उतिष्ठ कौन्तेय


उतिष्ठ कौन्तेय (१८/०४/२०२०)

१. १७ अप्रैल २०२०को पुलिस दलको, राजस्थानके टोंक नगरके कसाई मोहल्लामें लगे निषेधाज्ञाका (कर्फ्यूका) पालन करानेमें जुटी थी तब कुछ लोगोंने इसे तोडनेका प्रयास किया और उन्हें रोकनेपर आधा दर्जन लोगोंने लाठी-डंडों और तलवारसे आक्रमण करके चोटिल कर दिया इसीप्रकार उत्तर प्रदेशके मुरादाबादमें चिकित्सकीय दल और पुलिसदलपर आक्रमण किया गया जिसपर शासनने त्वरित कार्यवाही करते हुए इन्हें न्यायालयमें प्रस्तुत एवं न्यायालयने कार्यवाही करते हुए प्रातः तीन बजे न्यायाधीशने अपने घरपर ही इस प्रकरणकी सुनवाई करते हुए इन सभी आरोपियोंको १४ दिनकी न्यायिक अभिरक्षामें कारागार भेज दिया ।
     केंद्रका शासन और राज्य शासन विगतमें इन धर्मान्धोंपर त्वरित कार्यवाही करती तो आज महामारीके समय इन लोगोंका ऐसा साहस न होता कि जो लोग इनके जीवन रक्षामें लगे हैं, उन्हींके जीवनको ये संकट डाल देते |
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२. गुप्तचर विभागके डीएसपी जितेन्द्र कुमारको उनके सेवा स्थलसे हटाकर कहीं ओर स्थानांतरण कर दिया गया है | उन्होंने झारखंडमें घुसपैठी रोहिंगयोके छिपे होनेका और साथ ही उनके १३ संरक्षकोंका विवरण दिया था तो उनके स्थानपर किसी मुस्लिमको विराजित करते हुए अंजुमन इस्लामियाके हाजी शकीलने आरोपको निरस्त करते हुए इसे षड्यंत्र बताया । उनका कहना है कि वे १३ प्रतिष्ठित सदस्य हैं । इससे पहले भी झारखंडकी गठबंधन शासनमें तीन रोहिंगयोंको पकडा जा चुका है, जहांपर नागरिकता संशोधन नियमके समर्थनमें हुए प्रदर्शनमें पथरावसे एक व्यक्ति नीरजकी मृत्यु हो गई थी और उसकी पत्नीकी भी कोई सुनवाई नहीं हुई थी ।
   अपने दोषोंको छिपानेके प्रयासमें जितेन्द्र कुमारका स्थानांतरण करके यह बता दिया है कि वहांका कांग्रेस गठबन्धित शासन आज भी मुसलमानोंके तुष्टिकरणमें लगी हुई है । ऐसे शासनसे किसी प्रकारकी भी आशा करना अनुचित है एवं राज्य शासनकी इसप्रकार की कार्यवाही भविष्यमें भी ऐसे राष्ट्रद्रोही तत्त्वको प्रोत्साहन ही देंगे ।
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 ३. अन्तत: देहलीकी केजरीवाल शासनने भी स्वीकार कर लिया है कि राजधानीमें कोरोना संक्रमणकी घटनाओंमें ६८ प्रतिशत वृद्धि केवल तबलीगी जमातके चलते हुई है। देहलीके स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैनके द्वारा दिए गए आंकडोंके अनुसार संक्रमित रोगियोंकी संख्या बढकर १५७८ हो गई है जिसमें १००० से अधिक रोगी मरकजसे जुडे हैं ।
    मौलाना सादके विरुद्ध अपराधिक परिवाद प्रविष्ट होने, ‘ईडी’ द्वारा जांच आरम्भ करने और समस्त विश्वको ज्ञातहो जानेके पश्चात ही मुसलमान परस्त केजरीवाल प्रशासनद्वाराकी गई यह स्वीकारोक्ति , उनका निसहाय होना ही दर्शाता है !
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४. कोरोना महामारीसे दूर दूर रहनेकी बात करनेवाले, कर्नाटकके भूतपूर्व मुख्यमंत्री एवं वर्तमान जनता दलके  विधायक पदपर कुमार स्वामीने अपने पुत्रका विवाह , बडी संख्यामें आमंत्रित अतिथियोंके संग अपने फार्म-हाउसपर बडी धूमधामसे करते हुए महामारी हेतु देश-बन्दीकी धज्जियां उडाईं  जिसमें आनेवाले सभी आगुन्तकोंको बिना किसी मुखावरण (मास्क) और हस्तत्राणके (ग्लव्स) पास-पास खडे हुए देखा गया। उपमुख्यमंत्री ए. नारायणने इसे व्यवस्थाका उपहास बताया ।
   महामारीके कारण सभी ओर जनताके एकत्रित होनेपर रोक लगाई गई है, विशेषकर सम्मेलन व विवाह समारोह इत्यादि  किए जा रहे हैं । ऐसे प्रकरणमें साधारण जनतासे पहले जो व्यवस्थाका अंश रह चुके है और सवैंधानिक पदोंपर विराजित हो चुके हैं, ऐसे जनप्रतिनिधियोंको दण्डित करना अति आवश्यक है ।
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५. मुसलमानोंके रमजान पर्वको देखते हुए कर्नाटक शासनने मस्जिदोंमें पढी जानेवाली ५ समय की सामूहिक नमाजपर प्रतिबंध लगा दिया है व इसी मध्य रमजानपर ही आयोजित होनेवाले जलपान कार्यक्रमोंके आयोजनपर भी पूर्णत: प्रतिबन्धित रहनेका आदेश दिया है ।
    शासनका यह आदेश महामारीको रोकने हेतु उठाया गया एक सराहनीय प्रयास है; परंतु प्रश्न यह है कि जिस प्रकारसे जिहादी संपूर्ण राष्ट्रमें नियमोंका उल्लंघन कर मस्जिदोंमें नमाज पढने हेतु भेड बकरियों समान एकत्रित हो रहे हैं तो क्या इस नियमके कठोरतासे पालन हेतु कर्नाटक शासन व प्रशासन अपने प्रदेशमें सफल सिद्ध होंगे ?


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