उत्तिष्ठ कौन्तेय
१. उत्तरप्रदेशमें ‘रिकवरी ऑफ डैमेज टू पब्लिक एंड प्राइवेट प्रॉपर्टी’ अध्यादेशके प्रारूपको सहमति मिलनेके पश्चात समाजिक जालस्थलपर प्रतिक्रिया देते हुए कल्याणपुर केशवपुरम निवासी अधिवक्ता अब्दुल हन्नानने ‘ट्विटर’के माध्यमसे मुख्यमन्त्री योगी आदित्यनाथपर आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए अभद्र व भडकाऊ बातें लिखी व उन्हें आतंकवादी कहा ! पुलिसने देशद्रोहका अभियोग चलाकर आरोपीको बन्दी बना लिया है ।
जिहादी मानसिकतावाले व्यक्ति कितने भी बडे पदपर क्यों न हो, प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूपसे उपद्रवियोंका ही साथ देते हैं ! क्या ऐसी आतंकी मानसिकताके लोग अधिवक्ता जैसे पदके अधिकारी होने चाहिए ?
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२. देहली विश्वविद्यालयमें वीर सावरकरकी प्रतिमापर कालिख पोतनेकी घटनाके पश्चात, अब ‘जेएनयू’के सुबनसर छात्रावासके समीप एक मार्गका (सडकका) नाम वीर सावरकर करनेपर, वहां वामपन्थी छात्रोंने रात्रिमें मार्गमें लगे फलकको (बोर्डको) क्षतिग्रस्तकर कालिख पोत दी और उसपर बी.आर. अम्बेडकर लिखकर, देशको दो भागोंमें विभाजित करनेवाले जिन्नाका चित्र लगा दिया !
अभिव्यक्तिकी स्वतन्त्रताके नामपर अब ‘जेएनयू’के इन वामपन्थियोंका पाकिस्तानी प्रेम एवं राष्ट्रद्रोही मानसिकता स्पष्ट दिखने लगा है । छात्रोंके रूपमें छुपे इन जिहादियोंपर केन्द्र शासन त्वरित कठोर कार्यवाहीकर देशद्रोहियोंका स्थल बने इस विश्वविद्यालयको बन्द करे, यही देशहितमें होगा !
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३. शनिवार, १४ मार्चको तेलंगानाके करीमाबादके श्री शिवलिंगेश्वर मन्दिरमें हनुमानजीकी प्रतिमाको तोडा गया और मन्दिरको क्षति पहुंचाई गई ! बंजरग दलके कार्यकर्ताओंने इसपर शासनसे कडी कार्यवाहीकी मांग की है । उल्लेखनीय है कि गत कुछ समयसे तेलंगानामें हिन्दुओं और मन्दिरोंपर आक्रमणके समाचार आ रहे हैं ।
हिन्दूद्रोही तथा ईसाईयों और जिहादियोंकी समर्थक रेड्डी शासनके रहते ऐसा होना साधारण बात है तो यदि ऐसे कृत्योंको रोकना है तो देशभरके हिन्दुओंको संगठित होकर अपने स्वरको मुखर करना होगा और हिन्दूद्रोही शासनको सत्ताहीन करना होगा !
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४. शाहीन बागमें प्रदर्शनपर बैठी महिलाओंको वहांसे हटानेके लिए जब देहली पुलिस प्रदर्शन स्थलपर पहुंची तो उन्होंने शासनकी बात माननेसे मना कर दिया । प्रदर्शनकारियोंने पूछा था कि ५० लोगोंकी भीड न जुटनेवाले आदेशके पीछेका चिकित्सकीय आधार क्या है ? और कहा कि ‘कोरोना’ विषाणुके नामपर शाहीन बागके प्रदर्शनको समाप्त करनेका षडयन्त्र किया जा रहा है । उपद्रवियोंने आरोप लगाया कि केजरीवाल सबको भयभीत कर रहे हैं ।
ऐसे संकटके समय शासनको विशेष पग उठाते हुए, ऐसे मूढ धर्मान्धोंको सीधे कारावासमें डालनेका निर्णय लेना चाहिए; अन्यथा शेष देशवासियोंको भी इनके कारण भारी कष्ट भोगना पड सकता है !
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५. भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान ‘आईआईटी’ कानपुरमें अभियान्त्रिकी (इंजीनियरिंग) पाठ्यक्रमके तृतीय वर्षका वह छात्र, जिसने नागरिकता संशोधन विधेयकके विरोध प्रदर्शनके मध्य फैज अहमदकी कविता ‘हम देखेंगे’का पठन किया था, जिसमें देवताओंकी प्रतिमाएं तोडनेकी बात कही गई थी, अब जांच समितिके प्रतिवेदन प्रस्तुत करनेपर अपने उसी कृत्यपर क्षमा मांगी है कि उसने बिना सोचे उस समय ऐसा करके लोगोंकी धार्मिक भावनाओंको आहत किया !
छात्र दण्ड व अपमानके भयसे क्षमा मांगनेका ढोंग तो कर रहा है; परन्तु उसने अपनी वास्तविक जिहादी मानसिकता प्रकट कर ही दी है और यदि अब भी क्षमा किया जाएगा तो कलको यदि वह भी आतंकी बन जाए तो यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी !
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