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२. आन्ध्र प्रदेशके उप-मुख्यमन्त्री के. नारायण स्वामीने तबलीगी जमातके सदस्योंपर ‘कोविड-१९’का संक्रमण पूरे देशमें फैलानेका आरोप लगाते हुए कहा कि ये लोग सारे निकृष्ट कार्य करते हैं । उन्होंने यह भी दृढतापूर्वक कहा कि आन्ध्र प्रदेशमें २५-२६ से अधिक ‘कोरोना’के रोगी नहीं होते; किन्तु जमातियोंने यहां आकर सब गुड-गोबर कर दिया । उल्लेखनीय है कि राज्यमें ‘कोरोना’से ४०५ संक्रमित रोगी हैं, जिनमें ६ की मृत्यु हो चुकी है !
अब आन्ध्र शासनको जमातियोंकी चूक दिख रही है ! यह तुष्टिकरणके समय दिखी होती तो यह स्थिति ही क्यों बनती ? तुष्टिकरण करनेवाले नेतागण ही आज भारत व अपने-अपने राज्योंकी इस स्थितिके लिए उत्तरदायी हैं एवं उनकी इस चूकका मूल्य इस देशको एक बडी जनहानि एवं धनहानिके रूपमें चुकाना होगा !
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३. देशभरमें तबलीगी जमातियोंद्वारा ‘कोरोना’ संक्रमण फैलाए जानेको लेकर देहलीके मुख्यमन्त्री अरविन्द केजरीवालने कहा कि जमातसे जुडे लोग तथा उनके सम्पर्कमें आनेवाले लोगोंको जाननेके पश्चात स्थितिको नियन्त्रित करनेके लिए कमसे कम दो सप्ताहकी आवश्यकता होगी । केन्द्र शासनद्वारा ‘लॉकडाउन’को लेकर बनाई गई सभी नीतियोंका देहली शासन पालन करेगा ।
केन्द्र व देहली शासन यदि जिहादियोंके तुष्टिकरणके स्थानपर पहले ही ये निर्णय लेते तो आज देहली व देशकी यह स्थिति न होती ! क्यों देहली शासनने इन्हें नहीं रोका ? आजके ये अदूरदर्शी नेतागण सत्ताके योग्य हैं ही नहीं !
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४. एक हिन्दूको दुबईके किसी प्रतिष्ठान ‘एमरिल सर्विसेज’से निकाल दिया गया, जब उसने किसी ‘ट्विटर’पर ‘कोरोना’से लडनेके लिए पांच बार नमाज पढनेवाले सन्देशपर आपत्ति प्रकट की तो रिजवान नामक जिहादीने उसे इस्लामका विरोधी और अपमान करनेवाला बताया, जबकि राकेशने कोई अपमानजनक बात नहीं की थी । अब उसे दुबई पुलिसको सौंपनेकी तैयारी की जा रही है ।
खाडी देशोंमें हिन्दुओंको फंसाकर उन्हें प्रताडित करनेका षड्यन्त्र करके कट्टरपन्थी, हिन्दुओंको कष्ट देनेका बहाना ढूंढ रहे हैं । ऐसे देशोंमें हिन्दुओंको कार्य हेतु ऐसे देशमें जाना बुद्धिमानी नहीं है । भारत शासनने इसमें हस्तक्षेप करके वहांके विधानसे उसे बचानेका प्रयास करना चाहिए ।
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५. करोना संक्रमणसे बचाव करनेवाले मास्कका उपहास करनेवाला मध्यप्रदेशके सागर जनपदका समीर खान नामक जिहादी, जो अपने ‘टिकटॉक’पर कहता दिखाई दिया कि वह इस वस्त्रके टुकडेपर विश्वास नहीं करता, वरन वह अल्लाहपर विश्वास करता है और अपने इसप्रकारके ‘विडियो’द्वारा वह समाजको मास्क न लगानेके लिए प्रेरित करता दिखा, जो करोना बढनेका कारण बनता; परन्तु अब इस जिहादीको ‘कोरोना’ होनेपर समीर खान ‘टिकटॉक’पर स्वयंके लिए प्रार्थना करनेकी याचिका करता हुआ दिखाई दिया ।
ऐसे जिहादी चिकित्साके नहीं, वरन दण्डके पात्र हैं और केन्द्र त्वरित जिहादियोंका माध्यम बने इस ‘टिकटॉक’पर कडी कार्यवाही करे !
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