उत्तिष्ठ कौन्तेय


१. भारतीय ‘क्रिकेट’ खिलाडी हरभजन व युवराज सिंहने दी शाहिद अफरीदीके ‘वीडियो’पर तीखी प्रतिक्रिया; उन्हें अपनी सीमामें रहनेका दिया परामर्श
        पूर्व पाकिस्तानी ‘क्रिकेट’ खिलाडी शाहिद अफरीदीने ‘ट्विटर’पर अपना एक वीडियो साझा करते हुए भारतके प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदीको कोरोनासे भी गम्भीर महामारी बताया व उनके कश्मीरके प्रति व्यवहारकी आलोचना की । वहीं उनके इस वक्तव्यपर भारतीय ‘क्रिकेट’ खिलाडी हरभजन सिंह व युवराज सिंहने तीखी आलोचना करते हुए अफरीदीको अपनी सीमामें रहनेको कहा है । हरभजनने यह भी कहा कि वह पूर्वमें ‘अफरीदी फाउंडेशन’ हेतु लोगोंसे सहायता हेतु आग्रहकर चुके हैं और अपनी इस कृतिपर आज वह अत्यन्त लज्जा अनुभवकर रहे हैं । उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व भी अफरीदीने इसी प्रकारका विचार ‘ट्विटर’पर साझा किया था जिसपर गौतम गंभीरने कडी प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि निर्णायक दिवसतक (कयामतके दिनतक) भी पाकिस्तानको कश्मीर प्राप्त नहीं होगा ।
         पाकिस्तानी नागरिकोंद्वारा ही नहीं अपितु वहांके जाने-माने लोगोंद्वारा भी आए दिन इस प्रकारके भारतद्वेषी विचार सामाजिक जाल स्थलोंपर साझा किए जाते रहे हैं; परन्तु भारतकी ओरसे कभी उचित कार्यवाही नहीं हुई; इसका प्रमुख कारण भारतद्वारा सदैव गांधीवादी एकांगी अहिंसाके नियमका चयन करना रहा है । (१८.०५.२०)
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२. कर्नाटकके हुबली क्षेत्रमें पुलिसद्वारा बनाया गया बन्दी सलीम, निकला हत्यारा
   कर्नाटकमें मद्यपान किए हुए सलीमने, भूख लगनेपर एक भोजनालयमें भोजन मांगा तो वहांके कर्मचारियोंने सात बजेके पश्चात भोजन देनेसे मना किया । गृहबन्दीके मध्य सभी भोजनालय सात बजे बन्दकर दिए जाते हैं । इसपर सलीमने भडककर उन्हें अपशब्द कहे और उनपर थूकनेका प्रयास भी किया । भोजनालयद्वारा सूचित किए जानेपर पुलिसने आकर उसे बन्दी बना लिया । पूछताछके मध्य पुलिसको ज्ञात हुआ कि कलबुर्गी क्षेत्रके एक हत्याकाण्डमें सलीम दोषी है । प्रतिभूतिपर आए हुए एक व्यक्तिकी उसने हत्याकर दी थी और नगरमें छुप गया था । विगत छह माहसे पुलिस उसे ढूंढ रही थी और अब उससे पूछताछ की जा रही है । उल्लेखनीय है कि इससे पहले तमिलनाडुके एक चिकित्सालयकी उपचारिकाओंपर भी संक्रमित जिहादियोंद्वारा थूका गया था जो कि भारी अपराधकी श्रेणीमें माना गया है ।
      गृहबन्दीके पश्चात भी बलपूर्वक कर्मचारियोंसे सेवा लेना और अपशब्द कहना एक जिहादीके लिए सामान्यसी बात हो गई है । ऐसे जिहादियोंको भोजनालयमें भोजन देनेके स्थानपर कारावासमें बन्दियोंवाला भोजन देना चाहिए और इनकी तनिक भी चिन्ता नहीं की जानी चाहिए । इन्हें भारी दण्ड देना ही मात्र एक पर्याय है । (१८.०५.२०२०)
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३. बंगालमें कोरोना संकटके मध्य ३०० से अधिक परिचारिकाओंने निजी चिकित्सालयोंसे दिया त्यागपत्र, अपने गृहराज्योंको लौटीं
       बंगालमें कोरोनाकी घटनाओंकी वृद्धिके मध्य सप्ताह भरमें, निजी चिकित्सालयोंमें कार्यरत, ३०० से अधिक परिचारिकाएं(नर्सेज), त्यागपत्र देकर अपने गृहराज्योंको लौट गई हैं । इनमें अधिकतर मणिपुर तथा अन्य राज्योंकी रहनेवाली हैं । तत्पश्चात राज्यमें स्वास्थ्य सेवाओंके चरमरानेका भय उत्पन्न हो गया है । उपचारिकाओंका कथन है कि कोरोनाके बढते प्रकरणोंसे सुरक्षा चिन्ताओंके कारण माता-पिताके दबावके चलते वे चाकरी(नौकरी) छोड रहे हैं । प्रशासन स्वास्थ्यकर्मियोंकी कोई सहायता नहीं कर रहा है ।
        उपचारिकाओंका यह कथन सिद्घ करता है कि बंगालमें स्थिति अत्यन्त चिन्ताजनक है, जिसे वहांका प्रशासन छुपानेका प्रयासकर रहा है और इस हेतु उनपर दवाब भी बनाया जा रहा है; अतः भारत शासन बंगालके शासनको तत्काल पदच्युत करे और वहां राष्ट्रपति शासन लागू करे ! (१७.०५.२०२०)
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४. फैजल सिद्दीकीने ‘टिकटॉक’पर ‘एसिड अटैक’का किया महिमामण्डन, १.३४ कोटि लोग हैं प्रशंसक (फॉलोवर)
       सामाजिक ‘मीडिया एप्लीकेशन टिकटॉक’पर एक ‘वीडियो’ प्रसारित हुआ है, जिसमें ‘एसिड अटैक’का महिमामण्डन किया गया है । फैजल सिद्दीकी, जिसके १.३४ कोटि
प्रशंसक हैं, ,उसने ‘तेजाब’की पीडा सहन करनेवाली महिलाओंका उपहास किया है । इसमें फैजल कहता है, “उसने तुम्हें छोड दिया, जिसके लिए तुमने मुझे छोडा था ?” इसके पश्चात लडकीके मुखपर ‘तेजाब’ फेंका जाता है और उसका मुख पूरा जल जाता है । लोगोंने फैजल व जिस युवतीने इसमें अभिनय किया है, उनके विरुद्ध कडी कार्यवाहीकी मांग की है । सामाजिक कार्यकर्ता आशीषने इसके विरुद्ध परिवाद कराया है; क्योंकि इसका सन्देश है कि यदि कोई महिला आपको अस्वीकार करती है तो प्रतिशोध लेनेके लिए उसपर ‘तेजाब’ फेंककर जला दो जो कि अत्यन्त निन्दनीय है ।
        समाजमें युवाओंको पथभ्रष्ट करनेवाले इस प्रकारके ‘वीडियो’ व मानवताद्रोही  चीनी  ‘टिकटॉक’ जैसी ‘एप्लीकेशन’पर प्रतिबन्ध होना चाहिए । प्रशासनसे हम इसमें अभिनय करनेवालोंके विरुद्ध कडी कार्यवाहीकी मांग करते हैं । (१८.०५.२०२०)
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५. मध्यप्रदेशके गुनामें गायपर धर्मान्धका घृणित अत्याचार
   मध्य प्रदेशके गुनाके चांचौडा थानेे क्षेत्रके बीनागंजमें, राम-जानकी मन्दिर, माली मोहल्लाके चौकपर, एक गायके साथ अप्राकृतिक यौन सम्बन्ध जैसे कृत्यको किसीने अपने चलभाष यन्त्रद्वारा चित्रितकर, इसकी जानकारी क्षेत्रके लोगोंको दी । लोगोंके परिवादपर यह कृत्य करने एवं धार्मिक भावनाओंको आहत करनेके लिए धर्मान्ध समीर खान पुत्र फकरूखानपर भारतीय दण्ड संहिताकी धारा ३७७ और धारा ५०५ (२) के अन्तर्गत प्राथमिकी प्रविष्ट की गई है ।
      इस प्रकरणसे स्पष्ट होता है कि ये धर्मान्ध, मानव कहलानेके योग्य भी नहीं हैं । इन पिशाचतुल्य मानवोंको कठोरसे कठोर दण्ड देकर कारागारमें बन्दकर देना चाहिए, ऐसे लोग समाजमें रहने करने योग्य नहीं हैं । (१८.५.२०२०)
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६. पाकिस्तानी हिन्दुओंका कहना, तबलीगी जमातियोके हाथों मरना स्वीकार; किन्तु मुसलमान नहीं बनेंगे
   पाकिस्तानमें अल्पसंख्यकोंके धार्मिक उत्पीडनकी एक और घटना संज्ञानमें आई है । सिंध प्रान्तमें हिन्दुओंका आरोप है कि तबलीगी जमातद्वारा उन्हें प्रताडितकर उनके घरोंको ध्वस्तकर दिया गया । एक हिन्दू लडकेका अपहरण किया गया । सिंधके नासुरपुर मटियारमें एक लघुचलचित्रमें (विडियोमें) हिन्दू महिलाएं तथा छोटे बालक हाथोंमें पट्टिकाएं लिए धर्मपरिवर्तनका विरोध करते दृष्टिगत हो रहे हैं । हिन्दुओंने कहा हम मृत्युको वरण करेंगे; परन्तु धर्मपरिवर्तन नहीं करेंगे । महिलाने कहा कि उनके घरोंको तोडा गया है । उनकी सम्पत्तिपर बलपूर्वक अधिकारकर लिया गया है, उन्हें पीटा जाता है और उनसे कहा जाता है कि घर पुनः चाहिए तो इस्लाम अपनाना होगा ।
          पाकिस्तानमें हिन्दुओंकी स्थिति अतिशय दयनीय है । उनके घरोंसे उनकी युवा बेटियोंका अपहरण तथा उनसे बलपूर्वक विवाह, धर्मपरिवर्तन ये सब नित्य हो रहा है । इमरान शासन ऐसे धर्मान्धोंका साथ देता है । भारतको इन हिन्दुओंकी दुःस्थितिपर अवश्य सोचना चाहिए । इनकी सहायता करनी चाहिए । (१८.०५.२०२०)
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७. सामाजिक प्रसार माध्यमोंपर हिन्दुओंकी एक और विजय
कथावाचनका व्यापारकर रहे वाक्चातुर्य सम्पन्न व्यापारी वर्गमें चेतना आ चुकी है । ‘अल्ला-मौला’के गीत गानेवाले और ‘अजान’के समय कथा रोककर ‘अजान’का महत्त्व समझानेवाले कथाके व्यापारियोंने व्यापार चौपट होते देख, अपने ‘वीडियो’ यूट्यूबसे हटाने आरम्भकर दिए हैं । ‘या हुसैन’ शृंखलाके ४ ‘वीडियो’ अपनी यूट्यूब वाहिनीसे मिटाना इस तथ्यकी पुष्टि करता है ।
   हिन्दुओ ! यह विजयका केवल श्रीगणेश है, संघर्ष अभी और करना होगा ! धर्म विडम्बना करनेवालोंका वैधानिक मार्गसे  विरोध करते रहें !
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८. योगीजीका क्षात्रतेजयुक्त वक्तव्य
एक पत्रकारके गृहबन्दीमें ‘ईद’पर छूट दिए जाने सम्बन्धी प्रश्नका उत्तर देते हुए अपने क्षात्रतेजका परिचय दिया । उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेशमें कोरोना संक्रमणकी आशंकाके कारण, ‘ईद’के लिए कोई छूट नहीं दी जाएगी, सभी घरमें रहकर ही ईद मनाएं ! मांसका विक्रय भी नहीं होगा । योगीजीने एक अन्य प्रश्नके उत्तरमें कहा कि मेरे लिए राजनीति या मुख्यमन्त्री पदका कोई महत्त्व नहीं है ।
     वस्तुतः ऐसे ही सिद्धान्तवादी और अलिप्त राजनेताओंकी इस देशको आवश्यकता है । उनके तुष्टीकरणकी नीतिका परित्याग करने हेतु, हम उनका अभिनन्दन करते हैं ! – चैतन्य बंसल
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९. भारतीय प्रशासनिक सेवाकी (IAS) परीक्षामें अनायास मुसलमानोंकी बाढ क्यों आ गई है ?
विगत ४-५ वर्षोंमें (२०१५ से) कश्मीरी मुस्लिम, युवक संघ लोक सेवा आयोगकी (UPSC) चयन प्रक्रियामें, अपेक्षाकृत अधिक संख्यामें चयनित हो रहे हैं और केवल कश्मीरी ही नहीं; अपितु पूरे भारतसे मुस्लिम युवक भी बडी संख्यामें संघ लोक सेवा आयोगकी (UPSC) चयन प्रक्रियासे पहलेकी अपेक्षा अधिक चयनित हो रहे हैं ।
सम्भवतः इसका कारण यह तो नहीं कि जो मुस्लिम ‘उर्दू साहित्य’के माध्यमसे परीक्षा देगा तो स्वाभाविक रूपसे उसका परीक्षक भी उर्दूका ही ज्ञाता होगा और यह सर्वविदित है कि (अपवादोंको छोड दें तो) हिन्दू उर्दू नही पढते नहीं अर्थात उनका परीक्षण करनेवाला मुस्लिम ही होगा और वो चाहेगा उसके पन्थका व्यक्ति ही अधिकारी बने जिससे वे समय आनेपर शासनमें अपना प्रभुत्व बढा सकें ।
यदि ऐसा है तो यह ‘उर्दू’से भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) और संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) जैसी परीक्षाओंमें मुस्लिम और कश्मीरी युवकोंको देशके उच्च पदोंपर बैठानेका षड्यन्त्र है । जिससे यदि कभी हिन्दू-मुस्लिम गृहयुद्ध हो तो ये लोग अपने वर्गका साथ दें और ओवेसी जैसे लोग इनको सरलतासे अपने नियन्त्रणमें कर सकें ।
यद्यपि यह आशंका ही है; परन्तु इस आशंकाको पूर्णतः अस्वीकृत नहीं किया जा सकता; क्योंकि देशमें ऐसे अनेक संस्थान हैं जहां ‘इस्लाम’ पढाया जाता है; किन्तु एक भी ऐसा विश्वविद्यालय इस देशमें नहीं, जहां हिन्दुत्व या वैदिक संस्कृतिका अध्ययन कराया जाता हो !
इस आशंकाको बल इसलिए भी मिलता है कि
जून २०१९ में प्रकाशित एक समाचारके अनुसार
केन्द्र सरकारने २०१८-१९ में मुस्लिम छात्रोंको ८०% तो हिन्दुओंको ४.७% छात्रवृति दी थी ।
२०१८-१९ में केन्द्र शासनकी २० योजनाओंके अन्तर्गत दी जानेवाली छात्रवृत्तिका (स्कॉलरशिपका) प्रायः ८०% भाग मुस्लिम छात्रोंको दिया गया ।
आंकडोंके अनुसार छात्रवृत्ति पानेवाले छात्रोंमें ८८ लाख मुस्लिम, ८.२६ लाख ईसाई, ५.४५ लाख सिख और ५.२ लाख हिन्दू थे । छात्रवृत्ति पानेवालोंमें १.९४ लाख (१.८ प्रतिशत) बौद्ध तथा १.०७ लाख (एक प्रतिशत) जैन छात्र भी थे ।
इस मध्य १४ केन्द्रीय मन्त्रालयोंद्वारा प्रेषित छात्रवृत्ति योजनाओंके अन्तर्गत वर्ष २०१८-१९ में २,१५७ करोड रुपये वितरित किए गए और कुल राशिमेंसे १,०३२ करोड रुपये मुस्लिम छात्रोंपर, १८३ करोड रुपये सिख छात्रों और १२८ करोड रुपये हिन्दू छात्रोंपर व्यय किए गए ।
यदि दोनों समाचारों कोई परस्पर सम्बन्ध है तो यह अत्यन्त ही अशुभ संकेत है और न केवल हिन्दुओंके लिए; अपितु राष्ट्रके लिए भी एक भावी और भारी संकट है; अतः भारत शासनको चाहिए कि संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), भारतीय पुलिस सेवा IPS जैसी उच्च पदकी परीक्षाओंको केवल हिन्दी जो कि राष्ट्रभाषा है और अंग्रेजी जो कि प्रचलित भाषा और कार्य भी अधिकतर इनमें ही होते हैं; अतः केवल इन्हीं दो भाषाओंमें परीक्षा आयोजित करे अन्यथा शासन तन्त्रमें व्यवस्था विरोधी शक्तियोंके प्रवेशकी आशंकाको निराधार प्रमाणित नहीं किया जा सकेगा । वर्तमान परिस्थितियोंको देखते हुए अब और भी अधिक सतर्क रहनेकी आवश्यकता है; क्योंकि वर्ग विशेषसे सम्बन्धित अनेकानेक लोग अपनी निष्ठा, भारतके स्थानपर अपने सम्प्रदाय विशेषमें व्यक्तकर चुके हैं और समय आनेपर वे अपने पन्थके हितमें कार्य करेंगे, देशके हितमें नहीं । – दिनेश दवे


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