उत्तिष्ठ कौन्तेय


१. देहली उच्च न्यायालयने अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्यायद्वारा प्रविष्ट उस याचिकाको निरस्त कर दिया है, जिसमें चेतावनी देकर धर्म परिवर्तन करनेपर नियन्त्रण करनेकी मांग की गई थी । याचिकामें कहा गया था कि ‘सामाजिक और आर्थिक रूपसे निर्बल हिन्दू पुरुषों व महिलाओंके सामूहिक धार्मिक रूपान्तरणमें गत २० वर्षोंमें अत्यधिक वृद्धि हुई है और यदि शासनद्वारा कोई ठोस प्रयास नहीं किए गए, तो भारतमें हिन्दू अल्पसंख्यक होकर रह जाएंगे !
    न्यायलयद्वारा यह प्रथम बार थोदे ही हुआ है, दुःखकी बात तो यह है कि आज प्रखरतासे हिन्दू हितके विषय सोचनेवाले नययाधीध भी इस देशमें नहीं है, इसलिए हिन्दू राष्ट्रकी आवश्यकता है !
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२. मध्यप्रदेशमें कांग्रेसके भीतर चल रही उठापटकके कारण मुख्यमन्त्री कमलनाथ शासनके मन्त्री पीसी शर्माने शनिवार, १४ मार्चको देवीकी शरणमें जाकर उन्हें अनुष्ठान करके मनानेका प्रयास किया और आगर मालवाके नलखेडामें ‘शत्रु विनाशक यज्ञ’ किया !
    हिन्दूद्रोही निर्णय करनेवाला और देवताओंका अनादर करनेवाला कांग्रेस शासन अब देवताओंकी शरणमें जा रहा है ! सबके मनकी जाननेवाले देवताओंके साथ-साथ, सामान्य हिन्दू भी इनके इस ढोंगको समझने लगे हैं और कांग्रेस शासनसे मुक्ति चाहते हैं !
(१६/०३/२०२०)


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