उतिष्ठ कौन्तेय
उतिष्ठ कौन्तेय (१५/०४/२०२०)
१. कांग्रेसके मुखपत्र ‘नेशनल हेराल्ड’ने जेएनयूके ‘असिस्टेंट प्रोफेसर’ विकास वाजपेयीद्वारा लिखा लेख प्रकाशित किया , जिसमे देशकी जनताको संक्रमित करनेवाले तबलीगी जमातको निर्दोष बताते हुए कहा कि जमातके लोग और प्रवासी (माइग्रेंट) स्वयं सरकारके सामने कैसे आएंगे जबकि उन्हें चिकित्सालयमें और रोग हो जानेका भय हो । हिन्दू समुदायको भी मध्यमें घसीटते हुए ‘गोदी मीडिया’ और ‘गोबर पॉलिटिक्स’ जैसे शब्दोंका प्रयोग किया जैसे मुसलमान कट्टरपंथियोंका बचाव करनेके साथ हिन्दू समाजको लज्जित करना अनिवार्य हो तथा शासन व ‘मीडिया’की विफलताको तबलीगी जमातके सिर डालनेका आरोप लगाते समय लेखक चतुराईसे तबलीगी जमातकी घृणात्मक कुकृत्योंपर चुप्पी साध गया ।
निजामुद्दीन मरकजका मूर्ख मौलाना सादका कहना कि कोरोना विषाणु इस्लामके विरुद्ध षड्यंत्र है, कुतर्कोंका आश्रय लेकर, इस्लामिक संगठनके पापोंको धोनेमें लिप्त लेखकको यह दिखाई नहीं देता, वहीं हिन्दू विरोधी कांग्रेसद्वारा संचालित ‘नेशनल हेराल्ड’को लगता है कि आगेका मार्ग हिन्दुओंके प्रति घृणा फैलानेसे ही तय होनेवाली हैं ।
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२. इंडिया टीवी’ के ‘एडिटर इन चीफ’ और ‘चेयरमैन’ रजत शर्माके अनुसार दिल्लीके निजामुद्दीन स्थित मरकज मस्जिदमें ९००० से अधिक लोग सम्मिलित थे । इनमें से केवल ३१९३ की ही जानकारी है, जिसमेसे ७६५ कोरोना संक्रमित है, अन्य लोगोंका कोई अता पता नहीं है ।
यदि यह बात सत्य है तो यह अत्यन्त चिंताका विषय है; क्योंकि ये जमाती पता नहीं कहां छुपे बैठे है और अन्य लोगोको भी संक्रमित कर मृत्युके मुखमें धकेल रहे है। गुप्तचर विभाग शीघ्रतासे इसपर कार्यवाही करे ऐसी उनसे हमारी मांग है !
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३. दक्षिणी भारतमें स्थित देव स्थानोंके संचालन व प्रबंधन करनेवाले ‘त्रावणकोर देवस्थानम बोर्ड’ने निर्णय लिया है कि संस्थासे सम्बंधित समस्त मंदिरोंमें उपलब्ध सोने व चाँदीकी खेप को ‘रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया’में जमा करवा दिया जाएगा। इसके अन्तर्गत प्रथम चरणमें २४ ‘किलो’ सोना-चाँदीको बैंकमें स्थानांतरितकर उन वस्तुओं पर २% के ब्याज दरसे संस्थाको लाभ मिलेगा । इसमें यह ध्यान देने योग्य है कि इस बोर्डके अध्यक्ष साम्यवादी विचारधारावाले दलोंसे संबंधित है ।
हिंदुओंके धार्मिक स्थलोंसे धनको लूटनेकी य कुप्रथ मुगलिया कालसे चली आ रही है । पूर्वमें मुसलमान शासकों व स्वतंत्रताके उपरांत राजनीतिक दलोंने ऐसे ही कुकृत्य किए हैं । परन्तु क्या कभी यह अन्य अहिंदू धार्मिक स्थलोंके संचालक इस विषयमें ऐसा आदेश देनेका भी साहस करेंगे ? आप स्वयं ही विचार करें । और इस निर्णयके पश्चात हिन्दूके दानसे एकत्रित धन देवालयमें कभी वापस आ सकता है क्या यह भी सोचें !
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४. १२ अप्रैल २०२० उत्तर प्रदेशके भदोहीमें ५ बच्चोंकी मृत्युका समाचार अनुचित ढंगसे उजागर करनेके आरोपमें हंसराज मीना, जनवाणीके पत्रकार सलीम अख्तर सिद्दीकीके विरुध प्राथमिकी दर्ज की गई है। महिला मंजूने बताया हैकि उसका पतिसे किसी बातको लेकर झगडा हुआ वह प्रतिदिन उसे मारते पीटते थे जिस कारण उसने ऐसा निर्णय किया ।
इस प्रकारकी घटनासे स्पष्ट होता है कि ऐसे देशद्रोही लोग समाजको अनुचित ढंगसे समाचार देकर देशमें अव्यवस्था फैलाकर लोगोंके मनमें भयका वातावरण निर्माण करना चाहते हैं । ऐसे लोगोंपर प्रशासनद्वारा कठोर दण्ड दिया जाना चाहिए ।
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५. देशबन्दीके चलते, नदियोंमें स्वच्छ जल बहता पाया गया । चूंकि अधिकतर लोग घरोंमें हैं; इसलिए प्रदूषण नियंत्रण मंचने इसका कारण यातायातपर प्रतिबंध एवं उद्योगिक इकाईयोंका बन्द होना बताया । गंगाकी पचास प्रतिशत स्वच्छताके साथ-साथ दूसरी नदियोंमें भी स्वच्छता दिखाई दी है । ‘यमुना मैनेजिंग कमेटी’के अनुसार सबसे अधिक प्रदुषण वजीराबादसे ओखलातक की २२ किलोमीटर लम्बाईमें, देशके कुल प्रदुषणका ७६% भाग पाया गया जबकि यह, गंगाकी कुल १३७० कि. मी. लम्बाईका केवळ २% भाग है ।
उद्योगोंका अपशिष्ट नदियोंमें गिरनेसे बचानेके लिए, शासनद्वारा बंदीके पश्चात ठोस प्रयास करते हुए, ऐसे उद्योगिक इकाइयोंका विषैले अवशेषको नदियोंमें न डालकर उसपर उपचार कर उसका कुछ और उपयोग करना चाहिए, जिससे प्रदुषण अधिकसे अधिक रोका जा सके एवं नदियोंकी निर्मलताको बनाये रखनेका प्रयास करना चाहिए |
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६. रांचीके हिंदपीढीसे दो संदिग्ध संक्रमितोंको लाने गए स्वास्थ्य कर्मीकी मंडलीपर विरोधियोंने ईंट व पत्थर बरसाकर रुग्ण-वाहनको भारी क्षति पहुंचाई तथा चालकने भागकर, थाने पहुंचकर अपना बचाव किया । सुरक्षाकी दृष्टिसे वहां भारी पुलिस तैनात कर दी गई है । पांचमेंसे तीन संक्रमित केवल हिंदपीढीसे हैं, जिसमेंसे केवल एकको ही चिकित्सालय पहुंचा पाए । उलेखनीय है कि इससे पहले भी हिंदपीढीमें स्वस्थ्य कर्मियोंपर आक्रमण हो चुका है, जब मलेशियाकी एक संकर्मिताके सम्पर्कमें आनेवालोंकी जांचके लिए भेजी गई मंडलीको भी मार खाकर खाली हाथ वापस लौटना पडा था ।
राजनेताओंकी तुष्टिकरण अभीतक चल रही है, यह नीति इस देशको डुबोकर रखेगी ! क्योंकि इनकी निष्क्रियताके कारण ही जिहादी सुरक्षा कर्मियोंपर बार-बार आक्रमण कर रहें हैं। ऐसेमें उन्हें चिकित्सा नहीं अपितु कठोरदंड दिया जाना चाहिए, यह आजके शासक व प्रशासकवर्गको समझमें क्यों नहीं आता है ?
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